कुरुक्षेत्र के शाहाबाद में लिफ्ट देने के बहाने बाइक सवार ने एक और बुजुर्ग महिला को निशाना बनाया। आरोपी ने महिला को अपने साथ बाइक पर बैठा लिया, लेकिन गांव पहुंचने पर उसने बाइक नहीं रोकी। महिला के बाइक रोकने का कहने पर उसने स्पीड और बढ़ा दी। छीनाझपटी और लूटपाट की आशंका के बीच महिला चलती बाइक से कूद गई। छपरा गांव की सुनहेरी देवी (55) को सड़क पर गिरने से सिर, मुंह, बाजू और घुटनों पर चोटें आईं। महिला किसी तरह पैदल अपने घर पहुंची। तब परिवार के लोग उसे अस्पताल लेकर गए, जहां उसकी मरहम-पट्टी करवाई गई। शाहाबाद में 19 अक्टूबर को चढूनी गांव नानकी देवी के साथ भी इसी तरह लिफ्ट देकर बालियां छीनी गई थी। मिल के पास कर रही थी बस का इंतजार सुनहेरी देवी ने बताया कि वो दोपहर को शुगर मिल के पास बस का इंतजार कर रही थी। इसी दौरान हेलमेट पहने एक युवक बाइक लेकर आया और बोला कि अम्मा गांव में चलेगी क्या?। उसे उस युवक पर कोई शक नहीं हुआ, इसलिए वो उसकी बाइक पर बैठ गई। युवक उसे लेकर गांव की तरफ चल दिया। गांव पहुंचने पर भी नहीं रोकी बाइक गांव के पास पहुंचने पर युवक ने बाइक नहीं रोकी। गांव आ गया तो उन्होंने बाइक सवार से रुकने के लिए कहा, लेकिन उसने बाइक नहीं रोकी, बल्कि दोबारा रोकने की बात कहने पर उसने रफ्तार और बढ़ा दी। महिला ने शोर भी मचाया, लेकिन उस समय आसपास कोई मौजूद नहीं था। गला पकड़ बाइक रुकवाने की कोशिश की आरोपी ने बाइक नहीं रोकी, तो उसने पीछे से उसका गला पकड़ लिया। जब उसे लगा कि आरोपी बाइक नहीं रोक रहा, तो उसने चलती बाइक से छलांग लगा दी। सड़क पर गिरने से उनके सिर, मुंह, बाजू और घुटनों पर चोटें आईं। इसके बाद वह किसी तरह पैदल घर पहुंचीं। परिवार के लोगों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया और इलाज करवाया। 19 अक्टूबर को बुजुर्ग से लूटी थीं बालियां इससे पहले 19 अक्टूबर को भी लिफ्ट देने के बहाने लूट की वारदात हुई थी। चढ़ूनी गांव की 80 वर्षीय नानकी देवी अपने बेटे कर्म सिंह के साथ शरीफगढ़ गांव के बस अड्डे के पास खड़ी थीं। दोनों को दवा लेने के लिए शाहाबाद जाना था और वे बस का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान बाइक सवार एक युवक ने नानकी देवी को लिफ्ट देने की बात कही। बेटे ने भरोसा करके अपनी मां को उसकी बाइक पर बैठा दिया। आरोपी उन्हें खरींडवा गांव की तरफ खेतों के पास ले गया और धक्का देकर नीचे गिरा दिया। इसके बाद उनके कानों से सोने की बालियां झपटकर फरार हो गया। गिरने के बाद नानकी देवी बेहोश हो गई थीं। होश आने पर उनके कानों से खून बह रहा था और दोनों कान फट चुके थे।

