कहते हैं पुलिस को देखकर लोग सहम जाते हैं, लेकिन मोतिहारी से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो दिल जीत लेगी। यहां पुलिस वाले डंडा नहीं, बच्चों का बस्ता थामे नजर आए। कभी पुलिस को देखकर भागने वाले बच्चे आज उसी पुलिस की गाड़ी में बैठकर स्कूल जा रहे हैं। यह अनोखी और सराहनीय पहल की है भारत-नेपाल सीमा से सटे डुमरियाघाट थानाध्यक्ष अमन कुमार ने। थानाध्यक्ष अमन कुमार ने पुलिस-पब्लिक के बीच की दूरी को मिटाने और शिक्षा को हथियार बनाने की दिशा में एक मिसाल पेश की है। दर्जनों बच्चे नहीं जा रहे थे स्कूल जानकारी के अनुसार थानाध्यक्ष अमन कुमार को सूचना मिली थी कि थाना क्षेत्र के तेल्हारा धांगर टोला में दर्जनों बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं। अधिकांश परिवार अशिक्षा और शराब के अवैध कारोबार से जुड़े होने के कारण बच्चों को स्कूल भेजने के प्रति उदासीन हैं। इस पर थानाध्यक्ष खुद टोला में पहुंचे। वहां उन्होंने करीब 40 बच्चों के अभिभावकों के साथ बैठक की और उन्हें शिक्षा के महत्व को समझाया। उन्होंने अभिभावकों को समझाया कि शिक्षा ही एकमात्र रास्ता है जो उनके बच्चों को गरीबी और अपराध के दलदल से निकालकर मुख्यधारा से जोड़ सकता है। थानाध्यक्ष की बातों का असर हुआ और अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार हो गए। बच्चों को खुद स्कूल पहुंचाने गए थानाध्यक्ष इतना ही नहीं, बच्चों में स्कूल के प्रति उत्साह जगाने के लिए थानाध्यक्ष ने उन्हें अपने पुलिस वाहन में बैठाया और खुद स्कूल तक पहुंचाया। पुलिस की गाड़ी में स्कूल जाने की खुशी बच्चों के चेहरे पर साफ देखी जा रही थी। इस पहल की चर्चा जब दूसरे टोले में पहुंची तो वहां के भी करीब 30 बच्चों ने स्कूल जाने की इच्छा जताई। पुलिस ने उन बच्चों को भी स्कूल पहुंचाया। इस तरह एक ही दिन में 70 बच्चों को शिक्षा से जोड़ा गया। कॉपी-किताब उपलब्ध कराने का दिलाया भरोसा इस दौरान थानाध्यक्ष ने उन परिवारों को भी सख्त हिदायत दी जो देसी चुलाई शराब के अवैध धंधे में लिप्त हैं। उन्होंने कहा कि इस धंधे को छोड़कर अपने बच्चों के भविष्य पर ध्यान दें, नहीं तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने बच्चों को कॉपी-किताब और पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध कराने का भी भरोसा दिलाया। थानाध्यक्ष अमन कुमार की इस मानवीय पहल की पूरे जिले में खूब सराहना हो रही है। लोग कह रहे हैं कि अगर हर थानाध्यक्ष इसी तरह सोचने लगे तो न सिर्फ अपराध कम होगा, बल्कि समाज का भविष्य भी संवर जाएगा। कहते हैं पुलिस को देखकर लोग सहम जाते हैं, लेकिन मोतिहारी से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो दिल जीत लेगी। यहां पुलिस वाले डंडा नहीं, बच्चों का बस्ता थामे नजर आए। कभी पुलिस को देखकर भागने वाले बच्चे आज उसी पुलिस की गाड़ी में बैठकर स्कूल जा रहे हैं। यह अनोखी और सराहनीय पहल की है भारत-नेपाल सीमा से सटे डुमरियाघाट थानाध्यक्ष अमन कुमार ने। थानाध्यक्ष अमन कुमार ने पुलिस-पब्लिक के बीच की दूरी को मिटाने और शिक्षा को हथियार बनाने की दिशा में एक मिसाल पेश की है। दर्जनों बच्चे नहीं जा रहे थे स्कूल जानकारी के अनुसार थानाध्यक्ष अमन कुमार को सूचना मिली थी कि थाना क्षेत्र के तेल्हारा धांगर टोला में दर्जनों बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं। अधिकांश परिवार अशिक्षा और शराब के अवैध कारोबार से जुड़े होने के कारण बच्चों को स्कूल भेजने के प्रति उदासीन हैं। इस पर थानाध्यक्ष खुद टोला में पहुंचे। वहां उन्होंने करीब 40 बच्चों के अभिभावकों के साथ बैठक की और उन्हें शिक्षा के महत्व को समझाया। उन्होंने अभिभावकों को समझाया कि शिक्षा ही एकमात्र रास्ता है जो उनके बच्चों को गरीबी और अपराध के दलदल से निकालकर मुख्यधारा से जोड़ सकता है। थानाध्यक्ष की बातों का असर हुआ और अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार हो गए। बच्चों को खुद स्कूल पहुंचाने गए थानाध्यक्ष इतना ही नहीं, बच्चों में स्कूल के प्रति उत्साह जगाने के लिए थानाध्यक्ष ने उन्हें अपने पुलिस वाहन में बैठाया और खुद स्कूल तक पहुंचाया। पुलिस की गाड़ी में स्कूल जाने की खुशी बच्चों के चेहरे पर साफ देखी जा रही थी। इस पहल की चर्चा जब दूसरे टोले में पहुंची तो वहां के भी करीब 30 बच्चों ने स्कूल जाने की इच्छा जताई। पुलिस ने उन बच्चों को भी स्कूल पहुंचाया। इस तरह एक ही दिन में 70 बच्चों को शिक्षा से जोड़ा गया। कॉपी-किताब उपलब्ध कराने का दिलाया भरोसा इस दौरान थानाध्यक्ष ने उन परिवारों को भी सख्त हिदायत दी जो देसी चुलाई शराब के अवैध धंधे में लिप्त हैं। उन्होंने कहा कि इस धंधे को छोड़कर अपने बच्चों के भविष्य पर ध्यान दें, नहीं तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने बच्चों को कॉपी-किताब और पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध कराने का भी भरोसा दिलाया। थानाध्यक्ष अमन कुमार की इस मानवीय पहल की पूरे जिले में खूब सराहना हो रही है। लोग कह रहे हैं कि अगर हर थानाध्यक्ष इसी तरह सोचने लगे तो न सिर्फ अपराध कम होगा, बल्कि समाज का भविष्य भी संवर जाएगा।

