फर्जी दस्तावेज बनाकर 10 लाख में बेची कार:सोनीपत कोर्ट ने आरोपी को नहीं दी अग्रिम जमानत; कहा- पुलिस हिरासत में पूछताछ जरूरी

फर्जी दस्तावेज बनाकर 10 लाख में बेची कार:सोनीपत कोर्ट ने आरोपी को नहीं दी अग्रिम जमानत; कहा- पुलिस हिरासत में पूछताछ जरूरी

फर्जी दस्तावेज तैयार कर कार बेचने और अमानत में खयानत से जुड़े धोखाधड़ी के मामले में सोनीपत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ADJ) सुभाष चंद्र की कोर्ट ने मामले में नामजद आरोपी अजय उर्फ मोनू निवासी सलेमसर माजरा, सोनीपत की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने धोखाधड़ी की साजिश, विदेश में रह रहे व्यक्ति के आधार/पैन कार्ड का गलत इस्तेमाल और पुलिस द्वारा कस्टोडियल पूछताछ की आवश्यकता को देखते हुए राहत देने से इनकार कर दिया। जाने क्या था पूरा मामला? यह मामला थाना सिटी गोहाना में दर्ज एफआईआर संख्या 511 (30 अक्टूबर 2023) से संबंधित है। गद्दी खेड़ी (रोहतक) निवासी प्रीतम ने पुलिस को शिकायत दी थी कि उसने आरोपी रोहित से वर्ना कार (HR-14T-1003) ₹10,00,000 में खरीदी थी और ₹5,00,000 नकद दिए थे। मई 2023 में जब उसके साथी कार लेकर चंडीगढ़ जा रहे थे, तो आरोपी जयदीप उर्फ जेडी ने 12 अन्य लोगों के साथ पानीपत टोल प्लाजा पर बंदूक की नोक पर उनसे गाड़ी छीन ली। पुलिस ने शिकायत पर आईपीसी की धारा 420, 406, 467, 471 और 34 के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। EOW जांच में खुलासा: पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) सोनीपत द्वारा की गई जांच में पाया गया कि आरोपी अजय उर्फ मोनू ने अपने अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची। आरोपियों ने विदेश (कनाडा में रह रहे) अमन के भाई अंकित के आधार कार्ड और पैन कार्ड का दुरुपयोग करके किराए पर फॉर्च्यूनर गाड़ी (PB-02DB-9812) ली और फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसे भी धोखाधड़ी से बेच दिया। कोर्ट में पक्षों की दलीलें बचाव पक्ष का तर्क: आरोपी के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को मामले में झूठा फंसाया गया है और उसकी कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि आरोपी पुलिस जांच में शामिल होने के लिए तैयार है और उससे कोई रिकवरी नहीं की जानी है, इसलिए उसे अग्रिम जमानत दी जाए। सरकारी पक्ष का विरोध: लोक अभियोजक (Public Prosecutor) ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि आरोपी एफआईआर में नामजद है और उस पर लगे आरोप बेहद गंभीर प्रकृति के हैं। मामले की पूरी सच्चाई सामने लाने और गहन पूछताछ के लिए आरोपी को कस्टडी में लेकर पूछताछ करना अनिवार्य है। कोर्ट ने ये सुनाया फैसला सोनीपत में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुभाष चंद्र ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस फाइल का गहनता से अवलोकन करने के बाद माना कि आरोपी पर सह-आरोपियों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रचने, दूसरे व्यक्ति के आधार-पैन कार्ड का गलत इस्तेमाल करने और फर्जी दस्तावेज तैयार कर गाड़ियां बेचने के गंभीर आरोप हैं। मामले की प्रकृति को देखते हुए आरोपी से हिरासत में पूछताछ की सख्त जरूरत है। कोर्ट ने केस के गुणों-दोषों पर कोई अंतिम टिप्पणी किए बिना आरोपी अजय उर्फ मोनू की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया।

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