फर्जी FMGE सर्टिफिकेट से इंटर्नशिप करने वाले चार डॉक्टर गिरफ्तार:27-30 लाख रुपए देकर बनवाए प्रमाण पत्र, विदेश से MBBS करने के बाद FMGE परीक्षा पास नहीं कर पाए

फर्जी FMGE सर्टिफिकेट से इंटर्नशिप करने वाले चार डॉक्टर गिरफ्तार:27-30 लाख रुपए देकर बनवाए प्रमाण पत्र, विदेश से MBBS करने के बाद FMGE परीक्षा पास नहीं कर पाए

राजस्थान में फर्जी FMGE (फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन) प्रमाण पत्र बनवाकर मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप करने और राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में पंजीयन कराने के मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने विदेश से MBBS करने के बाद भारत में आयोजित FMGE स्क्रीनिंग परीक्षा कई बार दी, लेकिन सफल नहीं हो सके। इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर दलालों के माध्यम से 27 से 30 लाख रुपए तक देकर परीक्षा पास करने के फर्जी प्रमाण पत्र बनवाए। एडीजी एसओजी विशाल बंसल ने बताया कि इस मामले में SOG थाना जयपुर में 4 फरवरी को मुकदमा दर्ज किया गया था। इसमें जांच की जा रही है। राजस्थान में फर्जी FMGE (फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन) प्रमाण पत्र बनवाकर मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप करने और राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में पंजीयन कराने के मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों की पहचान भारत भूषण शर्मा (26) निवासी पुराने बस स्टैंड के पास, दाऊजी का मंदिर क्षेत्र, डीग, सौरव शर्मा (29) निवासी सीतारामजी के मंदिर के पास, वैर, जिला भरतपुर, हिमांशु शर्मा (26) निवासी गांधी चौक के पास, वार्ड नंबर 10, हलैना, जिला भरतपुर और शिवम चौधरी (28) निवासी मकान नंबर 419, सरकारी अस्पताल के पास, पहाड़ी, जिला डीग के रूप में हुई है। 27 से 30 लाख रुपए देकर बनवाया फर्जी सर्टिफिकेट भारत भूषण शर्मा: आईजी एसओजी अजयपाल लांबा ने बताया कि जांच के अनुसार, भारत भूषण ने किर्गिस्तान से MBBS की पढ़ाई की और साल 2022 में भारत लौटा। FMGE परीक्षा कई बार देने के बावजूद पास नहीं होने पर उसने दौसा निवासी शुभम गुर्जर के माध्यम से 30 लाख रुपए में फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया। इसके आधार पर उसने राजकीय मेडिकल कॉलेज दौसा में इंटर्नशिप की। शुभम गुर्जर इस मामले में पहले गिरफ्तार हो चुका है और ज्यूडिशल कस्टडी (जेल) में है। सौरव शर्मा: सौरव ने साल 2017 से 2023 तक रूस में MBBS की पढ़ाई की और 2023 में भारत लौटा। FMGE परीक्षा में सफल नहीं होने पर उसने वैर निवासी गजेंद्र के माध्यम से 27 लाख रुपए में फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया। इसके आधार पर राजकीय मेडिकल कॉलेज धौलपुर में इंटर्नशिप की और राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन के लिए आवेदन किया। हिमांशु शर्मा: हिमांशु ने भी साल 2017 से 2023 तक रूस में MBBS किया और 2023 में भारत लौटा। FMGE परीक्षा पास नहीं कर पाने पर उसने गजेंद्र के माध्यम से 27 लाख रुपए में फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया। इसके आधार पर महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज, जयपुर में इंटर्नशिप की और RMC में पंजीयन के लिए आवेदन किया। सौरव और हिमांशु आपस में मामा-बुआ के बेटे हैं। शिवम चौधरी: शिवम ने साल 2016 से 2021 तक कजाकिस्तान में MBBS की पढ़ाई की और 2021 में भारत लौटा। FMGE परीक्षा में सफल नहीं होने पर उसने कजाकिस्तान में हॉस्टल चलाने वाले और भारत से विदेश में MBBS कराने का काम करने वाले गजेंद्र के माध्यम से 30 लाख रुपए में फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया। इसके आधार पर राजकीय मेडिकल कॉलेज अलवर में इंटर्नशिप की और राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन के लिए आवेदन किया। 100 से अधिक विदेशी मेडिकल स्नातक जांच के घेरे में एडीजी एसओजी विशाल बंसल ने बताया कि जांच के दौरान ऐसे 100 से अधिक विदेशी मेडिकल स्नातकों को चिह्नित किया जा चुका है, जिन पर FMGE परीक्षा पास किए बिना फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर इंटर्नशिप या पंजीयन कराने का संदेह है। मामले में उन्होंने बताया कि राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा सहित कुल 33 लोगों की पूर्व गिरफ्तारी की जा चुकी है। पूर्व में गिरफ्तार लोगों में तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, UDC अखिलेश माथुर, LDC फरहान हसन, कथित मुख्य आरोपी भानाराम माली और अन्य आरोपी शामिल हैं। एसओजी के अनुसार, भानाराम माली, शुभम गुर्जर, इंद्रराज गुर्जर और अन्य लोगों पर फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करवाने और RMC में पंजीयन कराने के लिए प्रति व्यक्ति 20 से 30 लाख रुपए लेने का आरोप है। मेडिकल काउंसिल के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच जांच में आरोप सामने आए हैं कि फर्जी FMGE प्रमाण पत्रों के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में अस्थायी पंजीयन और राज्य के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप हासिल की गई। इस पूरे नेटवर्क में दलालों के साथ मेडिकल काउंसिल के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों की कथित मिलीभगत की भी जांच की जा रही है। SOG अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर प्रमाण पत्र तैयार करने वाले नेटवर्क, इसमें शामिल अन्य लोगों और पंजीयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। मामले में आगे की जांच जारी है।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *