भास्कर न्यूज | फिरोजपुर/अबोहर/जीरा/ जलालाबाद मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में इंसाफ की मांग को लेकर सोमवार को फिरोजपुर, अबोहर, जीरा और जलालाबाद में किसान संगठनों, राजनीतिक दलों और जन संगठनों ने आम आदमी पार्टी के विधायकों के कार्यालयों और आवासों के बाहर धरने दिए। प्रदर्शनकारियों ने पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए ‘लानत पत्र’ सौंपे या चिपकाए। उन्होंने हत्याकांड की निष्पक्ष जांच, पीड़ित परिवार को इंसाफ और नशा कारोबार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। फिरोजपुर में किसान संगठनों ने विधायक रजनीश दहिया के कार्यालय के बाहर धरना देकर सरकार के नाम लानत पत्र सौंपा। वहीं, किसान मजदूर संघर्ष कमेटी पंजाब ने जिला प्रधान इंद्रजीत सिंह बाठ की अगुवाई में विधायक रणबीर सिंह भुल्लर के कार्यालय के बाहर तीन घंटे प्रदर्शन किया। नेताओं ने जनप्रतिनिधियों से मामले में जवाबदेही तय करवाने और नशे के खिलाफ संघर्ष करने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। अबोहर में बल्लुआना के विधायक गोल्डी मुसाफिर के अनाज मंडी स्थित कार्यालय के बाहर शिरोमणि अकाली दल, शिअद (अ) और विभिन्न किसान संगठनों के नेताओं ने धरना दिया। अकाली नेता बब्बल बुट्टर और किसान नेता गुणवंत सिंह ने आरोप लगाया कि राज्य में नशा तस्करी और गुंडागर्दी बढ़ रही है। इंद्रजीत बुलंदी, सुखमंदर सिंह और गुरमीत प्रजापति ने भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। जीरा में किसान संगठनों और राजनीतिक दलों के नेताओं ने विधायक नरेश कटारिया के घर के सामने प्रदर्शन किया। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने नारेबाजी करते हुए घर के सामने ‘लानत पत्र’ चिपका दिया। प्रदर्शन में भारतीय किसान यूनियन क्रांतिकारी, भारतीय किसान यूनियन कादियां, अकाली दल वारिस पंजाब, मिसल सतलुज और सांझा मोर्चा जीरा के प्रतिनिधि शामिल हुए। मौके पर डीएसपी जीरा जसपाल सिंह पुलिस बल के साथ मौजूद रहे। जलालाबाद में विधायक जगदीप कंबोज गोल्डी के निवास के बाहर एक्शन कमेटी के आह्वान पर धरना दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य दरवाजे पर ‘लाहनत पत्र’ चिपकाकर झोटा हत्याकांड में इंसाफ और नशा कारोबार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन में भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां, किरती किसान यूनियन, भारतीय किसान यूनियन एकता डकौंदा और क्रांतिकारी किसान यूनियन सहित विभिन्न संगठनों के नेता शामिल हुए। चारों शहरों में प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि नशा तस्करों, पुलिस और राजनीतिक लोगों के बीच कथित गठजोड़ के कारण नशे का कारोबार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि झोटा की हत्या को केवल आपसी रंजिश का मामला मानने के बजाय सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जीरा में नेताओं ने दावा किया कि झोटा ने करीब तीन साल पहले एक दुकानदार को नशीले कैप्सूलों सहित पकड़ा था। उनके अनुसार, बाद में झोटा को तीन महीने जेल में रहना पड़ा, जबकि संबंधित दुकानदार को रिवॉल्वर का लाइसेंस मिल गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। एक्शन कमेटी की प्रमुख मांगों में मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब के डीजीपी के इस्तीफे, परिवार की सहमति से पीजीआई चंडीगढ़ के वरिष्ठ डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम करवाने तथा हत्याकांड और इसके पीछे कथित नशा तस्करी-पुलिस-राजनीतिक गठजोड़ की सीबीआई जांच शामिल हैं।

