सिरसा के डबवाली में कालुआना लिंक चैनल किसानों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। एक सप्ताह में दूसरी बार उसी जगह कटाव हो गया। चार दिन की मेहनत से ठीक किया गया कटाव फिर से टूटने से किसानों की चिंता बढ़ गई। कटाव का पानी धान और नरमे की फसलों में भर गया, जिससे करीब 15 एकड़ से ज्यादा खेत डूब गए। किसानों में सिंचाई विभाग के प्रति काफी गुस्सा है। गंगा रकबे में पहले कटाव को ठीक करने में विभाग को चार दिन लगे। एक एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में मरम्मत के बाद बुधवार सुबह छह बजे लिंक चैनल में पानी छोड़ा गया। पानी मरम्मत वाली जगह पर पहुंचते ही मजदूर को मिट्टी से बुलबुले दिखे। कुछ ही देर में ठीक किए गए हिस्से में दरारें आ गईं और कटाव फिर से शुरू हो गया। पानी किसान छबीलाराम के खेत में घुसने लगा। खेत में काम कर रहे मजदूरों को चैनल टूटने का अंदेशा हुआ तो उन्होंने तुरंत खेत के मालिक को सूचना दी। इसके बाद किसान ने संबंधित विभाग के बेलदार को कटाव की जानकारी दी। सूचना मिलते ही विभाग के एसडीओ सोनू कुमार मौके पर पहुंचे और बिना देरी किए मौजगढ़ हेड से लिंक चैनल में पानी की आपूर्ति बंद करवा दी। हालांकि, चैनल में मौजूद पानी कटाव वाले स्थान से निकलकर खेतों में भरता रहा। पानी का बहाव तेज होने के कारण आसपास के खेतों में जलभराव का दायरा बढ़ता चला गया। पहले कटाव से उबरने की तैयारी कर रहा था किसान, फिर टूटा चैनल पीड़ित किसान छबीलाराम ने बताया कि वह पहले हुए कटाव के कारण खेत में जमा मिट्टी को हटाने की योजना बना ही रहा था कि उसी स्थान पर दोबारा बड़ा कटाव हो गया। इस बार पानी पहले से अधिक क्षेत्र में फैल रहा है और करीब 15 एकड़ से ज्यादा खेतों में जलभराव हो चुका है। कटाव से पानी तेज गति से निकल रहा है, जिससे नुकसान बढ़ने की आशंका बनी हुई है। किसान ने सिंचाई विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि जब पहली बार कटाव की मरम्मत की जा रही थी, तब उसमें सूखी मिट्टी की ट्रालियां डाली गई थीं। किसानों ने मौके पर मौजूद विभागीय अधिकारियों को सुझाव दिया था कि सूखी मिट्टी डालने से दोबारा कटाव हो सकता है। उनका कहना है कि यदि मिट्टी डालने के साथ उचित तरीके से पानी डालकर उसे जमाया जाता और निर्माण कार्य सुनियोजित ढंग से किया जाता तो शायद दोबारा ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। किसानों का आरोप- विभाग ने औपचारिकता पूरी की कालुआना लिंक चैनल से निकलने वाले गुरु सर और कालुआना माइनर के किसान भी दोबारा कटाव होने की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंच गए। किसानों ने विभागीय कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि मरम्मत और सफाई के कार्य में लापरवाही का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। लिंक चैनल से जुड़े किसान प्रहलाद सिंह, बिल्लू, अनिल कुमार, कृष्ण कुमार, विक्रम सिंह, काला सिंह और जगदीश सिंह सहित अन्य किसानों ने बताया कि विभाग ने औपचारिकता पूरी करके ही माइनर में पानी छोड़ दिया। मोगों को छोटा करने और उनकी सफाई तक का काम नहीं करवाया गया। किसानों के अनुसार, नहर में लंबी बंदी रहने के कारण नरमे की सिंचाई के दौरान भी उन्हें नुकसान उठाना पड़ा था। गेहूं और सरसों की बुवाई का समय किसानों ने कहा कि वर्तमान में गेहूं और सरसों की बिजाई का समय है। ऐसे में खेतों की तैयारी और सिंचाई के लिए पानी की जरूरत है, लेकिन बार-बार चैनल टूटने और मरम्मत कार्य में कथित लापरवाही के कारण किसानों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। नरमे की फसल की सिंचाई के दौरान पहले ही नुकसान झेल चुके किसानों को उम्मीद थी कि अब गेहूं और सरसों की बिजाई के समय पर्याप्त पानी मिल सकेगा, लेकिन दोबारा कटाव होने से उनकी उम्मीदों को झटका लगा है। किसानों ने सिंचाई विभाग से कालुआना लिंक चैनल की उचित तरीके से सफाई करवाने, निर्माण कार्य को योजनाबद्ध ढंग से पूरा करने और भविष्य में इस प्रकार के कटाव रोकने के लिए स्थायी समाधान करने की मांग की। जलभराव रोकने के प्रयास जारी: एसडीओ सिंचाई विभाग के एसडीओ सोनू कुमार ने बताया कि कालुआना लिंक चैनल में दोबारा कटाव हो गया है। इसके बाद मौजगढ़ हेड से पानी की आपूर्ति बंद करवा दी गई है। कटाव के कारण किसानों की फसलों को जलभराव से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए लिंक चैनल में अलग-अलग स्थानों पर बंद लगाए जा रहे हैं, ताकि पानी के बहाव को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि जल्द ही चैनल की मरम्मत करवाकर पानी की आपूर्ति सुचारू रूप से शुरू करने का प्रयास किया जाएगा।

