सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) के कार्यकारी निदेशक (ईडी) सुनील कुमार को कंपनी का चेयरमैन नियुक्त किया है। इसके साथ ही वह कंपनी के इतिहास में कार्यकारी निदेशक के पद से सीधे शीर्ष पद पर पहुंचने वाले पहले अधिकारी बन गए हैं। नियुक्ति संबंधी फैसले के अनुसार, कुमार अरुण कुमार सिंह का स्थान लेंगे जिनका विस्तारित कार्यकाल छह दिसंबर को समाप्त हो रहा है।
यह नियुक्ति कई चरणों वाली चयन प्रक्रिया के बाद हुई है। इसमें खोज-सह-चयन समिति ने दो दौर के साक्षात्कार के बाद कुमार के नाम की सिफारिश की थी। उसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी।
बुधवार को जारी आदेश के अनुसार, फिलहाल ओएनजीसी की मेहसाणा परिसंपत्ति के कार्यकारी निदेशक के रूप में कार्यरत 58 वर्षीय कुमार को कंपनी का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। वह सात दिसंबर, 2026 या उसके बाद कार्यभार संभालने की तारीख से 31 दिसंबर, 2028 को सेवानिवृत्ति तक इस पद पर रहेंगे। इसके बाद उन्हें संविदा के आधार पर नियुक्त किया जाएगा।
उनका कुल कार्यकाल तीन साल या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, रहेगा। कुमार की पदोन्नति ओएनजीसी में शीर्ष पद पर नियुक्ति की परंपरागत प्रक्रिया से अलग है। आम तौर पर कंपनी के चेयरमैन पद तक पहुंचने के लिए निदेशक मंडल के स्तर पर काम करने का पूर्व अनुभव जरूरी रहा है।
ओएनजीसी में यह पहला मौका है जब किसी अधिकारी को कार्यकारी निदेशक के पद से सीधे कंपनी के शीर्ष पद पर नियुक्त किया गया है। कार्यकारी निदेशक का पद निदेशक मंडल के स्तर से एक पायदान नीचे होता है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) और गेल (इंडिया) लि. जैसी अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की ऊर्जा कंपनियों में इस तरह की नियुक्तियां हुई हैं, लेकिन ओएनजीसी में अबतक ऐसा नहीं हुआ था।
कुमार की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब सरकार घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रही है। वह देश की सबसे बड़ी तेल एवं गैस उत्पादक कंपनी की कमान संभालेंगे। कुमार ने आठ जनवरी, 2025 को ओएनजीसी की मेहसाणा परिसंपत्ति के कार्यकारी निदेशक और परिसंपत्ति प्रबंधक का कार्यभार संभाला था।
इसके बाद उन्हें 24 जनवरी, 2025 से ओएनजीसी टेरी बायोटेक लि. के निदेशक मंडल में ओएनजीसी के नामित निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया। कुमार ने धनबाद स्थित इंडियन स्कूल ऑफ माइंस से पेट्रोलियम इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई की है। उनके पास विपणन और वित्त में विशेषज्ञता के साथ व्यापार प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिग्री है।
उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने 1991 में असम के शिवसागर-नजीरा क्षेत्र में उत्पादन विभाग में सहायक कार्यकारी इंजीनियर के रूप में ओएनजीसी में अपना करियर शुरू किया था। तीन दशक से अधिक के करियर में उन्होंने उत्पादन और अपतटीय क्षेत्र में तेल एवं गैस परिचालन के विभिन्न क्षेत्रों में काम किया है। कुमार का चयन व्यापक खोज प्रक्रिया के बाद हुआ है।
इस पद के लिए ओएनजीसी और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की ऊर्जा कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने आवेदन किया था। इनमें तेल एवं गैस उत्पादक कंपनियों के प्रमुख और खोज, उत्पादन, प्रौद्योगिकी, वित्त तथा परिचालन संबंधी कामकाज देखने वाले निदेशक शामिल थे। इस पद के लिए शुरुआत में कम से कम 19 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था।
इनमें ओएनजीसी विदेश लि. के प्रबंध निदेशक राजर्षि गुप्ता, ओएनजीसी के प्रौद्योगिकी एवं क्षेत्रीय सेवाओं के निदेशक विक्रम सक्सेना, खोज निदेशक ओ पी सिन्हा, वित्त निदेशक अनुपम अग्रवाल और उत्पादन निदेशक भास्कर चौधरी नेत्तेम शामिल थे। अन्य उम्मीदवारों में ओएनजीसी विदेश के परिचालन निदेशक दुलाल हलदर, मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लि. के वित्त निदेशक देवेंद्र कुमार और ऑयल इंडिया लि. के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक रंजीत रथ शामिल थे। सूत्रों के अनुसार, साक्षात्कार के पहले दौर के बाद उम्मीदवारों की सूची घटाकर पांच कर दी गई थी।
इनमें से कुमार को कंपनी का प्रमुख बनाने के लिए चुना गया। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत आने वाली महारत्न कंपनी ओएनजीसी देश की सबसे बड़ी कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस उत्पादक है। चौसठ साल के सिंह ने भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक पद से सेवानिवृत्त होने के बाद सात दिसंबर, 2022 को ओएनजीसी के चेयरमैन का कार्यभार संभाला था।
सरकार ने दिसंबर, 2025 में उनका कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया था। वह छह दिसंबर, 2026 तक पद पर बने रहेंगे।

