Gokul Milk Union Election: महाराष्ट्र में कोल्हापुर जिला दुग्ध उत्पादक संघ, जिसे ‘गोकुल मिल्क यूनियन’ के नाम से भी जाना जाता है, के चुनाव में कांग्रेस समर्थित समविचारी आघाड़ी ने सत्तारूढ़ महायुति को झटका देते हुए सत्ता हासिल कर ली है। कांग्रेस विधायक सतेज पाटिल के नेतृत्व वाले पैनल ने 25 में से 13 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि महायुति के 12 उम्मीदवार विजयी हुए। इस नतीजे के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। महायुति के कई बड़े नेताओं के मैदान में होने के बावजूद गठबंधन को हार का सामना क्यों करना पड़ा? इस सवाल पर उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार नीत एनसीपी के वरिष्ठ नेता और मंत्री हसन मुश्रीफ ने खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने महायुति के भीतर आखिरी समय तक चली खींचतान को हार की संभावित कारण बताया।
महायुति की हार पर क्या बोले हसन मुश्रीफ?
गोकुल दूध संघ के चुनाव परिणाम पर प्रतिक्रिया देते हुए हसन मुश्रीफ ने कहा कि दूध उत्पादक सदस्य किसानों ने जो फैसला दिया है, उसे वे स्वीकार करते हैं। कोल्हापुर जिले की कागल विधानसभा सीट से विधायक मुश्रीफ के मुताबिक, चुनाव के दौरान भाजपा, शिवसेना, एनसीपी के महायुति गठबंधन में आखिरी समय तक विवाद और खींचतान जारी रही। इसके बाद गठबंधन हुआ, लेकिन संभव है कि मतदाताओं को यह बात पसंद नहीं आई हो।
सतेज पाटिल के नेतृत्व में समविचारी आघाड़ी की जीत
गोकुल दूध संघ के चुनाव में पिछले कई दिनों से मुकाबला बेहद कड़ा बना हुआ था। इस चुनाव में कांग्रेस विधायक सतेज पाटिल के नेतृत्व वाली कांग्रेस समर्थित समविचारी आघाड़ी ने 13 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। दूसरी ओर, महायुति के खाते में 12 सीटें आईं।
इस नतीजे के साथ समविचारी आघाड़ी ने गोकुल दूध संघ में सत्ता हासिल कर ली। चुनाव में कई नए चेहरों को भी जीत मिली है। वहीं, पूर्व अध्यक्ष अरुण डोंगले, विश्वास पाटिल और नाविद मुश्रीफ जैसे प्रमुख उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा। नाविद मुश्रीफ इस संघ के अध्यक्ष रह चुके है और मंत्री हसन मुश्रीफ के बेटे हैं।
99 प्रतिशत मतदान, 25 सीटों पर हुआ मुकाबला
गोकुल दूध संघ के चुनाव में मतदाताओं ने बड़े पैमाने पर भागीदारी की। चुनाव में करीब 99 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। कुल 25 सीटों के लिए सोमवार सुबह से मतगणना शुरू हुई और रात करीब 8:30 बजे परिणाम घोषित किए गए।
चुनाव में महायुति के कई दिग्गज नेताओं और उम्मीदवारों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी। इसके बावजूद सतेज पाटिल के नेतृत्व वाली आघाड़ी ने एक सीट के अंतर से बढ़त हासिल कर ली। इस परिणाम के बाद कोल्हापुर के सहकारी क्षेत्र में नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
हार के बावजूद पूरा सहयोग का किया वादा
हसन मुश्रीफ ने चुनाव परिणाम स्वीकार करते हुए विजयी उम्मीदवारों को बधाई दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि गोकुल दूध संघ का नया संचालक मंडल कोल्हापुर जिले के करीब साढ़े पांच लाख किसान परिवारों के कल्याण के लिए काम करेगा।
मुश्रीफ ने यह भी आश्वासन दिया कि जिले के दूध उत्पादक किसानों के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए गोकुल दूध संघ के विकास के लिए जरूरी सहयोग किया जाएगा।
कोल्हापुर की राजनीति में क्या होगा असर?
गोकुल दूध संघ का चुनाव केवल सहकारी संस्था के प्रबंधन तक सीमित नहीं माना जा रहा है। कोल्हापुर में सहकारी क्षेत्र का स्थानीय राजनीति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से गहरा संबंध है। ऐसे में इस चुनाव में मिली जीत और हार को राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है।

