दुर्गा पूजा के दशमी के अवसर पर पाकुड़ शहर के अन्नपूर्णा कॉलोनी के काली माता मंदिर में सत्य सनातन संस्था ने शस्त्र पूजन किया। इसमें कई लोग अपने पारंपरिक अस्त्रों के साथ शामिल हुए। पुरोहित ने वैदिक मंत्रों से पूजा करवाई, जिसमें हवन, आरती और यजमानों को संकल्प दिलाया गया। तलवार, फरसा, तीर धनुष, गदा जैसे पारंपरिक अस्त्रों का पूजन हुआ। फिर मौजूद लोगों को प्रसाद बांटा गया। अस्त्रों का प्रदर्शन भी हुआ, जिसमें तलवार और भाला लेकर अलग-अलग कलाओं का प्रदर्शन किया गया जिसे लोगों ने ताली बजाकर सराहा। डॉ. मनोहर ने शस्त्र पूजा का महत्व बताया। उन्होंने कहा, दशमी को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाते हैं। क्योंकि इसी दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। शस्त्र पूजा समाज और परिवार की रक्षा के लिए जरूरी है। भागीरथ तिवारी ने भी शस्त्र पूजन परंपरा पर बात की। इस मौके पर सत्य सनातन संस्था से राजेश यादव, कालीचरण घोष, नवीन सिंह, विजय सिंह और विहिप जिला मंत्री विशाल भगत आदि मौजूद थे। दुर्गापूजा के दशमी के अवसर पर दशाई नृत्य किया गया। सफाहोड़ समुदाय के पुरुष ने नगर के सभी पूजा पंडालो में घूम घूमकर दशाई नित्य पेश किया। इस दौरान पारम्परिक वेश भूषा और ढोल नगाड़े में सभी लोग थे। सभी एक जैसे सफेद रंग के कपडे़ पहने हुए थे। दुर्गा पूजा के दशमी के अवसर पर पाकुड़ शहर के अन्नपूर्णा कॉलोनी के काली माता मंदिर में सत्य सनातन संस्था ने शस्त्र पूजन किया। इसमें कई लोग अपने पारंपरिक अस्त्रों के साथ शामिल हुए। पुरोहित ने वैदिक मंत्रों से पूजा करवाई, जिसमें हवन, आरती और यजमानों को संकल्प दिलाया गया। तलवार, फरसा, तीर धनुष, गदा जैसे पारंपरिक अस्त्रों का पूजन हुआ। फिर मौजूद लोगों को प्रसाद बांटा गया। अस्त्रों का प्रदर्शन भी हुआ, जिसमें तलवार और भाला लेकर अलग-अलग कलाओं का प्रदर्शन किया गया जिसे लोगों ने ताली बजाकर सराहा। डॉ. मनोहर ने शस्त्र पूजा का महत्व बताया। उन्होंने कहा, दशमी को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाते हैं। क्योंकि इसी दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। शस्त्र पूजा समाज और परिवार की रक्षा के लिए जरूरी है। भागीरथ तिवारी ने भी शस्त्र पूजन परंपरा पर बात की। इस मौके पर सत्य सनातन संस्था से राजेश यादव, कालीचरण घोष, नवीन सिंह, विजय सिंह और विहिप जिला मंत्री विशाल भगत आदि मौजूद थे। दुर्गापूजा के दशमी के अवसर पर दशाई नृत्य किया गया। सफाहोड़ समुदाय के पुरुष ने नगर के सभी पूजा पंडालो में घूम घूमकर दशाई नित्य पेश किया। इस दौरान पारम्परिक वेश भूषा और ढोल नगाड़े में सभी लोग थे। सभी एक जैसे सफेद रंग के कपडे़ पहने हुए थे।

