खगड़िया के बिशौनी मंदिर में हुआ कन्या पूजन:24 से ज्यादा कन्याओं की हंसी से गूंजा परिसर, श्रद्धालुओं ने लिया आशीर्वाद

खगड़िया के बिशौनी मंदिर में हुआ कन्या पूजन:24 से ज्यादा कन्याओं की हंसी से गूंजा परिसर, श्रद्धालुओं ने लिया आशीर्वाद

खगड़िया में शारदीय नवरात्र के अवसर पर जिले के विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। सुबह से शाम तक वैदिक मंत्रोच्चार और मां भगवती के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज रहे हैं। इसी क्रम में अतिप्राचीन सिद्धपीठ श्री चतुर्भुजी दुर्गा मंदिर, बिशौनी में परंपरागत श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ कुंवारी कन्या पूजन किया गया। इस दौरान दो दर्जन से अधिक कन्याओं की पूजा कर श्रद्धालुओं ने उनसे आशीर्वाद लिया। कन्याओं के पूजन के बाद भरा खोइंछा मंदिर में श्रद्धालु अपनी-अपनी कन्याओं को नए वस्त्रों और श्रृंगार से सजाकर लेकर पहुंचे। मंदिर परिसर में कन्याओं को कतार में बैठाया गया। इसके बाद उनके पैर धोकर, फूल अर्पित कर विधि-विधान से पूजा की गई। कन्याओं के माथे पर तिलक लगाकर उन्हें मिठाई और अन्य भेंट दी गई। खोइंछा भरने की परंपरा भी निभाई गई। श्रद्धालुओं ने कन्याओं को मां भगवती का स्वरूप मानकर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। मौके से आई तस्वीरें…. कन्याओं की हंसी से भक्तिमय हुआ माहौल कन्या पूजन के अंतिम चरण में मंदिर में मौजूद महिला और पुरुष श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर कन्याओं से हंसने और आशीर्वाद देने की विनती की। कन्याओं की खिलखिलाहट से मंदिर परिसर का माहौल और भी भक्तिमय हो गया। इसके बाद श्रद्धालुओं में कन्याओं से आशीर्वाद लेने की होड़ लग गई। मान्यता है कि कन्याओं की प्रसन्नता और उनका आशीर्वाद परिवार में खुशहाली लाता है। कन्या पूजन का विशेष महत्व पंडित मनोज कुंवर और आचार्य उत्कर्ष गौतम उर्फ रिंकू झा ने बताया कि नवरात्र में कुंवारी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनकी पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्या पूजन और उन्हें भोजन कराने से भक्तों को विशेष पुण्य प्राप्त होता है। बिशौनी मंदिर में यह परंपरा वर्षों से निभाई जा रही है। खगड़िया में शारदीय नवरात्र के अवसर पर जिले के विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। सुबह से शाम तक वैदिक मंत्रोच्चार और मां भगवती के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज रहे हैं। इसी क्रम में अतिप्राचीन सिद्धपीठ श्री चतुर्भुजी दुर्गा मंदिर, बिशौनी में परंपरागत श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ कुंवारी कन्या पूजन किया गया। इस दौरान दो दर्जन से अधिक कन्याओं की पूजा कर श्रद्धालुओं ने उनसे आशीर्वाद लिया। कन्याओं के पूजन के बाद भरा खोइंछा मंदिर में श्रद्धालु अपनी-अपनी कन्याओं को नए वस्त्रों और श्रृंगार से सजाकर लेकर पहुंचे। मंदिर परिसर में कन्याओं को कतार में बैठाया गया। इसके बाद उनके पैर धोकर, फूल अर्पित कर विधि-विधान से पूजा की गई। कन्याओं के माथे पर तिलक लगाकर उन्हें मिठाई और अन्य भेंट दी गई। खोइंछा भरने की परंपरा भी निभाई गई। श्रद्धालुओं ने कन्याओं को मां भगवती का स्वरूप मानकर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। मौके से आई तस्वीरें…. कन्याओं की हंसी से भक्तिमय हुआ माहौल कन्या पूजन के अंतिम चरण में मंदिर में मौजूद महिला और पुरुष श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर कन्याओं से हंसने और आशीर्वाद देने की विनती की। कन्याओं की खिलखिलाहट से मंदिर परिसर का माहौल और भी भक्तिमय हो गया। इसके बाद श्रद्धालुओं में कन्याओं से आशीर्वाद लेने की होड़ लग गई। मान्यता है कि कन्याओं की प्रसन्नता और उनका आशीर्वाद परिवार में खुशहाली लाता है। कन्या पूजन का विशेष महत्व पंडित मनोज कुंवर और आचार्य उत्कर्ष गौतम उर्फ रिंकू झा ने बताया कि नवरात्र में कुंवारी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनकी पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्या पूजन और उन्हें भोजन कराने से भक्तों को विशेष पुण्य प्राप्त होता है। बिशौनी मंदिर में यह परंपरा वर्षों से निभाई जा रही है।  

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