Ahmedabad. राजनीतिक चंदे के नाम पर कथित वित्तीय अनियमितता और कर चोरी का एक और मामला सामने आया है। आयकर विभाग की शिकायत पर सीआइडी क्राइम के अहमदाबाद जोन में आम जनमत पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरव मिश्रा, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष धर्मेंद्र वैष्णव समेत छह लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज की गई है। शिकायत के अनुसार, एक अप्रेल 2022 से छह अगस्त 2025 के दौरान पार्टी के नाम पर 843 करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ और इससे सरकार को करीब 250 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान होने का आरोप है।
कमीशन काटकर नकद लौटाने का आरोप
आयकर विभाग के सहायक आयकर आयुक्त किरीटकुमार परमार की शिकायत के मुताबिक, राजनीतिक चंदे के रूप में दानदाताओं से बैंकिंग माध्यम से राशि ली जाती थी। इसके बाद अलग-अलग संस्थाओं के खातों के जरिए रकम का लेनदेन कर कमीशन काटने के बाद शेष राशि कथित तौर पर दानदाताओं को नकद लौटा दी जाती थी। एफआइआर में इसे कर छूट का अनुचित लाभ लेने और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने की कथित साजिश बताया गया है।
फर्जी बिलों से खर्च दिखाने की आशंका
शिकायत में कहा गया है कि पार्टी का पंजीकरण 24 जून 2020 को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत हुआ था। आयकर विभाग की जांच में आरोप लगाया गया कि चुनावी खर्च, रैलियों, आंदोलनों, प्रचार और विज्ञापनों के नाम पर खर्च दिखाए गए, लेकिन उनके समर्थन में वास्तविक बिल, वाउचर और जरूरी लेखा दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। प्रेनित कॉर्पोरेशन, हेशाज कॉर्पोरेशन, आयान एंटरप्राइजेज और श्री रामदेव एंटरप्राइजेज के खातों के जरिए राशि स्थानांतरित करने और बाद में नकद निकालने का भी आरोप है।
सीए, ऑडिटर की भूमिका भी जांच के दायरे में
एफआइआर में पार्टी के वित्तीय लेखे तैयार करने वाले मयूर सिंह राठौड़, ऑडिटर प्रणव शाह और आकाश सोनी तथा लेनदेन में भूमिका निभाने वाले दिनेशकुमार जैन के नाम भी शामिल हैं। पुलिस इनकी कथित भूमिका की जांच करेगी। मामले में भारतीय न्याय संहिता की आपराधिक षड्यंत्र, विश्वासघात, धोखाधड़ी और जालसाजी सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
एक महीने में पांचवीं एफआइआर
राजनीतिक दलों को मिले चंदे में कथित गड़बड़ी और कर चोरी के मामलों में एक महीने के भीतर गांधीनगर और अहमदाबाद जोन में यह पांचवीं एफआइआर है। इससे पहले दर्ज चार मामलों में कुल 680 करोड़ रुपए की कथित कर चोरी का आरोप लगाया गया था। सीआइडी क्राइम की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा इन मामलों की जांच कर रही है। वित्तीय लेनदेन की जांच के लिए दस्तावेजों का फोरेंसिक ऑडिट कराने की प्रक्रिया भी की जा रही है।

