जयपुर। पंचायत चुनाव की पहली परीक्षा में कहीं नेताओं के परिवार की सियासी विरासत आगे बढ़ी तो कहीं रिश्तेदारों को हार का सामना करना पड़ा। पूर्व मंत्री के बेटे से लेकर कृषि मंत्री की बहन और जिला प्रमुख के बेटे तक मैदान में उतरे। किसी ने जीत के साथ गांव की सत्ता में दस्तक दी तो किसी का राजनीतिक सफर पहली ही सीढ़ी पर थम गया। बाड़मेर में पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी की पत्नी ने सातवीं बार सरपंच बनकर अपनी पकड़ दिखाई। नतीजों ने साफ किया कि पंचायत की चौपाल पर रिश्तों की सियासत के साथ प्रत्याशियों की अपनी चुनावी परीक्षा भी हुई। नतीजों ने पंचायत चुनाव में राजनीतिक परिवारों की मौजूदगी और मतदाताओं के फैसले, दोनों को चर्चा में ला दिया।
कोटा जिले की सांगोद पंचायत समिति की ग्राम पंचायत कुंदनपुर से पूर्व मंत्री भरत सिंह के पुत्र गंगासिंह सरपंच चुने गए। उनके पिता पूर्व मंत्री सिंह सरपंच, प्रधान के पद रहते हुए विधायक और मंत्री बने और फिर वार्ड पंच बने। इसके बाद फिर विधायक चुने गए। गंगासिंह की मां मीना सिंह की निर्विरोध सरपंच रह चुकी हैं। अब इस विरासत को आगे बढ़ाने के लिए परिवार की तीसरी पीढ़ी के गंगा सिंह ने पंचायतीराज चुनाव में कदम रखा है। गंगा सिंह ने 778 मतों से जीत हासिल कर अपनी राजनीतिक पारी शुरू की।
गंगा सिंह की जीत केवल सरपंच पद तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार की कई दशकों पुरानी राजनीतिक यात्रा की अगली कड़ी है। उनके दादा जुझार सिंह चार बार विधायक और मंत्री रहे। वर्ष 1984 में झालावाड़ से कांग्रेस के सांसद भी चुने गए। खातौली ग्राम पंचायत में सरपंच, वार्ड पंच व उपसरपंच के निर्वाचन के बाद जब पूरी कोरम पहली बार ग्राम पंचायत पहुंची तो उन्होंने ग्राम स्वराज की प्रतीक ग्राम पंचायत को सड़क पर बैठकर नमन किया।
कृषि मंत्री की बहन जीती
अलवर जिले की रामपुरा ग्राम पंचायत से कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा की बहन ममता मीणा ने सरपंच पद पर जीत दर्ज की। उन्होंने 261 मतों के अंतर से जीत हासिल की। यहां दो प्रत्याशी मैदान में थे, ममता मीणा पहली बार सरपंच चुनी गई हैं।
बेनीवाल की भाभी चुनाव जीतीं, विधायक की पुत्रवधु भी बनी सरपंच
नागौर की बरणगांव में सांसद हनुमान बेनीवाल की भाभी राजबाला चौधरी 149 वोट से सरपंच का चुनाव जीती। झालावाड़ की उमरिया ग्राम पंचायत में विधायक कालूराम मेघवाल की पुत्रवधू अनीता मेघवाल विजय हुई है।
पूर्व मंत्री की पत्नी सातवीं बार सरपंच
पूर्व मंत्री हेमाराम बौधरी की पत्नी भीखीदेवी सातवीं बार बायतु पंचायत समिति की वीरेन्द्र नगर ग्राम पंचायत से सरपंच चुनी गई हैं। वहीं सेड़वा पंचायत समिति की भंवार ग्राम पंचायत से भाजपा जिलाध्यक्ष अनंतराम विश्रोई की मां राजादेवी सरपंच बनी हैं। बाड़मेर में 60 ग्राम पंचायतों में निर्विरोध सरपंच चुने गए।
जिला प्रमुख पुत्र हारा
कोटा जिले की पंचायत तेहरोली के सरपंच पद के चुनाव में जिला प्रमुख मुकेश मेघवाल के पुत्र कपिल को हार का सामना करना पड़ा। उधर, नागौर जिले की मुदियाड़ ग्राम पंचायत से खींवसर विधायक रेवंतराम डांगा के भतीजे नरेश 38 वोट से सरपंच का चुनाव हार गए।
बेटा जीता, दामाद को मिली हार
सागवाड़ा विधायक शंकरलाल डेचा के बेटे राहुल डामोर ने डेजा ग्राम पंचायत से 340 मतों से सरपंच पद का चुनाव जीत लिया। राहुल से पहले उनकी मां गंगादेवी डेचा सरपंच रह चुकी है, जबकि उनसे पहले उनके पिता शंकरलाल डेचा भी सरपंच पद पर रह चुके हैं। हालांकि, विधायक शंकरलाल डेचा के दामाद प्रकाश डेंडोर को घोटाद ग्राम पंचायत से निराशा हाथ लगी। वह महज चार वोटों के अंतर से चुनाव हार गए।
सांसद के पैतृक गांव में काका को मिली हार
झौथरी पंचायत समिति की खरवनखुनिया ग्राम पंचायत में बीएपी सांसद राजकुमार रोत के काका सोहन चुनाव मैदान में थे। उन्हें जीत नहीं मिल सकी। सांसद का यह पैतृक गांव होने के कारण चुनाव परिणाम पर क्षेत्र की निगाहें टिकी हुई थीं।

