राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) की ओर से सामुदायिक प्रबंधन प्रशिक्षण केंद्र (सीएमटीसी), झाड़ोली में एफएल-सीआरपी और वित्त सखियों की कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने, वित्तीय साक्षरता बढ़ाने और वित्तीय समावेशन की गतिविधियों को मजबूत बनाने पर चर्चा हुई। कार्यशाला का उद्देश्य वित्त सखियों और एफएल-सीआरपी की भूमिका को प्रभावी बनाकर महिलाओं को उपलब्ध वित्तीय सेवाओं का लाभ लेने के लिए जागरूक करना रहा। वित्तीय साक्षरता और बैंकिंग सेवाओं की जानकारी पर जोर कार्यशाला में वित्तीय साक्षरता, बैंकिंग सेवाओं की उपलब्धता और ग्रामीण महिलाओं को वित्तीय सुविधाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित करने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। प्रतिभागियों ने वित्तीय जागरूकता बढ़ाने के दौरान आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान पर भी चर्चा की। साथ ही, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं तक बैंकिंग सेवाओं की जानकारी पहुंचाने और उन्हें वित्तीय रूप से सक्षम बनाने में वित्त सखियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया। अधिकारियों ने बताया वित्तीय जागरूकता का महत्व कार्यशाला में आरजीबी के सीनियर मैनेजर गौरव और जितेंद्र, राजीविका के जिला प्रबंधक कार्तिक श्रंगी, ब्लॉक परियोजना प्रबंधक मनोज मीणा, प्रेम कुमार, प्राजंलि जाधव, निधि गोसाई, क्षेत्रीय समन्वयक मुकेश लोधा, परियोजना सहायक मनोज खत्री और धर्मेंद्र बेरवा मौजूद रहे। अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने वित्तीय साक्षरता के महत्व तथा ग्रामीण महिलाओं तक बैंकिंग सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। महिलाओं को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य राजीविका का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को वित्तीय रूप से जागरूक बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग करना है। कार्यशाला में वित्तीय समावेशन की गतिविधियों को प्रभावी बनाने और महिलाओं को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया, ताकि वे उपलब्ध वित्तीय सुविधाओं की जानकारी प्राप्त कर उनका लाभ उठा सकें।

