‘पुष्पा का पति शराब पीता था और उस पर नौकरी छोड़ने का दबाव बनाने लगा था, इसलिए दोनों के बीच विवाद बढ़ा और बात तलाक तक पहुंंच गई। मेरी बेटी बहुत शांत और हमेशा पढ़ाई पर ध्यान देने वाली रही है। मैंने भी पूरी नौकरी ईमानदारी से की, कभी कोई दाग नहीं लगा। अपने बच्चों को भी यही सिखाया। मेरी बेटी ऐसा काम कैसे कर सकती है, यह मेरी समझ से बाहर है।’ ये कहना है सिपाही अजीत कुमार हत्याकांड में आरोपी SI पुष्पा कुमारी के पिता अरुण प्रजापति का। औरंगाबाद के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के खखड़ा गांव की रहने वाली पुष्पा पर आरोप पर उनके पिता ने कहा कि साजिश के तहत मेरी बेटी को फंसाया गया है। जांच पूरी होने से पहले ही पुष्पा को दोषी की तरह पेश किया जा रहा है। हमको बेटी से नहीं मिलने दिया गया और नहीं एफआईआर की कॉपी दी गई। पहले पूरा मामला समझिए.. नालंदा में 14 अक्टूबर की रात शराब लदे संदिग्ध वाहन का पीछा करने के दौरान उत्पाद विभाग के सिपाही अजीत कुमार को गोली लगी। उन्हें पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, फिर पटना रेफर किया गया। 15 अक्टूबर को उनकी मौत की खबर आई। शुरुआती जानकारी में शराब तस्करों की फायरिंग में गोली लगने की बात कही गई, लेकिन 16 अक्टूबर को एसपी हृदयकांत ने बताया कि अजीत को अपनी ही टीम के होमगार्ड जवान की राइफल से गोली लगी थी। फायरिंग में तीन राउंड चलाए गए थे, जिनमें दो मिसफायर हुए। जांच में घटना की सूचना देने में देरी और सबूत छिपाने की आशंका भी सामने आई। इसके बाद दरोगा पुष्पा कुमारी समेत सात लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई। 17 अक्टूबर को मामले की जांच करने वाली एसआईटी के दो अधिकारियों को नकद पुरस्कार दिया गया। वहीं, 22 अक्टूबर को आई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुष्पा कुमारी की संपत्ति और शराब तस्करों से कथित संबंधों की जांच भी शुरू हुई। हालांकि, मामले में आरोपियों की भूमिका और घटना के पीछे की मंशा पर अंतिम निष्कर्ष अदालत की कार्यवाही और जांच के नतीजों के बाद ही स्पष्ट होगा। अब पढिए, पिता ने क्या क्या बताया… ‘जांच पूरी होने से पहले ही बेटी को दोषी बना दिया’ पुष्पा कुमारी का पैतृक घर औरंगाबाद जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के खखड़ा गांव में है। उनके पिता अरुण प्रजापति दो दिन पहले गांव आए थे। हालांकि, घर पर उनसे मुलाकात नहीं हो सकी। लेकिन फोन पर बातचीत हुई है। अरुण प्रजापति ने कहा कि शराब माफियाओं से संबंध बताए जा रहे है। अभी जांच पूरी नहीं हुई है, ऐसे में किसी को दोषी मानकर पेश करना ठीक नहीं है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब मामले की जांच चल रही है तो इन संबंधों को लेकर इतनी बातें कैसे सामने आ रही हैं। ‘पुलिस सेवा में रहा, फिर भी बेटी से नहीं मिलने दिया’ अरुण प्रजापति ने बताया कि हम खुद पुलिस सेवा में रहे हैं और पिछले साल रिटायर हुए हैं। इसके बावजूद उन्हें अपनी बेटी से मिलने का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि हम बेटी पर लगे आरोपों को समझना चाहते हैं। लेकिन उन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं दी जा रही है। हम चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और सभी तथ्य सामने आने चाहिए। ‘सात IPS अधिकारियों के साथ काम किया, कभी दाग नहीं लगा’ अपनी बेटी का बचाव करते हुए अरुण प्रजापति ने कहा कि हम अपनी नौकरी ईमानदारी से की और कभी कोई दाग नहीं लगा। नालंदा जिले में भी उनकी पोस्टिंग रही थी। अरुण के मुताबिक, सात आईपीएस अधिकारियों के साथ काम करने के दौरान उन्होंने अपनी जिम्मेदारियां पूरी निष्ठा से निभाईं। उन्होंने अपने बच्चों को भी हमेशा ईमानदारी से काम करने और सही रास्ते पर चलने की सीख दी। पुष्पा का स्वभाव ऐसा नहीं रहा था, जो किसी की हत्या कर दे। शादी के बाद पति से विवाद बढ़ गया था अरुण प्रजापति ने पुष्पा की शादी और उसके बाद के पारिवारिक विवादों का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, साल 2024 में बेटी की शादी पुलिस सेवा में उनके साथ काम कर चुके एक दरोगा के बेटे से की थी। शादी से पहले हमारे बेटे ने इस रिश्ते पर आपत्ति जताई थी। लेकिन हम अपने बेटे की बात नहीं माना था। इसके बावजूद शादी की थी। शादी के बाद दामाद ने शराब पीना शुरू कर दिया और पुष्पा पर नौकरी छोड़ने का दबाव बनाने लगा। इसकी वजह से दोनों के बीच विवाद बढ़ने लगा और बात तलाक तक पहुंच गई। दादा बोले- बचपन से शांत थी पुष्पा पुष्पा के दादा चंद्रिका प्रजापति ने कहा कि पुष्पा बचपन से ही सौम्य और शांत स्वभाव की थी। घर में उसका किसी से विवाद नहीं होता था। वह शांत रहती थी और अपनी पढ़ाई पर ध्यान देती थी। उन्होंने बताया कि पुष्पा ने पहले बिहार पुलिस में सिपाही की नौकरी हासिल की थी। इसके बाद परीक्षा पास कर उत्पाद विभाग में दरोगा बनी। अपनी पोती पर लगे गंभीर आरोपों के बारे में बात करते हुए दादा भावुक हो गए। बातचीत के दौरान उनका गला भर आया। चाची ने की निष्पक्ष जांच की मांग पुष्पा की चाची ईश्वरी देवी ने कहा कि किसी ने दुश्मनी निकालने के लिए पुष्पा के खिलाफ साजिश रची है। पुष्पा किसी की हत्या नहीं कर सकती। मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जांच पूरी होने से पहले उसे दोषी नहीं माना जाना चाहिए। ‘पुष्पा का पति शराब पीता था और उस पर नौकरी छोड़ने का दबाव बनाने लगा था, इसलिए दोनों के बीच विवाद बढ़ा और बात तलाक तक पहुंंच गई। मेरी बेटी बहुत शांत और हमेशा पढ़ाई पर ध्यान देने वाली रही है। मैंने भी पूरी नौकरी ईमानदारी से की, कभी कोई दाग नहीं लगा। अपने बच्चों को भी यही सिखाया। मेरी बेटी ऐसा काम कैसे कर सकती है, यह मेरी समझ से बाहर है।’ ये कहना है सिपाही अजीत कुमार हत्याकांड में आरोपी SI पुष्पा कुमारी के पिता अरुण प्रजापति का। औरंगाबाद के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के खखड़ा गांव की रहने वाली पुष्पा पर आरोप पर उनके पिता ने कहा कि साजिश के तहत मेरी बेटी को फंसाया गया है। जांच पूरी होने से पहले ही पुष्पा को दोषी की तरह पेश किया जा रहा है। हमको बेटी से नहीं मिलने दिया गया और नहीं एफआईआर की कॉपी दी गई। पहले पूरा मामला समझिए.. नालंदा में 14 अक्टूबर की रात शराब लदे संदिग्ध वाहन का पीछा करने के दौरान उत्पाद विभाग के सिपाही अजीत कुमार को गोली लगी। उन्हें पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, फिर पटना रेफर किया गया। 15 अक्टूबर को उनकी मौत की खबर आई। शुरुआती जानकारी में शराब तस्करों की फायरिंग में गोली लगने की बात कही गई, लेकिन 16 अक्टूबर को एसपी हृदयकांत ने बताया कि अजीत को अपनी ही टीम के होमगार्ड जवान की राइफल से गोली लगी थी। फायरिंग में तीन राउंड चलाए गए थे, जिनमें दो मिसफायर हुए। जांच में घटना की सूचना देने में देरी और सबूत छिपाने की आशंका भी सामने आई। इसके बाद दरोगा पुष्पा कुमारी समेत सात लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई। 17 अक्टूबर को मामले की जांच करने वाली एसआईटी के दो अधिकारियों को नकद पुरस्कार दिया गया। वहीं, 22 अक्टूबर को आई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुष्पा कुमारी की संपत्ति और शराब तस्करों से कथित संबंधों की जांच भी शुरू हुई। हालांकि, मामले में आरोपियों की भूमिका और घटना के पीछे की मंशा पर अंतिम निष्कर्ष अदालत की कार्यवाही और जांच के नतीजों के बाद ही स्पष्ट होगा। अब पढिए, पिता ने क्या क्या बताया… ‘जांच पूरी होने से पहले ही बेटी को दोषी बना दिया’ पुष्पा कुमारी का पैतृक घर औरंगाबाद जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के खखड़ा गांव में है। उनके पिता अरुण प्रजापति दो दिन पहले गांव आए थे। हालांकि, घर पर उनसे मुलाकात नहीं हो सकी। लेकिन फोन पर बातचीत हुई है। अरुण प्रजापति ने कहा कि शराब माफियाओं से संबंध बताए जा रहे है। अभी जांच पूरी नहीं हुई है, ऐसे में किसी को दोषी मानकर पेश करना ठीक नहीं है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब मामले की जांच चल रही है तो इन संबंधों को लेकर इतनी बातें कैसे सामने आ रही हैं। ‘पुलिस सेवा में रहा, फिर भी बेटी से नहीं मिलने दिया’ अरुण प्रजापति ने बताया कि हम खुद पुलिस सेवा में रहे हैं और पिछले साल रिटायर हुए हैं। इसके बावजूद उन्हें अपनी बेटी से मिलने का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि हम बेटी पर लगे आरोपों को समझना चाहते हैं। लेकिन उन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं दी जा रही है। हम चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और सभी तथ्य सामने आने चाहिए। ‘सात IPS अधिकारियों के साथ काम किया, कभी दाग नहीं लगा’ अपनी बेटी का बचाव करते हुए अरुण प्रजापति ने कहा कि हम अपनी नौकरी ईमानदारी से की और कभी कोई दाग नहीं लगा। नालंदा जिले में भी उनकी पोस्टिंग रही थी। अरुण के मुताबिक, सात आईपीएस अधिकारियों के साथ काम करने के दौरान उन्होंने अपनी जिम्मेदारियां पूरी निष्ठा से निभाईं। उन्होंने अपने बच्चों को भी हमेशा ईमानदारी से काम करने और सही रास्ते पर चलने की सीख दी। पुष्पा का स्वभाव ऐसा नहीं रहा था, जो किसी की हत्या कर दे। शादी के बाद पति से विवाद बढ़ गया था अरुण प्रजापति ने पुष्पा की शादी और उसके बाद के पारिवारिक विवादों का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, साल 2024 में बेटी की शादी पुलिस सेवा में उनके साथ काम कर चुके एक दरोगा के बेटे से की थी। शादी से पहले हमारे बेटे ने इस रिश्ते पर आपत्ति जताई थी। लेकिन हम अपने बेटे की बात नहीं माना था। इसके बावजूद शादी की थी। शादी के बाद दामाद ने शराब पीना शुरू कर दिया और पुष्पा पर नौकरी छोड़ने का दबाव बनाने लगा। इसकी वजह से दोनों के बीच विवाद बढ़ने लगा और बात तलाक तक पहुंच गई। दादा बोले- बचपन से शांत थी पुष्पा पुष्पा के दादा चंद्रिका प्रजापति ने कहा कि पुष्पा बचपन से ही सौम्य और शांत स्वभाव की थी। घर में उसका किसी से विवाद नहीं होता था। वह शांत रहती थी और अपनी पढ़ाई पर ध्यान देती थी। उन्होंने बताया कि पुष्पा ने पहले बिहार पुलिस में सिपाही की नौकरी हासिल की थी। इसके बाद परीक्षा पास कर उत्पाद विभाग में दरोगा बनी। अपनी पोती पर लगे गंभीर आरोपों के बारे में बात करते हुए दादा भावुक हो गए। बातचीत के दौरान उनका गला भर आया। चाची ने की निष्पक्ष जांच की मांग पुष्पा की चाची ईश्वरी देवी ने कहा कि किसी ने दुश्मनी निकालने के लिए पुष्पा के खिलाफ साजिश रची है। पुष्पा किसी की हत्या नहीं कर सकती। मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जांच पूरी होने से पहले उसे दोषी नहीं माना जाना चाहिए।

