Wonderland Syndrome: आंखों के सामने छोटी-बड़ी दिखने लगती हैं चीजें, क्लीवलैंड क्लिनिक से जानें क्या है यह वंडरलैंड सिंड्रोम

Wonderland Syndrome: आंखों के सामने छोटी-बड़ी दिखने लगती हैं चीजें, क्लीवलैंड क्लिनिक से जानें क्या है यह वंडरलैंड सिंड्रोम

Wonderland Syndrome: क्या कभी ऐसा हुआ है कि अचानक से आपके सामने रखा कॉफी का कप जरूरत से ज्यादा बड़ा या बहुत छोटा दिखने लगे? या फिर आपके हाथ-पैर आपको अपने सामान्य आकार से अजीब तरह से छोटे या बड़े महसूस होने लगें? यह कोई जादू या किसी फिक्शन फिल्म का सीन नहीं है, बल्कि एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है जिसे एलिस इन वंडरलैंड सिंड्रोम (AIWS) कहा जाता है। यह स्थिति सीधे तौर पर आपकी देखने की क्षमता को प्रभावित नहीं करती, बल्कि दिमाग के उस हिस्से को प्रभावित करती है जो यह तय करता है कि आप अपनी दुनिया और शरीर को कैसे महसूस करते हैं। आइए जानते है इसके कारण और लक्षण क्या हैं?

वंडरलैंड सिंड्रोम के लक्षण क्या होते हैं?

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, इस समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को रोजमर्रा के काम करते समय अचानक अजीब बदलाव महसूस होने लगते हैं। इसके संकेत मुख्य रूप से दो हिस्सों में बंटे होते हैं, खुद के शरीर को लेकर और आसपास की दुनिया को लेकर।

1.चीजों का आकार और दूरी बदलना- मरीज को अचानक ऐसा लग सकता है कि सामने रखी दीवार बहुत दूर खिसक गई है या फिर कमरे की चीजें या तो सुई जितनी छोटी हो गई हैं या किसी पहाड़ जितनी विशाल। इसे मेडिकल भाषा में मैक्रोप्सिया या माइक्रोप्सिया कहते हैं।

2. अपने ही शरीर का गलत अहसास- कई बार व्यक्ति को अपने हाथ, पैर या सिर का आकार सामान्य से बहुत बड़ा या छोटा महसूस होने लगता है। कुछ मामलों में शरीर का दायां और बायां हिस्सा अलग-अलग दुनिया में काम कर रहा हो, ऐसा अहसास होता है।

3. समय और हकीकत का धुंधला होना- इसमें समय की चाल बहुत धीमी या अचानक बहुत तेज लगने लगती है। ऐसा महसूस होता है जैसे आप अपनी ही जिंदगी को किसी तीसरी खिड़की से बाहर खड़े होकर देख रहे हों, जिसे डिपर्सनलाइजेशन कहते हैं।

कब बन जाती है यह स्थिति गंभीर?

NCBI के अनुसार, ज्यादातर मामलों में यह समस्या बहुत कम समय के लिए (कुछ मिनटों या घंटों) रहती है और अपने आप ठीक हो जाती है। लेकिन अगर ये एपिसोड बार-बार होने लगें या पहली बार अचानक से सामने आएं, तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

1.माइग्रेन और संक्रमण का संकेत- यह सिंड्रोम अक्सर गंभीर माइग्रेन के दौरे से जुड़ा होता है। इसके अलावा बच्चों और युवाओं में यह वायरल इन्फेक्शन, जैसे एपस्टीन-बैर वायरस (फ्लू या चिकनपॉक्स जैसे संक्रमण) के कारण भी ट्रिगर हो सकता है।

    2. ब्रेन स्ट्रोक या मिर्गी का खतरा- कई बार इस तरह के विजुअल और परसेप्शनल बदलाव दिमाग में खून का दौरा रुकने (स्ट्रोक) या मिर्गी (सीजर्स) के शुरुआती लक्षणों के रूप में सामने आते हैं। अगर इसके साथ अचानक चक्कर, बोलने में दिक्कत या शरीर सुन्न पड़ने लगे, तो यह खतरे की घंटी है।

    3. दवाइयों के साइड इफेक्ट्स- कई बार सर्दी-जुकाम की सामान्य दवाओं, खांसी के सिरप या कुछ विशेष एंटी-सीजर दवाओं के रिएक्शन से भी दिमाग का सेंसरी प्रोसेसिंग सिस्टम गड़बड़ा जाता है।

    डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

    यदि आपके या आपके परिवार में किसी बच्चे को पहली बार इस तरह की चीजें महसूस हों तो किसी न्यूरोलॉजिस्ट या डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर इसके असल कारणों का पता लगाने के लिए एमआरआई (MRI), सीटी स्कैन या ईईजी (EEG) जांच की सलाह दे सकते हैं, ताकि किसी भी गंभीर अंदरूनी समस्या का समय रहते इलाज किया जा सके।
    कमरे की दीवारें हिलती दिखना।
    चीजें सिकुड़ती या बढ़ती लगना।

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *