अंबाला में फर्जी दस्तावेज/ई-वे बिल तैयार कर चावल के छिलके के नीचे छिपाकर 990 पेटी अंग्रेजी शराब बिहार तस्करी करने के हाई-प्रोफाइल मामले में गिरफ्तार रोहतक जिले के लॉ स्टूडेंट को जमानत मिल गई है। वह सितंबर से जेल में बंद है। परीक्षा की तैयारी को लेकर छात्र ने अंबाला के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) अरविंद कुमार बंसल की कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी। वह अपने माता-पिता का इकलौता बेटा है। कोर्ट ने आरोपी 23 वर्षीय आकाश को ₹50,000 के जमानती बॉन्ड और इतनी ही राशि की एक जमानत पर रिहा करने के आदेश पारित किए हैं। कोर्ट ने कहा कि फिलहाल की जांच में छात्र का सीधा कनेक्शन इस मामले में सामने नहीं आया है। जाने क्या था पूरा मामला… अंग्रेजी शराब तस्करी का ये मामला एएसआई विशाल कुमार की शिकायत पर थाना पड़ाव (अंबाला कैंट) में एफआईआर- 271 (24 अगस्त 2026) के तहत दर्ज किया गया था। इसमें आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 318(4) (धोखाधड़ी), 338 (जालसाजी), 336(3) (फर्जी रिकॉर्ड बनाना), 340(2) (कूटरचित दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करना), 61(2) (आपराधिक षड्यंत्र) और हरियाणा आबकारी अधिनियम, 2020 की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया। पुलिस के अनुसार, हुडा टाउन पार्क, सेक्टर-34 अंबाला कैंट के पास खड़े एक ट्रक (CG04MS9518) से चावल के छिलके के नीचे छिपाई गई रॉयल स्टैग और इम्पीरियल ब्लू की कुल 990 पेटी शराब बरामद की गई। ट्रक से चावल का फर्जी इनवॉइस और फर्जी ई-वे बिल बरामद हुआ, जबकि ट्रक का नंबर, इंजन और चेसिस नंबर भी टेंपर्ड पाए गए। पुलिस के अनुसार, यह शराब बिहार राज्य (जहां शराबबंदी लागू है) ले जाई जा रही थी और ट्रक चालक (सह-आरोपी प्रकाश) को ₹50,000 की भाड़ा राशि मिलनी थी। इसी केस में 8 सितंबर को रोहतक के लॉ छात्र आकाश की गिरफ्तारी हुई थी। पुलिस का दावा: अभियोजन पक्ष के अनुसार, रोहतक निवासी आरोपी आकाश और सह-आरोपी साहिल एक ब्रीजा कार में ट्रक के आगे-आगे चल रहे थे ताकि पुलिस नाकाबंदी या चेकिंग की पूर्व सूचना ट्रक ड्राइवर को दे सकें। आरोपी आकाश का नाम सह-आरोपी दीपक चौधरी के इकबालिया बयान में सामने आया था। जमानत के विरोध में दी गई ये दलील.. सरकारी वकील ने कोर्ट में कहा कि आरोपियों ने फोन नष्ट कर दिए थे। बिहार के निवासियों के नाम पर दर्ज सिम कार्ड का उपयोग कर पूरे गिरोह से जुड़े हुए थे। यह एक गहरा आपराधिक षड्यंत्र है और मुख्य सरगनाओं की गिरफ्तारी अभी बाकी है, इसलिए आरोपी आकाश को जमानत न दी जाए। कोर्ट में दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट का निष्कर्ष… अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार बंसल ने दोनों पक्षों को सुनने और केस से संबंधित डॉक्यूमेंट का अध्ययन करने के बाद इन आधार पर आरोपी आकाश की जमानत अर्जी मंजूर की। कोई सीधी बरामदगी नहीं: आरोपी से मौके पर कोई जब्ती नहीं हुई है और न ही वह ट्रक के आसपास पाया गया था। केवल इकबालिया बयान का साक्ष्य: आरोपी का नाम केवल सह-आरोपी (दीपक चौधरी) के पुलिस के समक्ष दिए गए इकबालिया बयान में आया है, जिसकी कानूनी स्वीकार्यता संदिग्ध/बहस योग्य है। कॉल रिकॉर्ड व मनी ट्रेल का अभाव: पुलिस अभी तक आरोपी और मुख्य साजिशकर्ताओं के बीच कोई वित्तीय लेनदेन या कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) पेश नहीं कर पाई है। सफरा इतिहास व भविष्य: आरोपी का कोई पुराना आपराधिक इतिहास नहीं है और वह लॉ का छात्र है।

