पिछले सप्ताह शेयर बाजार में अच्छी तेजी देखने के बाद सोमवार को घरेलू बाजार में अचानक बिकवाली बढ़ गई। बैंकिंग शेयरों में गिरावट, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान पर आ गए। बाजार में गिरावट के कारण बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल बाजार मूल्य करीब 4.68 लाख करोड़ रुपये घट गया।
सोमवार दोपहर 1:57 बजे तक सेंसेक्स 928 अंक यानी 1.24 फीसदी गिरकर 73,801.07 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 274 अंक यानी 1.19 फीसदी टूटकर 22,871.80 पर पहुंच गया। इस गिरावट के बाद बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल बाजार मूल्य घटकर करीब 468 लाख करोड़ रुपये रह गया। बाजार में बिकवाली का दबाव बड़ी कंपनियों के साथ छोटे और मझोले शेयरों में भी देखने को मिला।
बैंकिंग शेयरों में गिरावट बाजार टूटने की सबसे बड़ी वजहों में शामिल रही। एक्सिस बैंक के शेयर करीब 5 फीसदी तक गिर गए। बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर 38 फीसदी की बढ़त के साथ 7,003 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया, लेकिन यह आंकड़ा बाजार के अनुमान से कम रहा। वहीं, एचडीएफसी बैंक के शेयरों में 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई। बैंक का मुनाफा बढ़कर 19,510 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही के 18,641 करोड़ रुपये से करीब 4.7 फीसदी अधिक है। आईसीआईसीआई बैंक और यस बैंक के शेयर भी 1 फीसदी से ज्यादा नीचे आ गए।
विदेशी निवेशकों की गतिविधियों ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को 1,166 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर खरीदे थे। हालांकि, अक्टूबर में अब तक 11 कारोबारी सत्रों में से 9 सत्रों में वे शुद्ध बिकवाली कर चुके हैं। लगातार निकासी से बाजार में तेजी को सहारा मिलने में मुश्किल हो रही है।
कच्चे तेल की कीमतें भी निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनी हुई हैं। ब्रेंट कच्चा तेल 2 फीसदी से ज्यादा गिरने के बावजूद 107 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा था, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस पर व्यापक प्रतिबंधों में छूट देने के फैसले के बाद तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई। हालांकि, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि इस फैसले के आर्थिक असर का आकलन करने में 60 दिन तक लग सकते हैं। होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने भी तेल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ाई है।
दुनिया के दूसरे बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। जापान का निक्केई 0.64 फीसदी गिरा, जबकि इंडोनेशिया का जकार्ता कंपोजिट 5 फीसदी से ज्यादा टूट गया। इसके उलट दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 2 फीसदी चढ़ा। अमेरिकी बाजार में शुक्रवार को नैस्डैक 2 फीसदी से ज्यादा और एसएंडपी 500 एक फीसदी से अधिक गिरा था।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के मुताबिक, पिछले सप्ताह निफ्टी में 2.8 फीसदी की तेजी और बड़ी कंपनियों के अच्छे नतीजे बाजार को सहारा दे सकते हैं, लेकिन महंगा कच्चा तेल बड़ी चुनौती बना हुआ है। गौरतलब है कि हाल की तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफा निकालना भी शुरू किया है। मंगलवार को बाजार बंद रहने से पहले निफ्टी के वायदा सौदों की समाप्ति को लेकर भी उतार-चढ़ाव की आशंका बनी हुई है। ऐसे में निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही नतीजों और वैश्विक घटनाक्रम पर बनी हुई है।

