वेतन और HRA भुगतान के नाम पर बिहार के एक दर्जन जिलों में करोड़ों रुपए का घोटाला हुआ है। कहीं, HRA 200% बढ़ाकर लिया गया तो कहीं मृत शिक्षक के नाम पर वेतन निकाल लिया गया। भास्कर की रिपोर्ट में पढ़िए, अब तक कितने जिलों से घोटाले की जानकारी आई है? किस तरीके से पैसे निकाले गए? इसका असर कहां-कहां पड़ रहा है? वेतन भुगतान फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद राज्य सरकार ने क्या किया? अब तक कितने पैसे निकालने के मामले पकड़े गए पटना समेत कई जिलों में फर्जी भुगतान और वेतन-भत्तों में हेरफेर के मामले मिले हैं। रिपोर्ट की मानें तो सिर्फ तीन जिलों में ही 3.58 करोड़ की फर्जी निकासी की पुष्टि हुई है। पटना, भागलपुर, सुपौल, औरंगाबाद, बांका, समस्तीपुर, सहरसा, गयाजी और मुजफ्फरपुर समेत कई जिलों से इस तरह की गड़बड़ियों के मामले सामने आए हैं। अभी तक दूसरे जिलों से पूरी वित्तीय जानकारी सामने नहीं आई है। 5 मामलों से समझें, कैसे की जा रही फर्जी निकासी? वेतन और मकान किराया भत्ता के भुगतान में गड़बड़ी कर फर्जी निकासी की गई। कहीं तय दर से कई गुना अधिक HRA का भुगतान किया गया तो कहीं फर्जी शिक्षक बनाकर सरकारी खजाने से राशि निकाली गई। कुछ मामलों में पहले भुगतान हो चुके वेतन और बकाया के नाम पर दोबारा बिल तैयार किए गए। वहीं, कुछ जिलों में डिजिटल सैलरी सिस्टम में हेरफेर कर मूल वेतन और भत्तों को बढ़ाकर दिखाया गया। केस 1- पटना में 20% की जगह 200% की दर से HRA का भुगतान पटना के गुलजारबाग स्थित एफएनएस एकेडमी उच्च माध्यमिक विद्यालय में करीब 76.72 लाख रुपए की अवैध वेतन और HRA निकासी की गई। महालेखाकार की ऑडिट टीम ने पाया कि कर्मचारियों को निर्धारित 20% की जगह 200% और उससे अधिक की दर से नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच भुगतान किए गए। जानकारी मिलने पर स्कूल के क्लर्क विजय कृष्ण विद्यार्थी और परिचारी संजू कुमारी को निलंबित कर दिया गया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय के क्लर्क मनीष कुमार और तत्कालीन लिपिक अमित कुमार के खिलाफ 12 अक्टूबर को FIR दर्ज कराई गई। अतिरिक्त भुगतान की 76,71,983 रुपए की राशि 9 चेक के माध्यम से सरकारी कोष में वापस जमा कराई गई है। ब्याज की वसूली और विभागीय जांच शुरू की गई है। क्या है HRA भुगतान का पैरामीटर? बिहार में डिजिटल सैलरी सिस्टम के तहत HRMS और CFMS पोर्टल के जरिए सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों और पुलिसकर्मियों को आवास भत्ता (HRA) भुगतान किया जाता है। इसके नियम और पैरामीटर तय हैं। हालिया घोटालों में सॉफ्टवेयर के इन्हीं पैरामीटर से जुड़े डेटा में छेड़छाड़ की गई। बिहार सरकार केंद्रीय सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप HRA का भुगतान करती है। इसे चार कैटेगरी में बांटा गया है। अब सॉफ्टवेयर और पोर्टल के सुरक्षा पैरामीटर समझिए 1.मैक्सिमम कैपिंग- HRMS सॉफ्टवेयर में प्रत्येक पद के पे-मैट्रिक्स और लागू नियमों के अनुसार HRA की राशि तय होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, अगर किसी कर्मचारी का मूल वेतन 30,000 रुपए है और वह ग्रामीण क्षेत्र में तैनात है तो 8 फीसदी की दर लागू होने पर उसका HRA 2,400 रुपए होगा। हालांकि, वास्तविक दर संबंधित नियमों के अनुसार HRA 5 फीसदी होना चाहिए। इस तरह से उनका एचआरए 1500 रुपए का भुगतान होना चाहिए। 2. मेकर-चेकर-अप्रूवर से वेतन भुगतान मेकर: क्लर्क या डेटा ऑपरेटर वेतन बिल तैयार करता है। चेकर: स्थापना उप-समाहर्ता या बड़ा बाबू बिल की जांच करता है। अप्रूवर: निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी (DDO), जैसे जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) या पुलिस अधीक्षक (SP), डिजिटल सिग्नेचर से बिल को मंजूरी देते हैं। सुरक्षा पैरामीटर को कैसे बाईपास किया गया? जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, जालसाजों ने सॉफ्टवेयर की बैक-एंड कोडिंग या ऑपरेटर लॉगिन का गलत इस्तेमाल किया। निर्धारित दरों के बजाय कई गुना अधिक HRA दर्ज किया। आरोप है कि 8% या 16% जैसी दरों की जगह 200% से लेकर 2,000% तक की दर फीड की गई। इससे 2,400 रुपए के HRA के बदले 24,000 रुपए या उससे भी अधिक का बिल जनरेट किया। केस-2: भागलपुर में फर्जी शिक्षिका बनाकर वेतन भुगतान भागलपुर में करीब 98.12 लाख रुपए की निकासी फर्जी टीचर के नाम पर की गई। विभाग के संविदा कर्मी अविनाश राज ने तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी की अटैच लॉगिन आईडी का दुरुपयोग कर तनुश्री नाम की एक काल्पनिक शिक्षिका की प्रोफाइल तैयार किया । उसे अप्रैल 2025 की पिछली तारीख से सिस्टम में दर्ज किया। इस फर्जी प्रोफाइल के आधार पर हरियाणा के फरीदाबाद स्थित एक बैंक खाते में 6.74 लाख रुपए भेजे। इसके अलावा, मई 2025 से जुलाई 2026 के बीच करीब 52 लाख रुपए के भुगतान और जुलाई-अगस्त में संदिग्ध भुगतान करने की कोशिश की। केस-3: सुपौल में फर्जी बिल बनाकर परिजनों के खातों में भेजी राशि सुपौल में 1.83 करोड़ रुपए अवैध वेतन भुगतान किया गया। क्लर्क ने पहले भुगतान किए जा चुके वेतन और बकाया के नाम पर दोबारा फर्जी बिल तैयार कर फर्जी भुगतान कर दिया। क्लर्क ने नई पे-आईडी बनाकर शिक्षकों के नाम पर फर्जी खाते जोड़े और सरकारी राशि मां, सास और बहन के खातों में ट्रांसफर किया। उसने एक मृत रिटायर शिक्षक के नाम पर भी दोबारा वेतन भुगतान कर फर्जी निकासी कर ली। इस मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी संग्राम सिंह से स्थापना शाखा का प्रभार वापस लिया गया है। उनसे 15 दिनों में स्पष्टीकरण मांगा गया है। केस-4: सहरसा में 10 साल स्कूल नहीं गई टीचर को मिलता रहा वेतन सहरसा जिले के सौर बाजार प्रखंड के प्राइमरी स्कूल कांप गोठ उत्तर बाड़ी टोला में एक महिला टीचर को 10 साल से स्कूल नहीं जाने के बाद भी वेतन मिला। वह दिल्ली में रह रही थीं। महिला के नाम पर स्कूल से अपसेंटी भेजी जाती रही। उनकी हाजिरी स्कूल रजिस्टर में दर्ज होती रही और खाते में नियमित वेतन भुगतान होता रहा। शिक्षा विभाग को गुप्त शिकायत मिलने के बाद जब एक विशेष टीम ने स्कूल का औचक निरीक्षण किया तब इस जालसाजी का भंडाफोड़ हुआ। शिकायत के बाद दस्तावेजों और अटेंडेंस रजिस्टर की जांच कराई गई। अब शिक्षिका के खिलाफ सेवा समाप्ति और अवैध भुगतान की वसूली की प्रक्रिया शुरू की गई है। केस-5: दो जगह से वेतन भुगतान औरंगाबाद के सिविल सर्जन कार्यालय में तैनात क्लर्क कृष्ण प्रसाद वर्मा ने दो अलग-अलग सरकारी संस्थानों से वेतन उठाया। जिला पदाधिकारी ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। अब इस मामले में गोह के प्रभारी प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर शिव शंकर प्रसाद के आवेदन पर FIR दर्ज की गई है। शिकायत के बाद सिविल सर्जन की ओर से तीन सदस्यों वाली जांच समिति का गठन किया गया था। कर्मी के संबंधित सेवा पुस्तिका, सेवा अभिलेख, भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (पूर्वी झरिया क्षेत्र) से प्राप्त दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच की। जांच में दोनों संस्थानों से एक ही अवधि में वेतन प्राप्त करने से संबंधित तथ्य सामने आने की बात कही गई। वेतन घोटाला, किस जिले में क्या गड़बड़ी मिली? औरंगाबाद में शिक्षा और पुलिस विभाग के कुछ कर्मियों के वेतन तथा भत्तों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी की बात सामने आई है। भागलपुर में लॉगिन आईडी का दुरुपयोग किया गया। भागलपुर और बांका के सरकारी कार्यालयों में प्रतिनियुक्त छह क्लर्क को उनके मूल कार्यालय वापस भेजकर उनपर कार्रवाई करने करने का आदेश दिया गया है। बांका में पिछले 5 साल के वेतन रिकॉर्ड, सेवा पुस्तिकाओं और विभिन्न प्रकार के अवकाश के नाम पर हुए भुगतानों की गई। समस्तीपुर में डिजिटल सैलरी सिस्टम में HRA और सिटी अलाउंस की एंट्री में गड़बड़ी की गई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, वहां शिक्षकों के रिकॉर्ड का आधार और पैन से मिलान कराया जा रहा है। पुलिस विभाग में भी वेतन और HRA बढ़ाकर दिखाया गया और मुजफ्फरपुर में पुलिस विभाग में भी वेतन और भत्तों की हेरफेर की गई है। आरोप है कि कुछ कर्मियों का मूल वेतन और HRA वास्तविक पात्रता से दो से तीन गुना तक बढ़ाकर सिस्टम में दर्ज किया। इसके बाद अधिक राशि का भुगतान किया गया। वित्त विभाग ने वेतन रोका, वेरिफिकेशन के बाद होगा भुगतान घोटाला सामने आने के बाद शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मियों के वेतन भुगतान से पहले HRMS डेटा का वेरिफिकेशन अनिवार्य किया गया है। सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को 22 अक्टूबर 2026 तक शत-प्रतिशत डेटा वेरिफिकेशन पूरा करने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद ही अगले वेतन का भुगतान किया जाएगा। वेतन पर रोक का असर: शिक्षक और दूसरे कर्मी भी होंगे परेशान राज्य के करीब 6 लाख शिक्षकों और 8 लाख कर्मियों के वेतन भुगतान पर अस्थायी रोक लगी है। इससे ऐसे शिक्षकों-कर्मचारियों की परेशानी बढ़ गई है जिनका वेतन पूरी तरह सही है। घर का किराया, बच्चों की फीस, इलाज, घरेलू जरूरतें और बैंक की किस्त वेतन समय पर नहीं मिलने पर इन खर्चों को मैनेज करना मुश्किल हो सकता है। शिक्षा विभाग का दावा- शिक्षकों-कर्मियों को तय समय पर मिलेगा वेतन शिक्षा विभाग की ओर से कहा गया है कि शिक्षकों और कर्मियों का वेतन भुगतान में देरी नहीं होगी। विभागीय सचिव राजीव रौशन ने दावा किया है कि राज्य के सभी शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों को निर्धारित समय पर वेतन मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वेतन भुगतान रोकने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने और गड़बड़ियों की आशंका दूर करने के लिए वेतन व भत्तों का एहतियाती सत्यापन कराया जा रहा है। सचिव ने बताया कि कुछ स्थानों से वित्तीय अनियमितताओं की सूचना मिली थी, जिनकी विभागीय जांच चल रही है। कुछ मामलों में कार्रवाई भी की गई है। एक-दो मामलों के आधार पर पूरे राज्य के शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों के संबंध में निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए। वेरिफिकेशन का उद्देश्य वेतन भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है ताकि सभी पात्र कर्मचारियों को समय पर वेतन मिल सके। वेतन और HRA भुगतान के नाम पर बिहार के एक दर्जन जिलों में करोड़ों रुपए का घोटाला हुआ है। कहीं, HRA 200% बढ़ाकर लिया गया तो कहीं मृत शिक्षक के नाम पर वेतन निकाल लिया गया। भास्कर की रिपोर्ट में पढ़िए, अब तक कितने जिलों से घोटाले की जानकारी आई है? किस तरीके से पैसे निकाले गए? इसका असर कहां-कहां पड़ रहा है? वेतन भुगतान फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद राज्य सरकार ने क्या किया? अब तक कितने पैसे निकालने के मामले पकड़े गए पटना समेत कई जिलों में फर्जी भुगतान और वेतन-भत्तों में हेरफेर के मामले मिले हैं। रिपोर्ट की मानें तो सिर्फ तीन जिलों में ही 3.58 करोड़ की फर्जी निकासी की पुष्टि हुई है। पटना, भागलपुर, सुपौल, औरंगाबाद, बांका, समस्तीपुर, सहरसा, गयाजी और मुजफ्फरपुर समेत कई जिलों से इस तरह की गड़बड़ियों के मामले सामने आए हैं। अभी तक दूसरे जिलों से पूरी वित्तीय जानकारी सामने नहीं आई है। 5 मामलों से समझें, कैसे की जा रही फर्जी निकासी? वेतन और मकान किराया भत्ता के भुगतान में गड़बड़ी कर फर्जी निकासी की गई। कहीं तय दर से कई गुना अधिक HRA का भुगतान किया गया तो कहीं फर्जी शिक्षक बनाकर सरकारी खजाने से राशि निकाली गई। कुछ मामलों में पहले भुगतान हो चुके वेतन और बकाया के नाम पर दोबारा बिल तैयार किए गए। वहीं, कुछ जिलों में डिजिटल सैलरी सिस्टम में हेरफेर कर मूल वेतन और भत्तों को बढ़ाकर दिखाया गया। केस 1- पटना में 20% की जगह 200% की दर से HRA का भुगतान पटना के गुलजारबाग स्थित एफएनएस एकेडमी उच्च माध्यमिक विद्यालय में करीब 76.72 लाख रुपए की अवैध वेतन और HRA निकासी की गई। महालेखाकार की ऑडिट टीम ने पाया कि कर्मचारियों को निर्धारित 20% की जगह 200% और उससे अधिक की दर से नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच भुगतान किए गए। जानकारी मिलने पर स्कूल के क्लर्क विजय कृष्ण विद्यार्थी और परिचारी संजू कुमारी को निलंबित कर दिया गया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय के क्लर्क मनीष कुमार और तत्कालीन लिपिक अमित कुमार के खिलाफ 12 अक्टूबर को FIR दर्ज कराई गई। अतिरिक्त भुगतान की 76,71,983 रुपए की राशि 9 चेक के माध्यम से सरकारी कोष में वापस जमा कराई गई है। ब्याज की वसूली और विभागीय जांच शुरू की गई है। क्या है HRA भुगतान का पैरामीटर? बिहार में डिजिटल सैलरी सिस्टम के तहत HRMS और CFMS पोर्टल के जरिए सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों और पुलिसकर्मियों को आवास भत्ता (HRA) भुगतान किया जाता है। इसके नियम और पैरामीटर तय हैं। हालिया घोटालों में सॉफ्टवेयर के इन्हीं पैरामीटर से जुड़े डेटा में छेड़छाड़ की गई। बिहार सरकार केंद्रीय सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप HRA का भुगतान करती है। इसे चार कैटेगरी में बांटा गया है। अब सॉफ्टवेयर और पोर्टल के सुरक्षा पैरामीटर समझिए 1.मैक्सिमम कैपिंग- HRMS सॉफ्टवेयर में प्रत्येक पद के पे-मैट्रिक्स और लागू नियमों के अनुसार HRA की राशि तय होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, अगर किसी कर्मचारी का मूल वेतन 30,000 रुपए है और वह ग्रामीण क्षेत्र में तैनात है तो 8 फीसदी की दर लागू होने पर उसका HRA 2,400 रुपए होगा। हालांकि, वास्तविक दर संबंधित नियमों के अनुसार HRA 5 फीसदी होना चाहिए। इस तरह से उनका एचआरए 1500 रुपए का भुगतान होना चाहिए। 2. मेकर-चेकर-अप्रूवर से वेतन भुगतान मेकर: क्लर्क या डेटा ऑपरेटर वेतन बिल तैयार करता है। चेकर: स्थापना उप-समाहर्ता या बड़ा बाबू बिल की जांच करता है। अप्रूवर: निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी (DDO), जैसे जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) या पुलिस अधीक्षक (SP), डिजिटल सिग्नेचर से बिल को मंजूरी देते हैं। सुरक्षा पैरामीटर को कैसे बाईपास किया गया? जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, जालसाजों ने सॉफ्टवेयर की बैक-एंड कोडिंग या ऑपरेटर लॉगिन का गलत इस्तेमाल किया। निर्धारित दरों के बजाय कई गुना अधिक HRA दर्ज किया। आरोप है कि 8% या 16% जैसी दरों की जगह 200% से लेकर 2,000% तक की दर फीड की गई। इससे 2,400 रुपए के HRA के बदले 24,000 रुपए या उससे भी अधिक का बिल जनरेट किया। केस-2: भागलपुर में फर्जी शिक्षिका बनाकर वेतन भुगतान भागलपुर में करीब 98.12 लाख रुपए की निकासी फर्जी टीचर के नाम पर की गई। विभाग के संविदा कर्मी अविनाश राज ने तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी की अटैच लॉगिन आईडी का दुरुपयोग कर तनुश्री नाम की एक काल्पनिक शिक्षिका की प्रोफाइल तैयार किया । उसे अप्रैल 2025 की पिछली तारीख से सिस्टम में दर्ज किया। इस फर्जी प्रोफाइल के आधार पर हरियाणा के फरीदाबाद स्थित एक बैंक खाते में 6.74 लाख रुपए भेजे। इसके अलावा, मई 2025 से जुलाई 2026 के बीच करीब 52 लाख रुपए के भुगतान और जुलाई-अगस्त में संदिग्ध भुगतान करने की कोशिश की। केस-3: सुपौल में फर्जी बिल बनाकर परिजनों के खातों में भेजी राशि सुपौल में 1.83 करोड़ रुपए अवैध वेतन भुगतान किया गया। क्लर्क ने पहले भुगतान किए जा चुके वेतन और बकाया के नाम पर दोबारा फर्जी बिल तैयार कर फर्जी भुगतान कर दिया। क्लर्क ने नई पे-आईडी बनाकर शिक्षकों के नाम पर फर्जी खाते जोड़े और सरकारी राशि मां, सास और बहन के खातों में ट्रांसफर किया। उसने एक मृत रिटायर शिक्षक के नाम पर भी दोबारा वेतन भुगतान कर फर्जी निकासी कर ली। इस मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी संग्राम सिंह से स्थापना शाखा का प्रभार वापस लिया गया है। उनसे 15 दिनों में स्पष्टीकरण मांगा गया है। केस-4: सहरसा में 10 साल स्कूल नहीं गई टीचर को मिलता रहा वेतन सहरसा जिले के सौर बाजार प्रखंड के प्राइमरी स्कूल कांप गोठ उत्तर बाड़ी टोला में एक महिला टीचर को 10 साल से स्कूल नहीं जाने के बाद भी वेतन मिला। वह दिल्ली में रह रही थीं। महिला के नाम पर स्कूल से अपसेंटी भेजी जाती रही। उनकी हाजिरी स्कूल रजिस्टर में दर्ज होती रही और खाते में नियमित वेतन भुगतान होता रहा। शिक्षा विभाग को गुप्त शिकायत मिलने के बाद जब एक विशेष टीम ने स्कूल का औचक निरीक्षण किया तब इस जालसाजी का भंडाफोड़ हुआ। शिकायत के बाद दस्तावेजों और अटेंडेंस रजिस्टर की जांच कराई गई। अब शिक्षिका के खिलाफ सेवा समाप्ति और अवैध भुगतान की वसूली की प्रक्रिया शुरू की गई है। केस-5: दो जगह से वेतन भुगतान औरंगाबाद के सिविल सर्जन कार्यालय में तैनात क्लर्क कृष्ण प्रसाद वर्मा ने दो अलग-अलग सरकारी संस्थानों से वेतन उठाया। जिला पदाधिकारी ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। अब इस मामले में गोह के प्रभारी प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर शिव शंकर प्रसाद के आवेदन पर FIR दर्ज की गई है। शिकायत के बाद सिविल सर्जन की ओर से तीन सदस्यों वाली जांच समिति का गठन किया गया था। कर्मी के संबंधित सेवा पुस्तिका, सेवा अभिलेख, भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (पूर्वी झरिया क्षेत्र) से प्राप्त दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच की। जांच में दोनों संस्थानों से एक ही अवधि में वेतन प्राप्त करने से संबंधित तथ्य सामने आने की बात कही गई। वेतन घोटाला, किस जिले में क्या गड़बड़ी मिली? औरंगाबाद में शिक्षा और पुलिस विभाग के कुछ कर्मियों के वेतन तथा भत्तों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी की बात सामने आई है। भागलपुर में लॉगिन आईडी का दुरुपयोग किया गया। भागलपुर और बांका के सरकारी कार्यालयों में प्रतिनियुक्त छह क्लर्क को उनके मूल कार्यालय वापस भेजकर उनपर कार्रवाई करने करने का आदेश दिया गया है। बांका में पिछले 5 साल के वेतन रिकॉर्ड, सेवा पुस्तिकाओं और विभिन्न प्रकार के अवकाश के नाम पर हुए भुगतानों की गई। समस्तीपुर में डिजिटल सैलरी सिस्टम में HRA और सिटी अलाउंस की एंट्री में गड़बड़ी की गई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, वहां शिक्षकों के रिकॉर्ड का आधार और पैन से मिलान कराया जा रहा है। पुलिस विभाग में भी वेतन और HRA बढ़ाकर दिखाया गया और मुजफ्फरपुर में पुलिस विभाग में भी वेतन और भत्तों की हेरफेर की गई है। आरोप है कि कुछ कर्मियों का मूल वेतन और HRA वास्तविक पात्रता से दो से तीन गुना तक बढ़ाकर सिस्टम में दर्ज किया। इसके बाद अधिक राशि का भुगतान किया गया। वित्त विभाग ने वेतन रोका, वेरिफिकेशन के बाद होगा भुगतान घोटाला सामने आने के बाद शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मियों के वेतन भुगतान से पहले HRMS डेटा का वेरिफिकेशन अनिवार्य किया गया है। सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को 22 अक्टूबर 2026 तक शत-प्रतिशत डेटा वेरिफिकेशन पूरा करने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद ही अगले वेतन का भुगतान किया जाएगा। वेतन पर रोक का असर: शिक्षक और दूसरे कर्मी भी होंगे परेशान राज्य के करीब 6 लाख शिक्षकों और 8 लाख कर्मियों के वेतन भुगतान पर अस्थायी रोक लगी है। इससे ऐसे शिक्षकों-कर्मचारियों की परेशानी बढ़ गई है जिनका वेतन पूरी तरह सही है। घर का किराया, बच्चों की फीस, इलाज, घरेलू जरूरतें और बैंक की किस्त वेतन समय पर नहीं मिलने पर इन खर्चों को मैनेज करना मुश्किल हो सकता है। शिक्षा विभाग का दावा- शिक्षकों-कर्मियों को तय समय पर मिलेगा वेतन शिक्षा विभाग की ओर से कहा गया है कि शिक्षकों और कर्मियों का वेतन भुगतान में देरी नहीं होगी। विभागीय सचिव राजीव रौशन ने दावा किया है कि राज्य के सभी शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों को निर्धारित समय पर वेतन मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वेतन भुगतान रोकने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने और गड़बड़ियों की आशंका दूर करने के लिए वेतन व भत्तों का एहतियाती सत्यापन कराया जा रहा है। सचिव ने बताया कि कुछ स्थानों से वित्तीय अनियमितताओं की सूचना मिली थी, जिनकी विभागीय जांच चल रही है। कुछ मामलों में कार्रवाई भी की गई है। एक-दो मामलों के आधार पर पूरे राज्य के शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों के संबंध में निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए। वेरिफिकेशन का उद्देश्य वेतन भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है ताकि सभी पात्र कर्मचारियों को समय पर वेतन मिल सके।

