अयोध्या के राम मंदिर में विराजमान रामलला के आराम करने का समय बढ़ाने की तैयारी है। मंदिर ट्रस्ट ने तय किया है कि दोपहर में रामलला को करीब एक घंटे का विश्राम दिया जाएगा। इसके लिए दोपहर 12 बजे भोग लगने के बाद दोपहर 1 से 2 बजे तक का समय तय किया गया है। राम मंदिर की धार्मिक समिति के सदस्यों ने शुक्रवार को ट्रस्ट के महासचिव स्वामी गोविंददेव गिरि के सामने यह सुझाव रखा था। इस पर सहमति बन गई है। अब इस व्यवस्था को कब से और कैसे लागू किया जाएगा, इसकी जिम्मेदारी मंदिर के सीईओ जितेंद्रनाथ मिश्र को दी गई है। त्योहारों में भी मिलेगा आराम मंदिर ट्रस्ट और धार्मिक समिति के बीच हुई चर्चा में कहा गया कि मेलों और दूसरे पर्वों के दौरान रामलला को दोपहर के भोग के बाद केवल 10 से 15 मिनट ही आराम मिल पाता है। जबकि रामलला को सुबह 4 बजे ही जगा दिया जाता है। उनकी बाल स्वरूप की मान्यता को देखते हुए दोपहर में कम से कम एक घंटे का विश्राम जरूरी माना गया है। ट्रस्ट के महासचिव ने इस सुझाव पर सहमति दे दी है। रात 10 बजे बंद होगा गर्भगृह का दरवाजा रामलला के रात्रि विश्राम को लेकर भी व्यवस्था तय की गई है। अब आरती और भोग के बाद रात ठीक 10 बजे गर्भगृह का सोने का दरवाजा बंद कर दिया जाएगा। इससे रामलला को रात में कम से कम छह घंटे के विश्राम का समय मिल सकेगा। अभी भीड़ के कारण कई बार मंदिर रात 10 बजे के बाद भी बंद होता रहा है। गिर गाय के दूध और खीर का लगेगा भोग रामलला को गिर नस्ल की गाय के शुद्ध दूध और उससे बनी खीर का भोग लगाने का भी निर्णय लिया गया है। इसके लिए राम मंदिर परिसर में पांच गायों की छोटी गोशाला खोलने की योजना है। गोशाला शुरू होने तक परिसर के बाहर से ही दूध की व्यवस्था जल्द कराने की जिम्मेदारी सीईओ को सौंपी गई है। सातों दिन अलग-अलग रंग के वस्त्र पहनेंगे रामलला रामलला के लिए सप्ताह के सातों दिन अलग-अलग रंगों के सूती, रेशमी और ऊनी वस्त्र तैयार कराए जाएंगे। मलमल के वस्त्रों को विदेशी मानते हुए योजना से बाहर कर दिया गया है। पहले इन वस्त्रों की सिलाई अयोध्या में रामलला की सेवा कर चुके कारीगरों से कराने की योजना थी। अब वस्त्रों की सिलाई कहां कराई जाएगी, इसकी जिम्मेदारी आशीष अग्निहोत्री को दी गई है। राम मंदिर के व्यवस्था प्रमुख आचार्य भी संबंधित लोगों के साथ मिलकर इन सभी कामों में तालमेल बनाए रखेंगे। वह धार्मिक समिति के सदस्यों और ट्रस्ट के पदाधिकारियों के संपर्क में रहकर व्यवस्थाओं को आगे बढ़ाएंगे।

