स्टेशनों पर शिकायतों का डाटा रखेगा एआई,:मौके पर जांच के बाद ही बंद होगी शिकायत, रेवाड़ी-नारनौल से होगी शुरूआत

स्टेशनों पर शिकायतों का डाटा रखेगा एआई,:मौके पर जांच के बाद ही बंद होगी शिकायत, रेवाड़ी-नारनौल से होगी शुरूआत

रेलवे स्टेशनों पर सफाई, पेयजल, लाइट और यात्री सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों के समाधान में देरी अब संबंधित अधिकारियों के लिए परेशानी बन सकती है। उत्तर पश्चिम रेलवे के जयपुर मंडल ने इसके लिए एआई आधारित ‘सारथी’ पोर्टल विकसित किया है। सारथी इंटेलिजेंस मॉड्यूल जोखिम वाले क्षेत्रों, बार-बार आने वाली समस्याओं और समाधान में देरी के पैटर्न की पहचान करेगा। इससे कमियों के दोहराव को रोकने के लिए पहले से रखरखाव की योजना बनाई जा सकेगी और स्थायी समाधान पर जोर रहेगा। इसमें शिकायत दर्ज होने से लेकर समाधान तक की पूरी प्रक्रिया का डाटा रखा जाएगा। पोर्टल पर शिकायत दर्ज होने के बाद उसकी ट्रैकिंग शुरू होगी। समाधान के लिए समय सीमा तय की जाएगी। तय समय में काम पूरा नहीं होने पर मामला स्वचालित रूप से उच्च अधिकारियों तक पहुंचेगा और संबंधित अधिकारियों को मोबाइल अलर्ट मिलेगा। समाधान का मौके पर सत्यापन होने के बाद ही शिकायत बंद होगी। पहली बार में समाधान स्वीकार होने के बाद ही शिकायत बंद मानी जाएगी। इससे सफाई, पेयजल, लाइट और अन्य यात्री सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं के वास्तविक समाधान पर जोर रहेगा। रेवाड़ी-नारनौल से होगी शुरूआत शुरुआती चरण में रेवाड़ी और नारनौल रेलवे स्टेशनों पर यह व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके बाद जयपुर मंडल के अंतर्गत आने वाले हरियाणा के अन्य स्टेशनों पर भी इसे शुरू करने की योजना है। इससे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं की निगरानी और समाधान की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी। इसके बाद जयपुर मंडल के अंतर्गत आने वाले हरियाणा के बावल, करनावास, अनाजमंडी, खोरी, पाली, कुंड, अटेली, मिर्जापुर बाछौद, अमरपुर जौरासी और निजामपुर सहित अन्य स्टेशनों पर भी इसे लागू करने की योजना है। बार-बार की शिकायतों का कारण भी तलाशेगा एआई ‘सारथी’ यानी स्टेशन एमीनिटीज एक्शन, रिड्रेसल, ट्रैकिंग एंड हैंडलिंग इंटरफेस पोर्टल में शिकायतों की निगरानी के साथ एआई और डाटा एनालिटिक्स आधारित ‘सारथी इंटेलिजेंस’ मॉड्यूल भी होगा। यह उपलब्ध डाटा का विश्लेषण कर पता लगाएगा कि किस स्टेशन या विभाग में बार-बार समस्याएं आ रही हैं और किन मामलों में समाधान में देरी हो रही है। इससे केवल शिकायत आने के बाद मरम्मत करने के बजाय पहले से रखरखाव की योजना बनाकर कमियों को दूर करने में मदद मिलेगी। पोर्टल के माध्यम से लंबित शिकायतों, समाधान में विफलता और अलग-अलग स्टेशनों व विभागों में देरी के पैटर्न की पहचान की जा सकेगी। शिकायत का समाधान होने के बाद उसकी गुणवत्ता की जांच भी की जाएगी। शिकायत दर्ज कराने वाले पर्यवेक्षक द्वारा मौके पर सत्यापन और पहली बार में समाधान स्वीकार किए जाने के बाद ही मामला बंद माना जाएगा। जयपुर मंडल के अधिकारी ने इन-हाउस विकसित किया पोर्टल जयपुर मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक भूपेश यादव के अनुसार, यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने और स्टेशन स्तर पर समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से यह डिजिटल पहल की गई है। मंडल रेल प्रबंधक रवि जैन के मार्गदर्शन में मंडल कार्मिक अधिकारी अनुराग गुप्ता ने इस पोर्टल को रेलवे के भीतर ही डिजाइन और विकसित किया है। गुप्ता भारतीय रेल कार्मिक सेवा के 2019 बैच के अधिकारी हैं और आईआईटी बॉम्बे से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक हैं।

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