कटनी जिले के बहोरीबंद बस स्टैंड पर गुरुवार को ओबीसी महासभा ने 27 प्रतिशत आरक्षण और जातिगत जनगणना की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। इसके बाद पदाधिकारियों ने एसडीएम कार्यालय पहुंचकर राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। महासभा ने ओबीसी आरक्षण से जुड़े हाईकोर्ट के 9 अक्टूबर 2026 के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की मांग भी की। आरक्षण कानून को 9वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग महासभा ने मांग की कि ओबीसी आरक्षण कानून को संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल किया जाए। संगठन का कहना है कि यदि 2019 का अध्यादेश त्रुटिपूर्ण है, तो सरकार नया विधायी प्रावधान तैयार करे। महासभा ने ओबीसी वर्ग के सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन के साथ सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व से जुड़े वैज्ञानिक आंकड़े जुटाने की मांग भी की। राकेश सिंह लोधी ने ओबीसी अधिकारों की रक्षा के लिए संवैधानिक कदम उठाने पर जोर दिया। 2019 से प्रभावित अभ्यर्थियों के अधिकारों की मांग महासभा ने 2019 से प्रभावित भर्ती परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी उपाय करने की मांग की। संगठन ने आरक्षण के मुद्दे पर सरकार से आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया। 2027 की जनगणना में ओबीसी का अलग कॉलम रखने की मांग ज्ञापन में 2027 की जनगणना में ओबीसी के लिए अलग कॉलम और जातिवार आंकड़े जुटाने की स्पष्ट व्यवस्था करने की मांग भी उठाई गई। राकेश सिंह लोधी ने बताया कि 30 अप्रैल 2025 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की राजनीतिक मामलों की समिति ने आगामी जनगणना में जातिवार गणना शामिल करने का निर्णय लिया था। उनके मुताबिक, 14 अगस्त 2026 को अधिसूचित जनगणना प्रश्नावली के प्रश्न संख्या 10 में एससी और एसटी का स्पष्ट उल्लेख है, लेकिन ओबीसी के लिए अलग श्रेणी और मानकीकृत सूची की स्पष्ट व्यवस्था नहीं दिखती। महासभा ने मांग की कि प्रश्नावली में सुधार कर ओबीसी के लिए अलग श्रेणी और जातिवार आंकड़े जुटाने की पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। संगठन का कहना है कि स्पष्ट व्यवस्था नहीं होने पर गणना की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।

