बिहार- 5 साल में 12 हजार से ज्यादा पंडाल बढ़े:2026 में 4 हजार ज्यादा पंडाल, 10 चर्चित पंडालों की खुबियों के बारे में जानिए

बिहार- 5 साल में 12 हजार से ज्यादा पंडाल बढ़े:2026 में 4 हजार ज्यादा पंडाल, 10 चर्चित पंडालों की खुबियों के बारे में जानिए

इस साल बिहार में दुर्गा पूजा को लेकर पश्चिम बंगाल जैसा पैटर्न दिख रहा है। गांव से लेकर शहर तक, गली-गली से चौक-चौराहों तक पंडाल बनाए गए हैं। राज्य में साल दर साल पंडाल की संख्या बढ़ती जा रही है। पिछले 5 साल में 12 हजार से ज्यादा पंडाल बढ़ गए हैं। इस बार आधिकारिक रूप से करीब 20 हजार पंडाल बनाए गए हैं। यह संख्या पिछले साल से चार हजार ज्यादा है। पंडाल बनाने और सजाने पर करीब एक हजार करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। मुंगेर में मलेशिया के ट्विन टावर की तर्ज पर तीन करोड़ रुपए खर्च कर पंडाल बनाया गया है। औसतन हर पंडाल में 5 लाख रुपए से ज्यादा खर्च हो रहे हैं। बिहार में कितने पंडाल बनाए जा रहे हैं? चर्चित पंडालों की थीम क्या है? पंडालों पर कितना खर्च हो रहा है? पढ़िए रिपोर्ट..। अब जानिए बिहार के 10 चर्चित पंडाल और उनकी खासियत 1. मुंगेर में बना मलेशिया का ट्विन टावर मुंगेर के बरियारपुर प्रखंड के कल्याणपुर में 363 साल से अधिक पुरानी बड़ी दुर्गा महारानी मंदिर के पास इस बार मलेशिया के पेट्रोनास ट्विन टावर की तर्ज पर पंडाल तैयार बना है। करीब 200 फीट ऊंचे पंडाल को बांस और लकड़ी से बनाया गया है। इसे तैयार करने में करीब 3 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। पश्चिम बंगाल और झारखंड के कारीगरों के साथ दूसरे राज्यों से आए कलाकारों ने सजावट की है। शीशे की नक्काशी, झरना, लेजर शो और आकर्षक रोशनी इसके प्रमुख आकर्षण हैं। परिसर में विक्टोरिया हाउस की थीम पर भगवान भोलेनाथ के दर्शन के इंतजाम हैं। यहां 2021 में करीब 80 लाख रुपए खर्च कर हवा महल जैसा पंडाल बनाया गया था। 2023 में मीनाक्षी मंदिर, 2024 में बुर्ज खलीफा और 2025 में बैंकॉक के अरुण मंदिर की थीम पर पंडाल बना था। 2. पटना के एतवारपुर में पुरी के जगन्नाथ मंदिर जैसा पंडाल पटना के एतवारपुर में पुरी के जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर करीब 121 फीट ऊंचा और 110 फीट चौड़ा पंडाल बनाया गया है। करीब 85 लाख रुपए की लागत से बने इस पंडाल में 10 हजार बांस लगाए गए हैं। 80 से ज्यादा लोगों ने पंडाल निर्माण, प्रतिमा और सजावट के काम किए। जगन्नाथ मंदिर की पहचान उसके ऊंचे शिखर और पारंपरिक बनावट से है। पंडाल में इन विशेषताओं की नकल की गई है। 3. पटना के कदमकुआं में तमिलनाडु के महालक्ष्मी मंदिर जैसा पंडाल पटना के कदमकुआं के डोमन भगत लेन में करीब 25 लाख रुपए की लागत से तमिलनाडु के मदुरै स्थित महालक्ष्मी मंदिर की तर्ज पर पंडाल बनाया गया है। करीब 65 फीट ऊंचा और 45 फीट चौड़ा पंडाल बनाने में थर्मोकोल, प्लाईवुड और लकड़ी का इस्तेमाल किया गया है। पंडाल में मां दुर्गा की करीब 25 फीट ऊंची प्रतिमा है। श्री श्री नवयुवक दुर्गा पूजा समिति 1959 से यहां दुर्गा पूजा कर रही है। समय के साथ पूजा का स्वरूप बदला है। इस साल की थीम में दक्षिण भारतीय मंदिर की बनावट को प्रमुखता दी गई है। 4. पटना के खाजपुरा में कैलाश पर्वत सा पंडाल बेली रोड के पास खाजपुरा शिव मंदिर का पूजा पंडाल इस बार कैलाश पर्वत की थीम पर तैयार किया गया है। 25 लाख रुपए की लागत से बने करीब 55 फीट ऊंची और 55 फीट चौड़ी संरचना में पर्वत जैसा दृश्य बनाया गया है। पंडाल के बाहर भगवान शिव की विशाल प्रतिमा और उनकी जटाओं से लगातार बहते जल का दृश्य है। भीतर मां दुर्गा को असुरों का संहार करते हुए दिखाया गया है। रामायण के प्रसंगों को भी जगह दी गई है। रावण को कैलाश पर्वत उठाते हुए और भगवान राम को रावण का वध करते दिखाया गया है। भगवान हनुमान की प्रतिमा भी सजावट का हिस्सा है। आयोजन समिति 1930 से यहां पूजा कर रही है। पंडाल और प्रतिमाओं के निर्माण गया के कारीगरों की टीम ने किया है। कोलकाता और शेखपुरा के कारीगरों ने लाइटिंग के काम किए हैं। 5. पटना के यारपुर में लंदन ब्रिज जैसा पंडाल पटना के मीठापुर के यारपुर में लंदन ब्रिज की तर्ज पर पंडाल तैयार किया गया है। इसका स्ट्रक्चर केबल ब्रिज जैसा है। दोनों साइड दो पिलर खड़े किए गए हैं। ब्रिज पर गाड़ी चलती दिखेगी। इसके साथ ही राम-रावण युद्ध का प्रदर्शन होगा।

पंडाल तैयार करने में करीब 2 हजार बांस लगे हैं। इसे झारखंड के मधुपुर से आए कारीगरों की टीम ने तैयार किया है। यहां पिछले वर्षों में गोवर्धन पर्वत, अमेरिका के स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी और असम के चाय बागानों जैसी थीम पर आकर्षक पंडाल बनाए गए हैं। 6. सारण के मांझी में बना गैंडे की आकृति वाला पंडाल सारण जिले के मांझी नगर पंचायत के मियां पट्टी में जय मां जगदम्बे पूजा समिति ने गैंडे की आकृति वाला पंडाल तैयार कराया है। करीब 70 फीट चौड़े और 50 फीट ऊंचे इस पंडाल की बनावट पारंपरिक मंदिर या महल की थीम से अलग है। इसे बनाने में करीब 5 लाख रुपए खर्च हुए हैं। पंडाल में लगभग 600 बांस और डेढ़ क्विंटल नारियल की रस्सी लगी है। कारीगरों के नेतृत्व में स्थानीय युवाओं ने दो महीने श्रमदान कर इसे तैयार किया है। समिति के मुताबिक, यहां 2001 से दुर्गा पूजा हो रही है। 7- भागलपुर में बना महावीर मंदिर जैसा पंडाल पटना जंक्शन के महावीर मंदिर की तर्ज पर भागलपुर के कचहरी चौक पर सत्कार क्लब द्वारा पंडाल बनवाया गया है। करीब 70 फीट ऊंचे पंडाल को पश्चिम बंगाल के मालदा से आए कारीगरों ने तैयार किया है। पंडाल की सजावट के सामान कोलकाता से मंगाए गए। सत्कार क्लब की ओर से 1990 से कचहरी चौक पर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जा रही है। 2010 से यहां के पंडाल चर्चा में रहे हैं। 2019 में गुजरात के प्रसिद्ध अक्षरधाम मंदिर की प्रतिकृति पर आधारित विशाल पंडाल बनाया गया था। 2022 में कोलकाता के दक्षिणेश्वर काली मंदिर और 2023 में रजरप्पा मंदिर की थीम पर पंडाल बनाया गया था। 2024 में दिल्ली के लोटस टेंपल और 2025 में जमुई के मलयपुर काली मंदिर की तर्ज पर पंडाल बनाया गया था। 8- पूर्णिया के रामबाग ब्रह्म स्थान चौक पर बना शीश महल पूर्णिया के रामबाग स्थित ब्रह्मस्थान चौक पर सत्य सारथी मां दुर्गा पूजा समिति की ओर से शीश महल की तर्ज पर करीब 60 फीट ऊंचा पंडाल तैयार किया गया है। इसमें शीशे की नक्काशी के साथ काम किया गया है। बंगाल से आए कारीगरों ने करीब 10 लाख रुपए की लागत से पंडाल बनाया है। 9- मुजफ्फरपुर के जूरन छपरा में अक्षरधाम मंदिर जैसा पंडाल मुजफ्फरपुर के जूरन छपरा के महेश बाबू चौक पर गुजरात के अक्षरधाम मंदिर की थीम पर पंडाल बनाया गया है। 71 फीट ऊंचे इस पंडाल में 12 फीट की वैष्णवी स्वरूप वाली मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित है। प्रतिमा में मां को आशीर्वादी मुद्रा में दर्शाया गया है। 10- मुजफ्फरपुर के सरैयागंज में बना 300 फीट लंबा पंडाल मुजफ्फरपुर के सरैयागंज में 300 फीट लंबा पंडाल बनाया गया है। यहां 1939 से दुर्गा पूजा हो रही है। पंडाल को भव्य दरबार की तर्ज पर खास कपड़ों और आकर्षक लैंप की रोशनी से सजाया गया है। पंडाल की सजावट के लिए कोलकाता से कारीगर बुलाए गए हैं। 30 फीट और 20 फीट ऊंचे दो भव्य गेट बनाए गए हैं। एक गेट सरैयागंज टावर के पास और दूसरा सूतापट्टी मोड़ के पास है। बिहार में इस साल पंडालों पर खर्च हुए 1000 करोड़ रुपए बिहार में इस साल करीब 20 हजार दुर्गा पूजा पंडाल बनाए जा रहे हैं। इन्हें तैयार करने में करीब एक हजार करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। पंडाल बनाने की लागत उसके आकार, डिजाइन और मटेरियल जैसी बातों से अलग-अलग होती है। गांवों और छोटे मोहल्लों में पंडाल 5 से 10 लाख रुपए में तैयार किए गए हैं। वहीं, शहरों के थीम पंडालों पर 20–25 लाख रुपए या उससे ज्यादा खर्च हुए हैं। पटना में एक पंडाल पर 20 से 25 लाख रुपए खर्च किए गए हैं। बिहारशरीफ में सामान्य पंडाल की लागत 6.5–7 लाख रुपए तक पहुंचने की रिपोर्ट है। सीवान में प्रमुख पंडालों का बजट 8 से 10 लाख रुपए और बड़े थीम पंडालों के लिए 20–25 लाख रुपए बताया गया है। पूरे बिहार के 20 हजार पंडाल को देखें तो औसतन खर्च 5 लाख रुपए तक निकल रहा है। इसमें प्रतिमा निर्माण, पंडाल, सजावट, बिजली और साउंड जैसी मदें शामिल मानी जा सकती हैं। हर समिति का बजट अलग होता है। सुरक्षा, सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रसाद और विसर्जन का खर्च भी अलग से जुड़ सकता है। इनपुट- मुंगेर से चेतन कुमार झा, छपरा से धनंजय सिंह तोमर, पूर्णिया से तहसिन अली, मुजफ्फरपुर से मुरारी कुमार, भागलपुर से धीरज झा इस साल बिहार में दुर्गा पूजा को लेकर पश्चिम बंगाल जैसा पैटर्न दिख रहा है। गांव से लेकर शहर तक, गली-गली से चौक-चौराहों तक पंडाल बनाए गए हैं। राज्य में साल दर साल पंडाल की संख्या बढ़ती जा रही है। पिछले 5 साल में 12 हजार से ज्यादा पंडाल बढ़ गए हैं। इस बार आधिकारिक रूप से करीब 20 हजार पंडाल बनाए गए हैं। यह संख्या पिछले साल से चार हजार ज्यादा है। पंडाल बनाने और सजाने पर करीब एक हजार करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। मुंगेर में मलेशिया के ट्विन टावर की तर्ज पर तीन करोड़ रुपए खर्च कर पंडाल बनाया गया है। औसतन हर पंडाल में 5 लाख रुपए से ज्यादा खर्च हो रहे हैं। बिहार में कितने पंडाल बनाए जा रहे हैं? चर्चित पंडालों की थीम क्या है? पंडालों पर कितना खर्च हो रहा है? पढ़िए रिपोर्ट..। अब जानिए बिहार के 10 चर्चित पंडाल और उनकी खासियत 1. मुंगेर में बना मलेशिया का ट्विन टावर मुंगेर के बरियारपुर प्रखंड के कल्याणपुर में 363 साल से अधिक पुरानी बड़ी दुर्गा महारानी मंदिर के पास इस बार मलेशिया के पेट्रोनास ट्विन टावर की तर्ज पर पंडाल तैयार बना है। करीब 200 फीट ऊंचे पंडाल को बांस और लकड़ी से बनाया गया है। इसे तैयार करने में करीब 3 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। पश्चिम बंगाल और झारखंड के कारीगरों के साथ दूसरे राज्यों से आए कलाकारों ने सजावट की है। शीशे की नक्काशी, झरना, लेजर शो और आकर्षक रोशनी इसके प्रमुख आकर्षण हैं। परिसर में विक्टोरिया हाउस की थीम पर भगवान भोलेनाथ के दर्शन के इंतजाम हैं। यहां 2021 में करीब 80 लाख रुपए खर्च कर हवा महल जैसा पंडाल बनाया गया था। 2023 में मीनाक्षी मंदिर, 2024 में बुर्ज खलीफा और 2025 में बैंकॉक के अरुण मंदिर की थीम पर पंडाल बना था। 2. पटना के एतवारपुर में पुरी के जगन्नाथ मंदिर जैसा पंडाल पटना के एतवारपुर में पुरी के जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर करीब 121 फीट ऊंचा और 110 फीट चौड़ा पंडाल बनाया गया है। करीब 85 लाख रुपए की लागत से बने इस पंडाल में 10 हजार बांस लगाए गए हैं। 80 से ज्यादा लोगों ने पंडाल निर्माण, प्रतिमा और सजावट के काम किए। जगन्नाथ मंदिर की पहचान उसके ऊंचे शिखर और पारंपरिक बनावट से है। पंडाल में इन विशेषताओं की नकल की गई है। 3. पटना के कदमकुआं में तमिलनाडु के महालक्ष्मी मंदिर जैसा पंडाल पटना के कदमकुआं के डोमन भगत लेन में करीब 25 लाख रुपए की लागत से तमिलनाडु के मदुरै स्थित महालक्ष्मी मंदिर की तर्ज पर पंडाल बनाया गया है। करीब 65 फीट ऊंचा और 45 फीट चौड़ा पंडाल बनाने में थर्मोकोल, प्लाईवुड और लकड़ी का इस्तेमाल किया गया है। पंडाल में मां दुर्गा की करीब 25 फीट ऊंची प्रतिमा है। श्री श्री नवयुवक दुर्गा पूजा समिति 1959 से यहां दुर्गा पूजा कर रही है। समय के साथ पूजा का स्वरूप बदला है। इस साल की थीम में दक्षिण भारतीय मंदिर की बनावट को प्रमुखता दी गई है। 4. पटना के खाजपुरा में कैलाश पर्वत सा पंडाल बेली रोड के पास खाजपुरा शिव मंदिर का पूजा पंडाल इस बार कैलाश पर्वत की थीम पर तैयार किया गया है। 25 लाख रुपए की लागत से बने करीब 55 फीट ऊंची और 55 फीट चौड़ी संरचना में पर्वत जैसा दृश्य बनाया गया है। पंडाल के बाहर भगवान शिव की विशाल प्रतिमा और उनकी जटाओं से लगातार बहते जल का दृश्य है। भीतर मां दुर्गा को असुरों का संहार करते हुए दिखाया गया है। रामायण के प्रसंगों को भी जगह दी गई है। रावण को कैलाश पर्वत उठाते हुए और भगवान राम को रावण का वध करते दिखाया गया है। भगवान हनुमान की प्रतिमा भी सजावट का हिस्सा है। आयोजन समिति 1930 से यहां पूजा कर रही है। पंडाल और प्रतिमाओं के निर्माण गया के कारीगरों की टीम ने किया है। कोलकाता और शेखपुरा के कारीगरों ने लाइटिंग के काम किए हैं। 5. पटना के यारपुर में लंदन ब्रिज जैसा पंडाल पटना के मीठापुर के यारपुर में लंदन ब्रिज की तर्ज पर पंडाल तैयार किया गया है। इसका स्ट्रक्चर केबल ब्रिज जैसा है। दोनों साइड दो पिलर खड़े किए गए हैं। ब्रिज पर गाड़ी चलती दिखेगी। इसके साथ ही राम-रावण युद्ध का प्रदर्शन होगा।

पंडाल तैयार करने में करीब 2 हजार बांस लगे हैं। इसे झारखंड के मधुपुर से आए कारीगरों की टीम ने तैयार किया है। यहां पिछले वर्षों में गोवर्धन पर्वत, अमेरिका के स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी और असम के चाय बागानों जैसी थीम पर आकर्षक पंडाल बनाए गए हैं। 6. सारण के मांझी में बना गैंडे की आकृति वाला पंडाल सारण जिले के मांझी नगर पंचायत के मियां पट्टी में जय मां जगदम्बे पूजा समिति ने गैंडे की आकृति वाला पंडाल तैयार कराया है। करीब 70 फीट चौड़े और 50 फीट ऊंचे इस पंडाल की बनावट पारंपरिक मंदिर या महल की थीम से अलग है। इसे बनाने में करीब 5 लाख रुपए खर्च हुए हैं। पंडाल में लगभग 600 बांस और डेढ़ क्विंटल नारियल की रस्सी लगी है। कारीगरों के नेतृत्व में स्थानीय युवाओं ने दो महीने श्रमदान कर इसे तैयार किया है। समिति के मुताबिक, यहां 2001 से दुर्गा पूजा हो रही है। 7- भागलपुर में बना महावीर मंदिर जैसा पंडाल पटना जंक्शन के महावीर मंदिर की तर्ज पर भागलपुर के कचहरी चौक पर सत्कार क्लब द्वारा पंडाल बनवाया गया है। करीब 70 फीट ऊंचे पंडाल को पश्चिम बंगाल के मालदा से आए कारीगरों ने तैयार किया है। पंडाल की सजावट के सामान कोलकाता से मंगाए गए। सत्कार क्लब की ओर से 1990 से कचहरी चौक पर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जा रही है। 2010 से यहां के पंडाल चर्चा में रहे हैं। 2019 में गुजरात के प्रसिद्ध अक्षरधाम मंदिर की प्रतिकृति पर आधारित विशाल पंडाल बनाया गया था। 2022 में कोलकाता के दक्षिणेश्वर काली मंदिर और 2023 में रजरप्पा मंदिर की थीम पर पंडाल बनाया गया था। 2024 में दिल्ली के लोटस टेंपल और 2025 में जमुई के मलयपुर काली मंदिर की तर्ज पर पंडाल बनाया गया था। 8- पूर्णिया के रामबाग ब्रह्म स्थान चौक पर बना शीश महल पूर्णिया के रामबाग स्थित ब्रह्मस्थान चौक पर सत्य सारथी मां दुर्गा पूजा समिति की ओर से शीश महल की तर्ज पर करीब 60 फीट ऊंचा पंडाल तैयार किया गया है। इसमें शीशे की नक्काशी के साथ काम किया गया है। बंगाल से आए कारीगरों ने करीब 10 लाख रुपए की लागत से पंडाल बनाया है। 9- मुजफ्फरपुर के जूरन छपरा में अक्षरधाम मंदिर जैसा पंडाल मुजफ्फरपुर के जूरन छपरा के महेश बाबू चौक पर गुजरात के अक्षरधाम मंदिर की थीम पर पंडाल बनाया गया है। 71 फीट ऊंचे इस पंडाल में 12 फीट की वैष्णवी स्वरूप वाली मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित है। प्रतिमा में मां को आशीर्वादी मुद्रा में दर्शाया गया है। 10- मुजफ्फरपुर के सरैयागंज में बना 300 फीट लंबा पंडाल मुजफ्फरपुर के सरैयागंज में 300 फीट लंबा पंडाल बनाया गया है। यहां 1939 से दुर्गा पूजा हो रही है। पंडाल को भव्य दरबार की तर्ज पर खास कपड़ों और आकर्षक लैंप की रोशनी से सजाया गया है। पंडाल की सजावट के लिए कोलकाता से कारीगर बुलाए गए हैं। 30 फीट और 20 फीट ऊंचे दो भव्य गेट बनाए गए हैं। एक गेट सरैयागंज टावर के पास और दूसरा सूतापट्टी मोड़ के पास है। बिहार में इस साल पंडालों पर खर्च हुए 1000 करोड़ रुपए बिहार में इस साल करीब 20 हजार दुर्गा पूजा पंडाल बनाए जा रहे हैं। इन्हें तैयार करने में करीब एक हजार करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। पंडाल बनाने की लागत उसके आकार, डिजाइन और मटेरियल जैसी बातों से अलग-अलग होती है। गांवों और छोटे मोहल्लों में पंडाल 5 से 10 लाख रुपए में तैयार किए गए हैं। वहीं, शहरों के थीम पंडालों पर 20–25 लाख रुपए या उससे ज्यादा खर्च हुए हैं। पटना में एक पंडाल पर 20 से 25 लाख रुपए खर्च किए गए हैं। बिहारशरीफ में सामान्य पंडाल की लागत 6.5–7 लाख रुपए तक पहुंचने की रिपोर्ट है। सीवान में प्रमुख पंडालों का बजट 8 से 10 लाख रुपए और बड़े थीम पंडालों के लिए 20–25 लाख रुपए बताया गया है। पूरे बिहार के 20 हजार पंडाल को देखें तो औसतन खर्च 5 लाख रुपए तक निकल रहा है। इसमें प्रतिमा निर्माण, पंडाल, सजावट, बिजली और साउंड जैसी मदें शामिल मानी जा सकती हैं। हर समिति का बजट अलग होता है। सुरक्षा, सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रसाद और विसर्जन का खर्च भी अलग से जुड़ सकता है। इनपुट- मुंगेर से चेतन कुमार झा, छपरा से धनंजय सिंह तोमर, पूर्णिया से तहसिन अली, मुजफ्फरपुर से मुरारी कुमार, भागलपुर से धीरज झा  

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