मोतिहारी-दुबई कनेक्शन वाला साइबर गिरोह पकड़ा गया, 9 अरेस्ट:56 करोड़ उड़ाने की थी तैयारी, नेट बैंकिंग-क्रिप्टोकरेंसी से ठगी का खेल

मोतिहारी-दुबई कनेक्शन वाला साइबर गिरोह पकड़ा गया, 9 अरेस्ट:56 करोड़ उड़ाने की थी तैयारी, नेट बैंकिंग-क्रिप्टोकरेंसी से ठगी का खेल

मोतिहारी साइबर थाना पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोह का खुलासा करते हुए नौ सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरोह की नजर करीब 56 करोड़ रुपये वाले एक कॉरपोरेट बैंक खाते पर थी। इस रकम को 12 अक्टूबर 2026 की रात ट्रांसफर करने की योजना बनाई गई थी। पुलिस ने पकड़ीदयाल थाना क्षेत्र में छापेमारी कर आरोपितों को गिरफ्तार किया। इनके पास से लैपटॉप समेत कई संदिग्ध सामान बरामद किए गए हैं। बैंक खातों की गोपनीय जानकारी जुटाता था गिरोह प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह अज्ञात बैंककर्मियों के जरिए कॉरपोरेट बैंक खातों की गोपनीय जानकारी हासिल करता था। इसमें खाताधारक का नाम, यूजर आईडी, मोबाइल नंबर और खाते में उपलब्ध बैलेंस जैसी जानकारियां शामिल थीं। इसके बाद ओटीपी के माध्यम से मोबाइल तक पहुंच बनाकर नेट बैंकिंग के जरिए खातों से रकम ट्रांसफर करने की साजिश रची जाती थी। दुबई में बैठे अपराधियों से जुड़ा था नेटवर्क पुलिस के मुताबिक, गिरोह के तार दुबई में बैठे साइबर अपराधियों से जुड़े थे। खातों से ट्रांसफर की गई रकम का 30 प्रतिशत हिस्सा काटने के बाद शेष राशि क्रिप्टोकरेंसी (USDT) के माध्यम से मंगाई जाती थी। बाद में इस रकम को नकद में बदलने की योजना थी। पुलिस अब गिरोह के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। 56 करोड़ रुपये वाले खाते पर थी नजर जांच के दौरान Camp System Private Limited के बैंक खाते से संबंधित जानकारी मिलने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, इस खाते में करीब 56 करोड़ रुपये थे। गिरोह की योजना 12 अक्टूबर की रात इस रकम को ट्रांसफर करने की थी। समय रहते कार्रवाई होने से कथित साजिश का खुलासा हुआ। हालांकि, खाते से वास्तव में कितनी रकम सुरक्षित रही और किसी तरह का लेनदेन हुआ या नहीं, इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। लैपटॉप से मिले पोर्टल और बैंक लॉगिन से जुड़े इनपुट छापेमारी के दौरान पुलिस को लैपटॉप में पोर्टल और बैंक लॉगिन से संबंधित जानकारी मिली है। बरामद सामान की जांच की जा रही है। मामले में मोतिहारी साइबर थाना में केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों, बैंक खातों की जानकारी उपलब्ध कराने वालों और दुबई में बैठे कथित अपराधियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। मोतिहारी साइबर थाना पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोह का खुलासा करते हुए नौ सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरोह की नजर करीब 56 करोड़ रुपये वाले एक कॉरपोरेट बैंक खाते पर थी। इस रकम को 12 अक्टूबर 2026 की रात ट्रांसफर करने की योजना बनाई गई थी। पुलिस ने पकड़ीदयाल थाना क्षेत्र में छापेमारी कर आरोपितों को गिरफ्तार किया। इनके पास से लैपटॉप समेत कई संदिग्ध सामान बरामद किए गए हैं। बैंक खातों की गोपनीय जानकारी जुटाता था गिरोह प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह अज्ञात बैंककर्मियों के जरिए कॉरपोरेट बैंक खातों की गोपनीय जानकारी हासिल करता था। इसमें खाताधारक का नाम, यूजर आईडी, मोबाइल नंबर और खाते में उपलब्ध बैलेंस जैसी जानकारियां शामिल थीं। इसके बाद ओटीपी के माध्यम से मोबाइल तक पहुंच बनाकर नेट बैंकिंग के जरिए खातों से रकम ट्रांसफर करने की साजिश रची जाती थी। दुबई में बैठे अपराधियों से जुड़ा था नेटवर्क पुलिस के मुताबिक, गिरोह के तार दुबई में बैठे साइबर अपराधियों से जुड़े थे। खातों से ट्रांसफर की गई रकम का 30 प्रतिशत हिस्सा काटने के बाद शेष राशि क्रिप्टोकरेंसी (USDT) के माध्यम से मंगाई जाती थी। बाद में इस रकम को नकद में बदलने की योजना थी। पुलिस अब गिरोह के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। 56 करोड़ रुपये वाले खाते पर थी नजर जांच के दौरान Camp System Private Limited के बैंक खाते से संबंधित जानकारी मिलने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, इस खाते में करीब 56 करोड़ रुपये थे। गिरोह की योजना 12 अक्टूबर की रात इस रकम को ट्रांसफर करने की थी। समय रहते कार्रवाई होने से कथित साजिश का खुलासा हुआ। हालांकि, खाते से वास्तव में कितनी रकम सुरक्षित रही और किसी तरह का लेनदेन हुआ या नहीं, इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। लैपटॉप से मिले पोर्टल और बैंक लॉगिन से जुड़े इनपुट छापेमारी के दौरान पुलिस को लैपटॉप में पोर्टल और बैंक लॉगिन से संबंधित जानकारी मिली है। बरामद सामान की जांच की जा रही है। मामले में मोतिहारी साइबर थाना में केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों, बैंक खातों की जानकारी उपलब्ध कराने वालों और दुबई में बैठे कथित अपराधियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।  

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