सोमवार को जापान के नागोया में चल रहे 2026 एशियन पैरा गेम्स में, भारत के कपिल परमार ने पुरुषों के J1 -70kg पैरा-जुडो इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता। ब्रॉन्ज मेडल के मुकाबले में, परमार ने इंडोनेशिया के शिदकी राफली अहनाफ को 69 सेकंड में ‘इप्पोन’ (Ippon) से हरा दिया। पेरिस 2024 पैरालंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले कपिल परमार का यह एशियन पैरा गेम्स में दूसरा मेडल है; इससे पहले उन्होंने 2023 के हांगझोऊ गेम्स में सिल्वर मेडल जीता था। इन गेम्स में उनका यह ब्रॉन्ज मेडल, भारत के लिए कुल तीसरा मेडल है और पैरा-जुडो में देश का पहला मेडल है।इसे भी पढ़ें: देश और दुनिया की दोपहर की बड़ी खबरें, पढ़ें प्रमुख राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमप्रतियोगिता में इससे पहले, क्वार्टर फाइनल में परमार ने मंगोलिया के बातरसुरेन बाट-एर्डेने को ‘गोल्डन स्कोर’ के दौरान 4 मिनट 53 सेकंड में ‘इप्पोन’ से हराकर अगले दौर में जगह बनाई थी। अपने प्रदर्शन पर बात करते हुए परमार ने कहा कि मैं अच्छा महसूस कर रहा हूँ। काफी समय हो गया था जब मैंने कोई मेडल जीता था। मैंने बहुत कड़ी मेहनत की है। मेरे कोच ने भी मुझ पर बहुत मेहनत की है। मैं तो गोल्ड मेडल जीतने की तैयारी के साथ आया था, लेकिन आज मेरा दिन या मेरी किस्मत साथ नहीं थी, इसलिए मुझे ब्रॉन्ज मेडल मिला। सभी भारतीयों का बहुत-बहुत धन्यवाद। आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद। TOPS (टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम) और SAI (स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) का बहुत-बहुत धन्यवाद। सभी का धन्यवाद। OGQ (ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट) का भी धन्यवाद। बहुत-बहुत धन्यवाद, भारत।परमार के कोच, मुनव्वर अंजार ने इस मेडल के महत्व पर जोर दिया, खासकर इसलिए क्योंकि हाल के महीनों में परमार को कई निजी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिसमें उनकी मां की खराब तबीयत भी शामिल थी। अंजार ने कहा, “उनके लिए ब्रॉन्ज मेडल जीतना बहुत जरूरी था। उन्होंने पैरालंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीता। लेकिन उसके बाद कुछ ऐसी स्थितियां बनीं कि घर पर उनकी मां की तबीयत ठीक नहीं थी। इस वजह से वह काफी टूट गए थे, मानसिक रूप से भी। लेकिन मैंने उनसे कहा कि उन्हें यह मेडल अपनी मां को समर्पित करना चाहिए। और आज उन्होंने ऐसा ही किया। सबसे बड़ी बात यह है कि हमें मेडल मिला। और हमें जो ब्रॉन्ज मेडल मिला है, उसके सहारे हम आने वाले पैरालंपिक के लिए बहुत कड़ी तैयारी करेंगे।”इसे भी पढ़ें: Asian Para Games 2026 के लिए 168 सदस्यीय भारतीय दल तैयार, SAI केंद्रों में विशेष कैंपपरमार ने पेरिस 2024 पैरालंपिक खेलों में इतिहास रच दिया। वह पैरालंपिक मेडल जीतने वाले भारत के पहले जूडोका (judo athlete) बन गए हैं, जिन्होंने पुरुषों की J1 -60kg कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीता। उनके खेल करियर में कई मुश्किलें आईं; एक बार जब वह पानी से भरे खेत में काम कर रहे थे, तब वहां बिजली का एक तार गिर गया, जिससे उन्हें करंट लगा और उनकी आंखों की रोशनी चली गई। इन मुश्किलों के बावजूद, परमार ने लखनऊ की इंडियन पैरा जूडो एकेडमी में अपनी ट्रेनिंग जारी रखी और अब वह इस खेल के प्रमुख एथलीटों में से एक बन गए हैं। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल जीते हैं, जिनमें 2023 में अलेक्जेंड्रिया में, और 2024 में अंताल्या और त्बिलिसी में आयोजित IBSA जूडो ग्रां प्री प्रतियोगिताएं शामिल हैं।
सोमवार को जापान के नागोया में चल रहे 2026 एशियन पैरा गेम्स में, भारत के कपिल परमार ने पुरुषों के J1 -70kg पैरा-जुडो इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता। ब्रॉन्ज मेडल के मुकाबले में, परमार ने इंडोनेशिया के शिदकी राफली अहनाफ को 69 सेकंड में ‘इप्पोन’ (Ippon) से हरा दिया। पेरिस 2024 पैरालंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले कपिल परमार का यह एशियन पैरा गेम्स में दूसरा मेडल है; इससे पहले उन्होंने 2023 के हांगझोऊ गेम्स में सिल्वर मेडल जीता था। इन गेम्स में उनका यह ब्रॉन्ज मेडल, भारत के लिए कुल तीसरा मेडल है और पैरा-जुडो में देश का पहला मेडल है।
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प्रतियोगिता में इससे पहले, क्वार्टर फाइनल में परमार ने मंगोलिया के बातरसुरेन बाट-एर्डेने को ‘गोल्डन स्कोर’ के दौरान 4 मिनट 53 सेकंड में ‘इप्पोन’ से हराकर अगले दौर में जगह बनाई थी। अपने प्रदर्शन पर बात करते हुए परमार ने कहा कि मैं अच्छा महसूस कर रहा हूँ। काफी समय हो गया था जब मैंने कोई मेडल जीता था। मैंने बहुत कड़ी मेहनत की है। मेरे कोच ने भी मुझ पर बहुत मेहनत की है। मैं तो गोल्ड मेडल जीतने की तैयारी के साथ आया था, लेकिन आज मेरा दिन या मेरी किस्मत साथ नहीं थी, इसलिए मुझे ब्रॉन्ज मेडल मिला। सभी भारतीयों का बहुत-बहुत धन्यवाद। आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद। TOPS (टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम) और SAI (स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) का बहुत-बहुत धन्यवाद। सभी का धन्यवाद। OGQ (ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट) का भी धन्यवाद। बहुत-बहुत धन्यवाद, भारत।
परमार के कोच, मुनव्वर अंजार ने इस मेडल के महत्व पर जोर दिया, खासकर इसलिए क्योंकि हाल के महीनों में परमार को कई निजी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिसमें उनकी मां की खराब तबीयत भी शामिल थी। अंजार ने कहा, “उनके लिए ब्रॉन्ज मेडल जीतना बहुत जरूरी था। उन्होंने पैरालंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीता। लेकिन उसके बाद कुछ ऐसी स्थितियां बनीं कि घर पर उनकी मां की तबीयत ठीक नहीं थी। इस वजह से वह काफी टूट गए थे, मानसिक रूप से भी। लेकिन मैंने उनसे कहा कि उन्हें यह मेडल अपनी मां को समर्पित करना चाहिए। और आज उन्होंने ऐसा ही किया। सबसे बड़ी बात यह है कि हमें मेडल मिला। और हमें जो ब्रॉन्ज मेडल मिला है, उसके सहारे हम आने वाले पैरालंपिक के लिए बहुत कड़ी तैयारी करेंगे।”
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परमार ने पेरिस 2024 पैरालंपिक खेलों में इतिहास रच दिया। वह पैरालंपिक मेडल जीतने वाले भारत के पहले जूडोका (judo athlete) बन गए हैं, जिन्होंने पुरुषों की J1 -60kg कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीता। उनके खेल करियर में कई मुश्किलें आईं; एक बार जब वह पानी से भरे खेत में काम कर रहे थे, तब वहां बिजली का एक तार गिर गया, जिससे उन्हें करंट लगा और उनकी आंखों की रोशनी चली गई। इन मुश्किलों के बावजूद, परमार ने लखनऊ की इंडियन पैरा जूडो एकेडमी में अपनी ट्रेनिंग जारी रखी और अब वह इस खेल के प्रमुख एथलीटों में से एक बन गए हैं। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल जीते हैं, जिनमें 2023 में अलेक्जेंड्रिया में, और 2024 में अंताल्या और त्बिलिसी में आयोजित IBSA जूडो ग्रां प्री प्रतियोगिताएं शामिल हैं।
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