बोकारो | नवरात्र के तीसरे दिन मंगलवार की रात गुरु गोबिंद सिंह एजुकेशनल सोसाइटी टेक्निकल कैंपस कांड्रा चास में भव्य गरबा, ग्लो एवं डांडिया नाइट का आयोजन किया गया। इसमें 550 से अधिक छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों और मनमोहक प्रस्तुतियों के बीच भारतीय संस्कृति के साथ गंगा-जमुनी तहजीब की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में जीजीएस प्रबंधन के अध्यक्ष तरसेम सिंह, सचिव सुरेंद्र पाल सिंह, समिति सदस्य गुरदीप सिंह एवं हरदीप सिंह और विशिष्ट अतिथि श्वेता रंजन उपस्थित रहीं। कॉलेज के निदेशक डॉ. प्रियदर्शी जरूहार ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक समन्वय और आपसी सौहार्द की भावना को मजबूत करते हैं। संचालन एडवोकेट पल्लवी प्रसाद ने किया, जबकि मंच संचालन बीबीए की छात्राओं साहिबा अकरम और रिया ने किया। समापन के बाद सभी ने चौपाटी स्टॉलों पर विभिन्न व्यंजनों का आनंद लिया। आयोजन ने उत्सवी माहौल के बीच सांस्कृतिक एकता और सद्भाव का संदेश दिया। सिटी रिपोर्टर | बोकारो नवरात्र शुरू होते ही बोकारो में भक्ति और उत्सव का रंग चढ़ने लगा है। शहर के विभिन्न इलाकों में मां दुर्गा की आराधना के साथ डांडिया की धूम देखने को मिल रही है। कहीं निजी संस्थाओं की ओर से डांडिया नाइट का आयोजन किया जा रहा है, तो कहीं सामाजिक संगठनों के सदस्य पारंपरिक नृत्य के जरिए नवरात्र का उत्साह साझा कर रहे हैं। गुजरात भवन में गुजराती समाज और लक्ष्मी नारायण मंदिर में मारवाड़ी समाज सहित कई समूहों की ओर से डांडिया नृत्य का आयोजन किया जा रहा है। इन आयोजनों में महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर शामिल हो रही हैं। रंग-बिरंगे लहंगे, चनिया-चोली, आकर्षक आभूषण और हाथों में डांडिया की छड़ियां लिए महिलाएं संगीत की धुन पर कदम से कदम मिलाकर नृत्य कर रही हैं। डांडिया की खनक और गरबा की लय से पूरा माहौल भक्तिमय बन रहा है। नवरात्र का पर्व शक्ति की उपासना और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। इसी दौरान गरबा और डांडिया नृत्य के जरिए मां शक्ति के प्रति श्रद्धा प्रकट करने की परंपरा भी निभाई जाती है। खासकर गुजरात में गरबा और डांडिया नवरात्र उत्सव का अभिन्न हिस्सा हैं। अब यह परंपरा देश के विभिन्न शहरों में लोकप्रिय हो चुकी है और बोकारो भी इससे अछूता नहीं है। बोकारो | नवरात्र के तीसरे दिन मंगलवार की रात गुरु गोबिंद सिंह एजुकेशनल सोसाइटी टेक्निकल कैंपस कांड्रा चास में भव्य गरबा, ग्लो एवं डांडिया नाइट का आयोजन किया गया। इसमें 550 से अधिक छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों और मनमोहक प्रस्तुतियों के बीच भारतीय संस्कृति के साथ गंगा-जमुनी तहजीब की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में जीजीएस प्रबंधन के अध्यक्ष तरसेम सिंह, सचिव सुरेंद्र पाल सिंह, समिति सदस्य गुरदीप सिंह एवं हरदीप सिंह और विशिष्ट अतिथि श्वेता रंजन उपस्थित रहीं। कॉलेज के निदेशक डॉ. प्रियदर्शी जरूहार ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक समन्वय और आपसी सौहार्द की भावना को मजबूत करते हैं। संचालन एडवोकेट पल्लवी प्रसाद ने किया, जबकि मंच संचालन बीबीए की छात्राओं साहिबा अकरम और रिया ने किया। समापन के बाद सभी ने चौपाटी स्टॉलों पर विभिन्न व्यंजनों का आनंद लिया। आयोजन ने उत्सवी माहौल के बीच सांस्कृतिक एकता और सद्भाव का संदेश दिया। सिटी रिपोर्टर | बोकारो नवरात्र शुरू होते ही बोकारो में भक्ति और उत्सव का रंग चढ़ने लगा है। शहर के विभिन्न इलाकों में मां दुर्गा की आराधना के साथ डांडिया की धूम देखने को मिल रही है। कहीं निजी संस्थाओं की ओर से डांडिया नाइट का आयोजन किया जा रहा है, तो कहीं सामाजिक संगठनों के सदस्य पारंपरिक नृत्य के जरिए नवरात्र का उत्साह साझा कर रहे हैं। गुजरात भवन में गुजराती समाज और लक्ष्मी नारायण मंदिर में मारवाड़ी समाज सहित कई समूहों की ओर से डांडिया नृत्य का आयोजन किया जा रहा है। इन आयोजनों में महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर शामिल हो रही हैं। रंग-बिरंगे लहंगे, चनिया-चोली, आकर्षक आभूषण और हाथों में डांडिया की छड़ियां लिए महिलाएं संगीत की धुन पर कदम से कदम मिलाकर नृत्य कर रही हैं। डांडिया की खनक और गरबा की लय से पूरा माहौल भक्तिमय बन रहा है। नवरात्र का पर्व शक्ति की उपासना और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। इसी दौरान गरबा और डांडिया नृत्य के जरिए मां शक्ति के प्रति श्रद्धा प्रकट करने की परंपरा भी निभाई जाती है। खासकर गुजरात में गरबा और डांडिया नवरात्र उत्सव का अभिन्न हिस्सा हैं। अब यह परंपरा देश के विभिन्न शहरों में लोकप्रिय हो चुकी है और बोकारो भी इससे अछूता नहीं है।

