मुजफ्फरपुर में शारदीय नवरात्र के सातवें दिन शनिवार को मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जा रही है। सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। श्रद्धालु मां के दर्शन-पूजन और ध्यान में लीन हैं। पूरे बिहार में नवरात्र को लेकर भक्तों में उत्साह है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि की आराधना से भय, कलह और संकट दूर होते हैं। भक्त मां से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना कर रहे हैं। मां भक्तों को देती हैं शुभ फल मां दुर्गा के सातवें स्वरूप कालरात्रि को उनके उग्र रूप के लिए जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां का शरीर घने अंधकार के समान काला है। उनके बाल बिखरे हुए हैं और गले में विद्युत के समान चमकने वाली माला सुशोभित है। तीन नेत्रों वाली मां के सांसों से अग्नि की ज्वालाएं निकलती हैं। उनका वाहन गर्दभ है। मां अपने हाथों में अस्त्र धारण करती हैं और वरदान व अभय प्रदान करने वाली मुद्रा में भी रहती हैं। उग्र स्वरूप के बावजूद भक्तों का कल्याण करने के कारण उन्हें ‘शुभंकरी’ भी कहा जाता है। रक्तबीज के वध से जुड़ी है मान्यता पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा ने राक्षस रक्तबीज का संहार करने के लिए कालरात्रि का रूप धारण किया था। मां कालरात्रि को यंत्र, मंत्र और तंत्र की देवी भी माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, उनका संबंध शनि ग्रह से है। उनकी पूजा से शनि के दुष्प्रभाव और ग्रह बाधाएं दूर होने की मान्यता है। भय और संकट से रक्षा की कामना धार्मिक मान्यता है कि मां कालरात्रि की पूजा से साधक के जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और उसे सुख-शांति व समृद्धि प्राप्त होती है। मां की आराधना करते समय मन, वचन और कर्म की पवित्रता का विशेष महत्व बताया गया है। भक्त मां से भय, शत्रु और संकट से रक्षा की प्रार्थना करते हैं। नवरात्र के इस पावन अवसर पर श्रद्धालु पूजा-पाठ और साधना के माध्यम से मां का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। मुजफ्फरपुर में शारदीय नवरात्र के सातवें दिन शनिवार को मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जा रही है। सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। श्रद्धालु मां के दर्शन-पूजन और ध्यान में लीन हैं। पूरे बिहार में नवरात्र को लेकर भक्तों में उत्साह है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि की आराधना से भय, कलह और संकट दूर होते हैं। भक्त मां से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना कर रहे हैं। मां भक्तों को देती हैं शुभ फल मां दुर्गा के सातवें स्वरूप कालरात्रि को उनके उग्र रूप के लिए जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां का शरीर घने अंधकार के समान काला है। उनके बाल बिखरे हुए हैं और गले में विद्युत के समान चमकने वाली माला सुशोभित है। तीन नेत्रों वाली मां के सांसों से अग्नि की ज्वालाएं निकलती हैं। उनका वाहन गर्दभ है। मां अपने हाथों में अस्त्र धारण करती हैं और वरदान व अभय प्रदान करने वाली मुद्रा में भी रहती हैं। उग्र स्वरूप के बावजूद भक्तों का कल्याण करने के कारण उन्हें ‘शुभंकरी’ भी कहा जाता है। रक्तबीज के वध से जुड़ी है मान्यता पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा ने राक्षस रक्तबीज का संहार करने के लिए कालरात्रि का रूप धारण किया था। मां कालरात्रि को यंत्र, मंत्र और तंत्र की देवी भी माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, उनका संबंध शनि ग्रह से है। उनकी पूजा से शनि के दुष्प्रभाव और ग्रह बाधाएं दूर होने की मान्यता है। भय और संकट से रक्षा की कामना धार्मिक मान्यता है कि मां कालरात्रि की पूजा से साधक के जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और उसे सुख-शांति व समृद्धि प्राप्त होती है। मां की आराधना करते समय मन, वचन और कर्म की पवित्रता का विशेष महत्व बताया गया है। भक्त मां से भय, शत्रु और संकट से रक्षा की प्रार्थना करते हैं। नवरात्र के इस पावन अवसर पर श्रद्धालु पूजा-पाठ और साधना के माध्यम से मां का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।

