छत्तीसगढ़ में परिवहन विभाग ने दो दिन पहले यात्री बसों के किराए में 1.75 रुपए से लेकर 3.30 रुपए प्रति किमी की बढ़ोतरी कर दी। निजी बस संचालकों द्वारा लंबे समय से किराया बढ़ाने की मांग की जा रही थी। बसों के यात्री किराए में इस बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर निम्न-मध्यम वर्ग के लोगों, दैनिक यात्रियों, छात्र-छात्राओं और श्रमिकों पर पड़ेगा, क्योंकि ये ही सार्वजनिक परिवहन सेवा का उपयोग ज्यादा करते हैं। इन पर ही किराया वृद्धि का सर्वाधिक असर इसलिए भी पड़ेगा, क्योंकि साधारण यात्री बसों के किराए को 1.25 रुपए प्रति किमी से बढ़ाकर 1.75 रुपए प्रति किमी कर दिया गया है यानी कि प्रति किलोमीटर पर 50 पैसे की वृद्धि की गई। देखने में तो 50 पैसे की ये बढ़ोतरी मामूली लगती है। लेकिन एक निम्न-मध्यम वर्ग के यात्री के रूप में इसे राजधानी रायपुर से प्रदेश के अन्य शहरों में सफर के रूप में देखें, तो अब भिलाई-दुर्ग का किराया 50-60 रुपए से बढ़कर 60-70 रुपए हो गया। इसी तरह से अब बिलासपुर जाने के लिए 133 की बजाय 228 रुपए, बेमेतरा 70 की बजाय 125, कोरबा 203 की बजाय 351, जशपुर 467 की बजाय 813 रुपए और जगदलपुर के लिए 300 रुपए की बजाय 521 रुपए बस किराया देना होगा। हालांकि यात्रीबस किराए में यह वृद्धि 5 वर्ष बाद की गई है और इस दौरान पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में भारी इजाफा भी हुआ है। फिर भी यह वृद्धि सत्तारूढ़ दल शासित अन्य राज्यों के मुकाबले ज्यादा की गई है। मध्यप्रदेश में बसों का किराया करीब 2 से 3.50 रुपए प्रति किमी, यूपी में 1.35 से 2.86 रुपए, राजस्थान में 0.95 से 2.10 रुपए और गुजरात में 0.95 से 2.70 रुपए प्रति किमी है। इतना ज्यादा किराया बढ़ाने से निजी वाहनों का उपयोग बढ़ सकता है, जिस वजह से सड़कों पर वाहनों की भीड़ बढ़ सकती है। यात्री बसों का किराया बढ़ाने के लिए सरकार को सिस्टम बनाना होगा। हर साल बजट में ही इसका प्रावधान किया जाना चाहिए, जिससे यात्रियों पर एकाएक आर्थिक भार न पड़े और बस संचालकों को भी नुकसान न हो।-अनुपम राजीव राजवैद्य anupam.rajiv@in.patrika.com

