फिरोजाबाद में दो वर्ष पूर्व 13 वर्षीय किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाने, जबरन शादी करने और दुष्कर्म के मामले में न्यायालय ने मैनपुरी निवासी युवक को 20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। दोषी पर डेढ़ लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। वहीं, साक्ष्यों के अभाव में उसकी बहन को दोषमुक्त कर दिया गया। मामले की विवेचना में गंभीर लापरवाही मिलने पर न्यायालय ने एसएसपी को संबंधित विवेचक के खिलाफ जांच कराकर कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। मामला रसूलपुर थाना क्षेत्र के एक मोहल्ले का है। यहां रहने वाली 13 वर्षीय किशोरी को पड़ोस में रहने वाली महिला श्वेता का भाई देवेश बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था। आरोप है कि उसने किशोरी को कई दिन अपने घर पर रखने के बाद दुष्कर्म किया। 26 अक्टूबर 2024 को किशोरी के स्वजन ने रसूलपुर थाने में देवेश और उसकी बहन श्वेता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि देवेश उसे घिरोर ले गया, जहां जबरन शादी कर उसके साथ दुष्कर्म किया। विवेचक ने 24 नवंबर 2024 को दोनों आरोपितों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश, विशेष पॉक्सो न्यायालय संख्या तीन, निर्दोष कुमार के न्यायालय में हुई। बुधवार को न्यायालय ने देवेश को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कारावास और डेढ़ लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड जमा नहीं करने पर उसे एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अजमोद कुमार चौहान ने बताया कि अर्थदंड की धनराशि पीड़िता को दी जाएगी। न्यायालय ने विवेचना में कई गंभीर कमियां पाईं। पीड़िता की बरामदगी की फर्द और नक्शा तैयार नहीं किया गया था। पीड़िता और अभियुक्त के कपड़ों को कब्जे में लेने संबंधी फर्द भी नहीं बनाई गई। इसके अलावा, पीड़िता से घटना की तारीख, समय और स्थान के संबंध में भी पूछताछ नहीं की गई थी।न्यायालय ने इन कमियों को विवेचक की उदासीनता और अक्षमता का परिचायक माना। इस पर विवेचक अंकित आनंद के विरुद्ध जांच कर कार्रवाई करने के लिए एसएसपी को आदेश दिया गया है।

