कैमूर जिले स्थित भगवानपुर प्रखंड में मां मुंडेश्वरी देवी का ऐतिहासिक धाम शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। धरातल से लगभग 182 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस अष्टकोणीय प्राचीन मंदिर में दर्शन और पूजन के लिए प्रतिदिन लाखों की तादाद में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश, झारखंड समेत देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी भक्त मां के दर्शन हेतु यहां खिंचे चले आ रहे हैं। विश्व का ऐसा इकलौता मंदिर है जहां पर अहिंसक बली होता है पशुओं को काटा नहीं जाता है बल्कि मां के चरणों में पशु को लेटा कर अक्षत फूल मारने से पशु बेहोश हो जाता है और फिर अच्छत फूल मां का ध्यान कर पुजारी मारते हैं तो पशु उठ खड़ा होता है ऐसी बली की प्रथा पूरे विश्व में कहीं नहीं है। फूल छिड़ककर किया जाता बेहोश मंदिर के मुख्य पुजारी उमेश प्रसाद मिश्र ने बताया कि आश्विन मास की नवरात्रि में यहां भक्तों का विशाल मेला लगता है। मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से मन्नत मांगते हैं, उनकी मनोकामना जल्द पूरी होती है। इस मंदिर की सबसे अनूठी और ऐतिहासिक परंपरा यहां दी जाने वाली अहिंसक बलि है। मन्नत पूरी होने पर लाए जाने वाले बकरे को काटा नहीं जाता, बल्कि मंत्रोच्चार के साथ अक्षत और फूल छिड़ककर बेहोश किया जाता है और फिर उसी प्रक्रिया से उसे पुनर्जीवित कर छोड़ दिया जाता है। पैनी नजर रखने के लिए 45 सीसीटीवी सक्रिय पटना से आए श्रद्धालु राहुल कुमार ने बताया कि रक्तहीन बलि की यह दुर्लभ प्रथा पूरे देश में कहीं और देखने को नहीं मिलती। भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मंदिर न्यास समिति के लेखापाल गोपाल कृष्ण ने बताया कि मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा व सुरक्षा हेतु 23 मजिस्ट्रेट प्वाइंट बनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त 90 पुलिसकर्मी, 40 से 45 स्काउट गाइड और 70 अतिरिक्त वालंटियर तैनात हैं। पूरे परिसर पर पैनी नजर रखने के लिए 45 सीसीटीवी सक्रिय हैं, जिनकी निगरानी मंदिर प्रांगण, समिति कार्यालय और अतिथि भवन में बने विशेष कंट्रोल रूम से वरीय अधिकारियों द्वारा निरंतर की जा रही है। कैमूर जिले स्थित भगवानपुर प्रखंड में मां मुंडेश्वरी देवी का ऐतिहासिक धाम शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। धरातल से लगभग 182 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस अष्टकोणीय प्राचीन मंदिर में दर्शन और पूजन के लिए प्रतिदिन लाखों की तादाद में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश, झारखंड समेत देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी भक्त मां के दर्शन हेतु यहां खिंचे चले आ रहे हैं। विश्व का ऐसा इकलौता मंदिर है जहां पर अहिंसक बली होता है पशुओं को काटा नहीं जाता है बल्कि मां के चरणों में पशु को लेटा कर अक्षत फूल मारने से पशु बेहोश हो जाता है और फिर अच्छत फूल मां का ध्यान कर पुजारी मारते हैं तो पशु उठ खड़ा होता है ऐसी बली की प्रथा पूरे विश्व में कहीं नहीं है। फूल छिड़ककर किया जाता बेहोश मंदिर के मुख्य पुजारी उमेश प्रसाद मिश्र ने बताया कि आश्विन मास की नवरात्रि में यहां भक्तों का विशाल मेला लगता है। मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से मन्नत मांगते हैं, उनकी मनोकामना जल्द पूरी होती है। इस मंदिर की सबसे अनूठी और ऐतिहासिक परंपरा यहां दी जाने वाली अहिंसक बलि है। मन्नत पूरी होने पर लाए जाने वाले बकरे को काटा नहीं जाता, बल्कि मंत्रोच्चार के साथ अक्षत और फूल छिड़ककर बेहोश किया जाता है और फिर उसी प्रक्रिया से उसे पुनर्जीवित कर छोड़ दिया जाता है। पैनी नजर रखने के लिए 45 सीसीटीवी सक्रिय पटना से आए श्रद्धालु राहुल कुमार ने बताया कि रक्तहीन बलि की यह दुर्लभ प्रथा पूरे देश में कहीं और देखने को नहीं मिलती। भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मंदिर न्यास समिति के लेखापाल गोपाल कृष्ण ने बताया कि मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा व सुरक्षा हेतु 23 मजिस्ट्रेट प्वाइंट बनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त 90 पुलिसकर्मी, 40 से 45 स्काउट गाइड और 70 अतिरिक्त वालंटियर तैनात हैं। पूरे परिसर पर पैनी नजर रखने के लिए 45 सीसीटीवी सक्रिय हैं, जिनकी निगरानी मंदिर प्रांगण, समिति कार्यालय और अतिथि भवन में बने विशेष कंट्रोल रूम से वरीय अधिकारियों द्वारा निरंतर की जा रही है।

