अनूपपुर जिले के कोतमा में 11 हजार केवी की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से एक मजदूर मौत मामले में पुलिस ने डेढ़ महीने बाद मकान मालिक पर रविवार को केस किया। मजदूर ने खतरे को देखते हुए काम करने से साफ मना किया था, लेकिन मकान मालिक ने दबाव बनाकर उससे जबरन काम कराया था। मामला 28 जुलाई का है। कोतमा के वार्ड नंबर 4 में मकान मालिक सुरेंद्र पांडे गोशाला और मकान का निर्माण करवा रहा था। इस निर्माणाधीन मकान के ठीक ऊपर से 11 हजार केवी की चालू बिजली लाइन गुजर रही थी। वहीं बरगवां निवासी मजदूर मोनू यादव काम पर लगा हुआ था। परिजन के अनुसार मोनू ने बिजली की चालू लाइन से खतरा जताते हुए काम करने से इनकार किया था, लेकिन इसके बावजूद उससे काम कराया गया। 28 जुलाई की शाम करीब साढ़े चार बजे बारिश के दौरान मोनू बिजली की तेज चपेट में आ गया और बुरी तरह झुलस गया। 9 दिन तक चला इलाज, रायपुर में तोड़ा दम हादसे के बाद झुलसे मोनू को पहले कोतमा के अस्पताल ले जाया गया, जहां से गंभीर हालत को देखते हुए उसे शहडोल, भिलाई और फिर रायपुर के डीकेएस अस्पताल रेफर किया गया। जिंदगी और मौत से जूझते हुए 9 दिन बाद 5 अगस्त को इलाज के दौरान मोनू ने दम तोड़ दिया। घटना के बाद से ही परिजन दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे थे। पुलिस ने मकान मालिक पर दर्ज की FIR घटना के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच की। जांच में मकान मालिक की लापरवाही और दबाव बनाने की बात सही पाई गई। इसके बाद कोतमा पुलिस ने मकान मालिक सुरेंद्र पांडे के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) के तहत केस दर्ज कर लिया है। फिलहाल पुलिस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।

