दिल्ली के शर्मा ब्रदर्स की पटना से हुई किडनैपिंग:5 करोड़ की मांगी फिरौती, कैसे आया रंजीत डॉन का नाम, रॉकेट लॉन्चर लेकर उतरे मनु महाराज

दिल्ली के शर्मा ब्रदर्स की पटना से हुई किडनैपिंग:5 करोड़ की मांगी फिरौती, कैसे आया रंजीत डॉन का नाम, रॉकेट लॉन्चर लेकर उतरे मनु महाराज

लालू के राज वाले 90 के दशक में बिहार में अपहरण उद्योग की तरह था। 2005 में नीतीश कुमार सीएम बने। क्राइम कंट्रोल किया तो अपराधियों ने चोला बदल लिया। ठेकेदार और कारोबारी जैसे रूप धर लिए, लेकिन अपराध करते रहे। बिहार फाइल्स में आज कहानी एक ऐसे अपहरण कांड की जिसमें कुख्यात माफिया रंजीत डॉन ने 12 करोड़ रुपए का ठेका दिलाने के नाम पर दिल्ली से दो कारोबारी भाइयों को पटना बुलाकर अगवा कर लिया। इन्हें छुड़ाने के लिए तब SSP रहे मनु महाराज ने एक्शन फिल्म के हीरो की तरह मोर्टार के गोले दागे थे। दिल्ली के बड़े मार्बल कारोबारी बाबू लाल शर्मा के दो बेटे हैं। एक का नाम कपिल शर्मा और दूसरे का सुरेश शर्मा। दोनों पिता के कारोबार को मिलकर चला रहे थे। मार्बल सप्लाई का टेंडर ले रहे थे। रंजीत डॉन ने इन्हें अगवा किया था। मुक्त कराए जाने पर कपिल शर्मा ने पुलिस को बताया… सितंबर के आखिरी हफ्ते की एक शाम फोन आया। हमारे परिचित इंजीनियर का नाम लेते हुए कहा- बिहार से गोपाल गोयल बोल रहा हूं। यहां एक पॉलीटेक्निक की फिनिशिंग का काम है। आकर देख लें। मैंने कहा, सोचकर बताऊंगा। उसी रात भैया सुरेश से बात की। उन्होंने कहा कि देख लेते हैं। इसके बाद गोपाल से दिवाली बाद साइट देखना तय हुआ। 19 अक्टूबर को फिर फोन आया। कहा-हमारे डायरेक्टर आ रहे हैं। जल्दी आकर साइट देख लें। हामी भरने पर 20 अक्टूबर का टिकट (गो एयर फ्लाइट की) भेज दिया। हम दोनों 21 की शाम 6.30 बजे पटना आए। एयरपोर्ट के अंदर ही थे कि ड्राइवर अजीत का नंबर मैसेज किया। अजीत ने टीयूवी से पिक किया। रास्ते में एक ढाबे पर चाय पी। बख्तियारपुर था शायद। लखीसराय में हाइवे से गाड़ी ने राइट टर्न ले लिया। थोड़ी देर बाद हम जंगल में थे। गाड़ी रुकी तो बाहर सात-आठ लोग खड़े थे। उन लोगों ने हमें पीटना शुरू कर दिया। हम समझ गए कि फंस गए हैं। हमारे कपड़े उतरवाए, हाथ बांधे व आंखों पर पट्टी लगा दी। फिर एक कमरे में रखा। रात में भूखे रहे। अगली सुबह भी पीटा। फिर पानी, फरही और अचार दिया। लखीसराय के रंजीत डॉन को दिल्ली से लेबर कांट्रेक्टर की लिस्ट हाथ लगी थी। इसमें दर्जनों ठेकेदारों के नाम, पता और मोबाइल नंबर जैसी जानकारी थी। इसी लिस्ट में शर्मा बंधुओं का नाम था। रंजीत ने लिस्ट की मदद से पता किया कि कपिल शर्मा और सुरेश शर्मा बड़े कारोबारी हैं। ये मार्बल सप्लाई करते हैं। उसने फुल प्रूफ प्लान के तहत दोनों भाइयों को IIT खड़गपुर में 12 करोड़ रुपए के मार्बल सप्लाई का ठेका दिलाने का झांसा दिया। डील पक्का कराने के लिए बिहार आने को कहा था। कारोबारी भाइयों को शक न हो, इसके लिए फ्लाइट का टिकट भेजा। दोनों को रिसीव करने के लिए पटना एयरपोर्ट पर पहले से ही बिना नंबर की एक फोर व्हीलर गाड़ी रखी गई थी। दो लोग इंतजार कर रहे थे। एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही दोनों को कार में बैठाया और फतुहा-बख्तियारपुर होते हुए मोकामा ले गए। रास्ते में दो और लोग सवार हो गए थे। मोकामा से गाड़ी लखीसराय की ओर बढ़ी और मुंगेर के हवेली खड़गपुर पहुंची। इसके बाद अपराधियों ने दोनों भाइयों से मोबाइल लिया और उसे स्विच ऑफ कर दिया। इसके बाद गाड़ी से उन्हें कजरा के जंगल में ले गए। उस वक्त यह नक्सल प्रभावित इलाका था। वहां पहाड़ पर एक आश्रम के कमरे में दोनों को बंधक बनाकर रखा गया। 21 अक्टूबर 2016 को दिल्ली के बदरपुर स्थित अपने घर में मौजूद बाबू लाल शर्मा बार-बार फोन देख रहे थे। बेटों के बिहार गए कई घंटे हो गए थे। दोनों ने पटना पहुंचकर फोन तक नहीं किया था। चिंता की बात थी कि दोनों के फोन स्विच ऑफ आ रहे थे। अनहोनी की आशंका से दिल बैठा जा रहा था। रात 11:30 बजे उनके फोन की घंटी बजी। कॉल बेटे ने किया था। बाबू लाल शर्मा ने कॉल रिसीव कर हैलो कहा था कि सामने से बेटे की आवाज आई… ‘पापा हम दोनों को पकड़ लिया गया है।’ इसके बाद अपराधियों की दूसरी टीम ने बाबू लाल शर्मा के मोबाइल नंबर पर कॉल किया। कहा, ‘आपके दोनों बेटे किडनैप कर लिए गए हैं। सुरक्षित वापस चाहते हैं तो 4 करोड़ रुपए जल्दी भेज दो।’ फिरौती की मांग सुनकर बाबू लाल शर्मा के कदम लड़खड़ा गए। परिवार के लोग भी टेंशन में आ गए। बाबू लाल शर्मा परिजनों के साथ पटना आए और SSP मनु महाराज से बात की। उन्हें पूरे मामले की जानकारी दी। जिस मोबाइल नंबर से फिरौती के लिए कॉल आया था वो नंबर भी दिया। SSP ने तुरंत तेज तर्रार ऑफिसर्स की एक स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (SIT) बनाई। लखीसराय में मिला टावर लोकेशन पुलिस की सबसे बड़ी चुनौती किडनैप हुए दोनों भाइयों को सही सलामत बरामद करने की थी। बात बिहार और पटना पुलिस दोनों के साख की थी। SSP ने पूरे ऑपरेशन की कमान खुद संभाली। SIT को दो भागों में बांटा। एक टीम कारोबारी के घर दिल्ली गई। दूसरी टीम टेक्निकल जांच में लगी। अपराधी अलग-अलग नंबरों से परिवार को फिरौती के लिए कॉल कर रहे थे। पहले 4 करोड़ फिर 5 करोड़ रुपए फिरौती मांगी गई। पुलिस ने उन मोबाइल नंबरों को खंगालना शुरू किया। पता चला कि ये पश्चिम बंगाल, यूपी और दिल्ली में फर्जी नाम-पते पर जारी हुए थे। टीम ने उन नंबरों का टावर लोकेशन चेक किया तो लखीसराय जिले का मिला। दूसरी तरफ दिल्ली गई टीम मार्बल कारोबारी से मिली। परिवार के हर एक सदस्य से बात की। उनके यहां काम करने वाले लोगों की जानकारी खंगाली। उसमें एक स्टाफ मुंगेर का रहने वाला निकला। इस पर पुलिस टीम को शक हुआ। उस स्टाफ से पूछताछ की गई। शुरुआत में वह कुछ बता नहीं रहा था। मगर, उसकी एक्टिविटी पुलिस के शक को और गहरा रही थी। सख्ती बरतने पर उसने राज उगला। वह अपराधियों का लाइनर निकला। उसने पूछताछ के दौरान लखीसराय जिले के रहने वाले कुख्यात अपराधी रंजीत मंडल उर्फ रंजीत डॉन का नाम लिया। कौन है रंजीत डॉन? लखीसराय जिले के रामगढ़ चौक थाना क्षेत्र में बोध नगर गांव है। रंजीत मंडल उर्फ रंजीत डॉन इसी गांव का रहने वाला है। उसके पिता का नाम शिवदानी मंडल था। रंजीत ने अपना एक ऑर्गनाइज्ड गैंग बना रखा था। इसका नेटवर्क बिहार से झारखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पश्चिम बंगाल तब फैला हुआ था। वह दूसरे राज्यों के बड़े कारोबारियों को टारगेट करता था। किडनैपिंग कर फिरौती वसूलना इसका मुख्य धंधा था। दिल्ली के दोनों कारोबारी भाइयों से पहले किडनैपिंग की 6 वारदातों को अंजाम दे चुका था। उसने मध्य प्रदेश के एक कारोबारी को किडनैप कर लखीसराय के पीरी बाजार थाना इलाके में स्थिति एक ठिकाने पर रखा था। इसी तरह यूपी के प्रयागराज (इलाहाबाद) के भी एक कारोबारी को किडनैप किया था। इसके खिलाफ बिहार में लखीसराय और जमुई व पश्चिम बंगाल के कुल्टी में आपराधिक मामले दर्ज हैं। समय बितता जा रहा था। पुलिस अपनी पड़ताल में कदम दर कदम आगे बढ़ती जा रही थी। जो एविडेंस मिले थे, उसके हिसाब से स्पष्ट हो चुका था कि अपराधियों ने दोनों भाइयों को किडनैप कर लखीसराय में ही कहीं छीपा रखा है। उस लोकेशन की तलाश के लिए दो अफसरों को लखीसराय भेजा गया। कई घंटे वे अलग-अलग इलाकों में खाक छानते रहे। फिर एक क्लू मिला। इसके बाद वे लखीसराय के विद्यापीठ सब्जी मंडी के पास पहुंचे। वहां से ‘लूल्हा’ नाम के संदिग्ध को पकड़ा। वह पहाड़ पर बंधक बनाकर रखे गए दोनों भाइयों के लिए खाना-पानी पहुंचाता था। इसका एक हाथ मुड़ा हुआ था, जिसके चलते लोग उसे ‘लूल्हा’ कहते थे। पुलिस की पूछताछ में वह टूट गया और सब कुछ बता दिया। रात में ही शुरू कर दिया ऑपरेशन चौथे दिन किडनैपिंग का मामला पटना पुलिस के सामने साफ हो गया। अपराधियों ने दोनों भाइयों को कहां छुपा रखा है, यह लोकेशन भी मिल गया था। नक्सलियों के गढ़ रहे कजरा जंगल में किडनैपर्स के ठिकाने तक पहुंचना पुलिस के लिए आसान नहीं था। 25 अक्टूबर 2016 को दिन में पटना पुलिस हरकत में आई। दल-बल के साथ एसआईटी प्रमुख मनु महाराज लखीसराय पहुंचे। लखीसराय एसपी और सीआरपीएफ कमांडेंट (131 बटालियन) के साथ रणनीति को अंतिम रूप दिया। इसके बाद एसएसपी के नेतृत्व में संयुक्त टीम निकल पड़ी। रात 10 बजे ऑपरेशन शुरू हुआ। पहाड़ी और घना जंगल होने के चलते गाड़ियों से जाना संभव नहीं था। पुलिस और अर्ध सैनिक बल के जवान करीब 15 किलोमीटर पैदल चले। एक पहाड़ी नदी पार कर टीम ने नक्सलियों के ठिकाने से पहले पोजीशन ले लिया। निगरानी कर रहे अपराधियों को पुलिस के आने का एहसास हुआ तो फायरिंग कर दी। जवाब में पुलिस की तरफ से AK-47 से 8-10 राउंड गोली चलाई गई। यही नहीं, SSP ने खुद CRPF की RPG (रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड) लॉन्चर लेकर मैदान में उतरे और उससे एक गोला दागा। इससे अपराधियों में हड़कंप मच गया। कमरे में कैद दोनों भाइयों को लगा कि पुलिस बचाने आई है। अंदर से उन्होंने ‘पुलिस वाले भैया’ बोलकर आवाज लगाई। मौके से पुलिस ने 4 अपराधियों को गिरफ्तार किया। फिर दोनों भाइयों को सही सलामत बरामद किया। पुलिस को देखते ही दोनों भाई उनके गले से लिपट गए थे। बंधकों को नींद का इंजेक्शन देते थे अपराधी मुक्त कराए जाने के बाद कपिल शर्मा ने बताया था, ‘अपराधियों ने 23 अक्टूबर की सुबह मेरी बात जीजाजी से करवाई। खुद भी बात की और कहा कि पांच करोड़ पहुंचाओ नहीं तो मार देंगे।’ ‘वे हमें नींद का इंजेक्शन देते थे। खुद कफ सिरप पीते और हमें भी पिलाते थे। 23 अक्टूबर की रात हमें दूसरी जगह ले गए। 24 को रंजीत डॉन से मिलवाया। रंजीत ने अपने लोगों से कहा कि ये वो नहीं है, जो हमें चाहिए।’ ‘इसके बाद उन लोगों ने हमें कपड़े पहनवाए और कहा कि चलो स्टेशन पर छोड़ देते हैं। वे हमें स्कार्पियो से लेकर चले। अंधेरा होने लगा था। हम फिर एक जंगल में थे। पहले पिटाई की फिर पहाड़ी पर ले गए। 24-25 अक्टूबर को वहीं रखा।’ ‘25 की रात हमसे कहा कि माओवादी यहां आ रहे हैं। हमें चलना होगा। जैसे ही वहां से बढ़े तेज रोशनी दिखाई दी। ये पैरा बम (एक प्रकार का इल्यूमिनेशन बम या रोशनी वाला गोला) की लाइट थी।’ ‘मैंने भैया ने कहा कि लगता है पुलिस आ गई है। थोड़ी ही देर में फिर गोली चली। एक अपराधी ने मेरे माथे पर पिस्टल तान दी। दूसरे ने कहा कि गोली मत चलाओ, पुलिस सुन लेगी।’ ‘इसके बाद मुझे इंजेक्शन देने की कोशिश की। भैया ने मुझे और इंजेक्शन देने वाले को धक्का दिया। हम चिल्लाते हुए भागने लगे। अचानक हमें पुलिस ने घेर लिया। हमारी जान में जान आई।’ काफी समय बाद पकड़ा गया था रंजीत डॉन पुलिस ने पहले 5 अपराधियों को गिरफ्तार किया था। सरगना रंजीत डॉन फरार था। पटना और लखीसराय की पुलिस टीम लगातार उसके पीछे लगी हुई थी। उसे पकड़ने के लिए कई लोकेशन पर छापेमारी की गई। कुछ महीनों बाद रंजीत डॉन को लखीसराय पुलिस ने अपने यहां दर्ज केस में गिरफ्तार किया और जेल भेज दिया था। लालू के राज वाले 90 के दशक में बिहार में अपहरण उद्योग की तरह था। 2005 में नीतीश कुमार सीएम बने। क्राइम कंट्रोल किया तो अपराधियों ने चोला बदल लिया। ठेकेदार और कारोबारी जैसे रूप धर लिए, लेकिन अपराध करते रहे। बिहार फाइल्स में आज कहानी एक ऐसे अपहरण कांड की जिसमें कुख्यात माफिया रंजीत डॉन ने 12 करोड़ रुपए का ठेका दिलाने के नाम पर दिल्ली से दो कारोबारी भाइयों को पटना बुलाकर अगवा कर लिया। इन्हें छुड़ाने के लिए तब SSP रहे मनु महाराज ने एक्शन फिल्म के हीरो की तरह मोर्टार के गोले दागे थे। दिल्ली के बड़े मार्बल कारोबारी बाबू लाल शर्मा के दो बेटे हैं। एक का नाम कपिल शर्मा और दूसरे का सुरेश शर्मा। दोनों पिता के कारोबार को मिलकर चला रहे थे। मार्बल सप्लाई का टेंडर ले रहे थे। रंजीत डॉन ने इन्हें अगवा किया था। मुक्त कराए जाने पर कपिल शर्मा ने पुलिस को बताया… सितंबर के आखिरी हफ्ते की एक शाम फोन आया। हमारे परिचित इंजीनियर का नाम लेते हुए कहा- बिहार से गोपाल गोयल बोल रहा हूं। यहां एक पॉलीटेक्निक की फिनिशिंग का काम है। आकर देख लें। मैंने कहा, सोचकर बताऊंगा। उसी रात भैया सुरेश से बात की। उन्होंने कहा कि देख लेते हैं। इसके बाद गोपाल से दिवाली बाद साइट देखना तय हुआ। 19 अक्टूबर को फिर फोन आया। कहा-हमारे डायरेक्टर आ रहे हैं। जल्दी आकर साइट देख लें। हामी भरने पर 20 अक्टूबर का टिकट (गो एयर फ्लाइट की) भेज दिया। हम दोनों 21 की शाम 6.30 बजे पटना आए। एयरपोर्ट के अंदर ही थे कि ड्राइवर अजीत का नंबर मैसेज किया। अजीत ने टीयूवी से पिक किया। रास्ते में एक ढाबे पर चाय पी। बख्तियारपुर था शायद। लखीसराय में हाइवे से गाड़ी ने राइट टर्न ले लिया। थोड़ी देर बाद हम जंगल में थे। गाड़ी रुकी तो बाहर सात-आठ लोग खड़े थे। उन लोगों ने हमें पीटना शुरू कर दिया। हम समझ गए कि फंस गए हैं। हमारे कपड़े उतरवाए, हाथ बांधे व आंखों पर पट्टी लगा दी। फिर एक कमरे में रखा। रात में भूखे रहे। अगली सुबह भी पीटा। फिर पानी, फरही और अचार दिया। लखीसराय के रंजीत डॉन को दिल्ली से लेबर कांट्रेक्टर की लिस्ट हाथ लगी थी। इसमें दर्जनों ठेकेदारों के नाम, पता और मोबाइल नंबर जैसी जानकारी थी। इसी लिस्ट में शर्मा बंधुओं का नाम था। रंजीत ने लिस्ट की मदद से पता किया कि कपिल शर्मा और सुरेश शर्मा बड़े कारोबारी हैं। ये मार्बल सप्लाई करते हैं। उसने फुल प्रूफ प्लान के तहत दोनों भाइयों को IIT खड़गपुर में 12 करोड़ रुपए के मार्बल सप्लाई का ठेका दिलाने का झांसा दिया। डील पक्का कराने के लिए बिहार आने को कहा था। कारोबारी भाइयों को शक न हो, इसके लिए फ्लाइट का टिकट भेजा। दोनों को रिसीव करने के लिए पटना एयरपोर्ट पर पहले से ही बिना नंबर की एक फोर व्हीलर गाड़ी रखी गई थी। दो लोग इंतजार कर रहे थे। एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही दोनों को कार में बैठाया और फतुहा-बख्तियारपुर होते हुए मोकामा ले गए। रास्ते में दो और लोग सवार हो गए थे। मोकामा से गाड़ी लखीसराय की ओर बढ़ी और मुंगेर के हवेली खड़गपुर पहुंची। इसके बाद अपराधियों ने दोनों भाइयों से मोबाइल लिया और उसे स्विच ऑफ कर दिया। इसके बाद गाड़ी से उन्हें कजरा के जंगल में ले गए। उस वक्त यह नक्सल प्रभावित इलाका था। वहां पहाड़ पर एक आश्रम के कमरे में दोनों को बंधक बनाकर रखा गया। 21 अक्टूबर 2016 को दिल्ली के बदरपुर स्थित अपने घर में मौजूद बाबू लाल शर्मा बार-बार फोन देख रहे थे। बेटों के बिहार गए कई घंटे हो गए थे। दोनों ने पटना पहुंचकर फोन तक नहीं किया था। चिंता की बात थी कि दोनों के फोन स्विच ऑफ आ रहे थे। अनहोनी की आशंका से दिल बैठा जा रहा था। रात 11:30 बजे उनके फोन की घंटी बजी। कॉल बेटे ने किया था। बाबू लाल शर्मा ने कॉल रिसीव कर हैलो कहा था कि सामने से बेटे की आवाज आई… ‘पापा हम दोनों को पकड़ लिया गया है।’ इसके बाद अपराधियों की दूसरी टीम ने बाबू लाल शर्मा के मोबाइल नंबर पर कॉल किया। कहा, ‘आपके दोनों बेटे किडनैप कर लिए गए हैं। सुरक्षित वापस चाहते हैं तो 4 करोड़ रुपए जल्दी भेज दो।’ फिरौती की मांग सुनकर बाबू लाल शर्मा के कदम लड़खड़ा गए। परिवार के लोग भी टेंशन में आ गए। बाबू लाल शर्मा परिजनों के साथ पटना आए और SSP मनु महाराज से बात की। उन्हें पूरे मामले की जानकारी दी। जिस मोबाइल नंबर से फिरौती के लिए कॉल आया था वो नंबर भी दिया। SSP ने तुरंत तेज तर्रार ऑफिसर्स की एक स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (SIT) बनाई। लखीसराय में मिला टावर लोकेशन पुलिस की सबसे बड़ी चुनौती किडनैप हुए दोनों भाइयों को सही सलामत बरामद करने की थी। बात बिहार और पटना पुलिस दोनों के साख की थी। SSP ने पूरे ऑपरेशन की कमान खुद संभाली। SIT को दो भागों में बांटा। एक टीम कारोबारी के घर दिल्ली गई। दूसरी टीम टेक्निकल जांच में लगी। अपराधी अलग-अलग नंबरों से परिवार को फिरौती के लिए कॉल कर रहे थे। पहले 4 करोड़ फिर 5 करोड़ रुपए फिरौती मांगी गई। पुलिस ने उन मोबाइल नंबरों को खंगालना शुरू किया। पता चला कि ये पश्चिम बंगाल, यूपी और दिल्ली में फर्जी नाम-पते पर जारी हुए थे। टीम ने उन नंबरों का टावर लोकेशन चेक किया तो लखीसराय जिले का मिला। दूसरी तरफ दिल्ली गई टीम मार्बल कारोबारी से मिली। परिवार के हर एक सदस्य से बात की। उनके यहां काम करने वाले लोगों की जानकारी खंगाली। उसमें एक स्टाफ मुंगेर का रहने वाला निकला। इस पर पुलिस टीम को शक हुआ। उस स्टाफ से पूछताछ की गई। शुरुआत में वह कुछ बता नहीं रहा था। मगर, उसकी एक्टिविटी पुलिस के शक को और गहरा रही थी। सख्ती बरतने पर उसने राज उगला। वह अपराधियों का लाइनर निकला। उसने पूछताछ के दौरान लखीसराय जिले के रहने वाले कुख्यात अपराधी रंजीत मंडल उर्फ रंजीत डॉन का नाम लिया। कौन है रंजीत डॉन? लखीसराय जिले के रामगढ़ चौक थाना क्षेत्र में बोध नगर गांव है। रंजीत मंडल उर्फ रंजीत डॉन इसी गांव का रहने वाला है। उसके पिता का नाम शिवदानी मंडल था। रंजीत ने अपना एक ऑर्गनाइज्ड गैंग बना रखा था। इसका नेटवर्क बिहार से झारखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पश्चिम बंगाल तब फैला हुआ था। वह दूसरे राज्यों के बड़े कारोबारियों को टारगेट करता था। किडनैपिंग कर फिरौती वसूलना इसका मुख्य धंधा था। दिल्ली के दोनों कारोबारी भाइयों से पहले किडनैपिंग की 6 वारदातों को अंजाम दे चुका था। उसने मध्य प्रदेश के एक कारोबारी को किडनैप कर लखीसराय के पीरी बाजार थाना इलाके में स्थिति एक ठिकाने पर रखा था। इसी तरह यूपी के प्रयागराज (इलाहाबाद) के भी एक कारोबारी को किडनैप किया था। इसके खिलाफ बिहार में लखीसराय और जमुई व पश्चिम बंगाल के कुल्टी में आपराधिक मामले दर्ज हैं। समय बितता जा रहा था। पुलिस अपनी पड़ताल में कदम दर कदम आगे बढ़ती जा रही थी। जो एविडेंस मिले थे, उसके हिसाब से स्पष्ट हो चुका था कि अपराधियों ने दोनों भाइयों को किडनैप कर लखीसराय में ही कहीं छीपा रखा है। उस लोकेशन की तलाश के लिए दो अफसरों को लखीसराय भेजा गया। कई घंटे वे अलग-अलग इलाकों में खाक छानते रहे। फिर एक क्लू मिला। इसके बाद वे लखीसराय के विद्यापीठ सब्जी मंडी के पास पहुंचे। वहां से ‘लूल्हा’ नाम के संदिग्ध को पकड़ा। वह पहाड़ पर बंधक बनाकर रखे गए दोनों भाइयों के लिए खाना-पानी पहुंचाता था। इसका एक हाथ मुड़ा हुआ था, जिसके चलते लोग उसे ‘लूल्हा’ कहते थे। पुलिस की पूछताछ में वह टूट गया और सब कुछ बता दिया। रात में ही शुरू कर दिया ऑपरेशन चौथे दिन किडनैपिंग का मामला पटना पुलिस के सामने साफ हो गया। अपराधियों ने दोनों भाइयों को कहां छुपा रखा है, यह लोकेशन भी मिल गया था। नक्सलियों के गढ़ रहे कजरा जंगल में किडनैपर्स के ठिकाने तक पहुंचना पुलिस के लिए आसान नहीं था। 25 अक्टूबर 2016 को दिन में पटना पुलिस हरकत में आई। दल-बल के साथ एसआईटी प्रमुख मनु महाराज लखीसराय पहुंचे। लखीसराय एसपी और सीआरपीएफ कमांडेंट (131 बटालियन) के साथ रणनीति को अंतिम रूप दिया। इसके बाद एसएसपी के नेतृत्व में संयुक्त टीम निकल पड़ी। रात 10 बजे ऑपरेशन शुरू हुआ। पहाड़ी और घना जंगल होने के चलते गाड़ियों से जाना संभव नहीं था। पुलिस और अर्ध सैनिक बल के जवान करीब 15 किलोमीटर पैदल चले। एक पहाड़ी नदी पार कर टीम ने नक्सलियों के ठिकाने से पहले पोजीशन ले लिया। निगरानी कर रहे अपराधियों को पुलिस के आने का एहसास हुआ तो फायरिंग कर दी। जवाब में पुलिस की तरफ से AK-47 से 8-10 राउंड गोली चलाई गई। यही नहीं, SSP ने खुद CRPF की RPG (रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड) लॉन्चर लेकर मैदान में उतरे और उससे एक गोला दागा। इससे अपराधियों में हड़कंप मच गया। कमरे में कैद दोनों भाइयों को लगा कि पुलिस बचाने आई है। अंदर से उन्होंने ‘पुलिस वाले भैया’ बोलकर आवाज लगाई। मौके से पुलिस ने 4 अपराधियों को गिरफ्तार किया। फिर दोनों भाइयों को सही सलामत बरामद किया। पुलिस को देखते ही दोनों भाई उनके गले से लिपट गए थे। बंधकों को नींद का इंजेक्शन देते थे अपराधी मुक्त कराए जाने के बाद कपिल शर्मा ने बताया था, ‘अपराधियों ने 23 अक्टूबर की सुबह मेरी बात जीजाजी से करवाई। खुद भी बात की और कहा कि पांच करोड़ पहुंचाओ नहीं तो मार देंगे।’ ‘वे हमें नींद का इंजेक्शन देते थे। खुद कफ सिरप पीते और हमें भी पिलाते थे। 23 अक्टूबर की रात हमें दूसरी जगह ले गए। 24 को रंजीत डॉन से मिलवाया। रंजीत ने अपने लोगों से कहा कि ये वो नहीं है, जो हमें चाहिए।’ ‘इसके बाद उन लोगों ने हमें कपड़े पहनवाए और कहा कि चलो स्टेशन पर छोड़ देते हैं। वे हमें स्कार्पियो से लेकर चले। अंधेरा होने लगा था। हम फिर एक जंगल में थे। पहले पिटाई की फिर पहाड़ी पर ले गए। 24-25 अक्टूबर को वहीं रखा।’ ‘25 की रात हमसे कहा कि माओवादी यहां आ रहे हैं। हमें चलना होगा। जैसे ही वहां से बढ़े तेज रोशनी दिखाई दी। ये पैरा बम (एक प्रकार का इल्यूमिनेशन बम या रोशनी वाला गोला) की लाइट थी।’ ‘मैंने भैया ने कहा कि लगता है पुलिस आ गई है। थोड़ी ही देर में फिर गोली चली। एक अपराधी ने मेरे माथे पर पिस्टल तान दी। दूसरे ने कहा कि गोली मत चलाओ, पुलिस सुन लेगी।’ ‘इसके बाद मुझे इंजेक्शन देने की कोशिश की। भैया ने मुझे और इंजेक्शन देने वाले को धक्का दिया। हम चिल्लाते हुए भागने लगे। अचानक हमें पुलिस ने घेर लिया। हमारी जान में जान आई।’ काफी समय बाद पकड़ा गया था रंजीत डॉन पुलिस ने पहले 5 अपराधियों को गिरफ्तार किया था। सरगना रंजीत डॉन फरार था। पटना और लखीसराय की पुलिस टीम लगातार उसके पीछे लगी हुई थी। उसे पकड़ने के लिए कई लोकेशन पर छापेमारी की गई। कुछ महीनों बाद रंजीत डॉन को लखीसराय पुलिस ने अपने यहां दर्ज केस में गिरफ्तार किया और जेल भेज दिया था।  

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