नमस्कार, विधायकजी पर भरोसा करके नेताजी ने मां के लिए टिकट मांगा। बड़ी आस थी लेकिन टिकट कट गया। बेटा फूट-फूटकर रो पड़ा। फसल बीमा क्लेम घपले का फरार आरोपी पत्नी का नामांकन भरवा कर हंसते-हंसते फरार हो गया। ट्रेन में पुलिस की घनघोर बेइज्जती हो गई और राजस्थानी गाने ने धूम मचा दी। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. रोकर बोला बेटा-विधायकजी ने काटा मां का टिकट उनका नाम विजय है। हालांकि वे आगे दीनानाथ चौहान नहीं लगाते। फिर भी मां के लिए उनका प्यार उतना ही प्रबल, जितना दीवार के विजय वर्मा का था। वे जिला परिषद सदस्य। मां पूर्व प्रधान। इलाके के विधायक मान्यवर महेंद्रपाल से नजदीकी। इतना होने के बावजूद वे माताजी के जिला परिषद सदस्य के टिकट के लिए विधायकजी के आवास पर गए। झुककर नमस्कार किया। एप्लीकेशन दी। आश्वासन मिला। पार्टी की ओर से सकारात्मक फोन भी आ गया। लेकिन फिर किसी राजनीतिक मंथरा ने कान भर दिए कि श्रीमान विजय इलाके में होने वाले आंदोलन, धरना-प्रदर्शन, विरोध कार्यक्रम में शिरकत करते हैं। जैसा कि महोदय विजय को शक है कि बेटे ने जुल्म के खिलाफ आवाज उठाई तो उसकी सजा बेकसूर मां को दे दी गई। जिन विधायकजी की शान में विजय ने अपने इंस्टाग्राम की दर्जनों रीलें खपाई। उन्हीं पर टिकट काटने का प्राथमिक संदेह है। यह बात सोचकर उनका जी भर आया। आंखों से सैलाब उमड़ पड़ा। वे फेसबुक नामक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गए और लाइव करते हुए रो पड़े।
फेसबुक पर रो-रोकर उन्होंने बुक का हर पेज गीला कर दिया। अपनी बात इस ढंग से कही कि लोग सारी सिम्पैथी झाड़-बुहार कर उनकी झोली में डाल दें। बातों-बातों में उन्होंने खुदको जन-मसीहा भी घोषित कर दिया। माता को राजमाता बनाने के लिए पुत्र विजय ने रुदन पर जिस प्रकार पूरा जोर लगाया। उतना ही जोर अब वे चुनाव में लगाने की इच्छा रखते हैं। टिकट मिला तो ठीक, वरना लगता है कि वे मैदान में डंटे रहेंगे। बाकी काम माताजी संभाल लेंगी। 2. घपले का आरोपी भर गया पत्नी का नामांकन राजनीति वह वैतरणी है जिसमें डुबकी लगाने के बाद अच्छे-अच्छों के पाप धुल जाते हैं और क्लीनचिट मिल जाती है। नागौर के एक वकील महोदय पर आरोप है कि उन्होंने 2021 में फसल बीमा के फर्जी क्लेम के जरिए बड़ी धन राशि का गबन किया। वकील बीरबल राम कमेडिया के खिलाफ मामला दर्ज भी हो गया। उनकी पत्नी समेत 4 लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज हुआ। घपले का मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने उन्हें फरार घोषित कर दिया। पांच वर्षों से वे गांव में ही फरार चल रहे हैं। चुनावी मौसम में वकील साहब ने सोचा कि किसी प्रकार राजनीति में एंट्री ले ली जाए तो कुछ चीजें आसान हो जाएंगी। सुविचार मन में आते ही उन्होंने पत्नी का जिला परिषद सदस्य का नामांकन भरने का मन बना लिया। वे नामांकन फॉर्म लेकर स्कूटी पर सवार हुए और जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंच गए। वहां फॉर्म भरने की तमाम कार्रवाई की। इस दौरान एक शुभचिंतक ने उनका वीडियो बना लिया और हंसते-हंसते पोल खोल दी। कहा- फसल बीमा क्लेम घपले में वकील साहब फरार चल रहे हैं। अब पत्नी का नामांकन भरने आए हैं। वकील साहब बात पर हंसने लगे। इसके बाद तेज कदमों से पार्किंग की तरफ बढ़ गए। वहां पुलिस कर्मियों के बीच से स्कूटी निकालते हुए फरार हो गए। मामले को लेकर सर्कल ऑफिसर साहब का कहना है- मामले की जांच चल रही है। 3. बेटिकट पुलिस को खास नसीहत टिकट किसे नहीं चाहिए। हर किसी को टिकट चाहिए। टिकट के लिए क्या जतन नहीं किए जा रहे। जिसको टिकट मिल रहा है उसकी खुशी का ठिकाना नहीं, जिसे नहीं मिल रहा, उसका रो-रोकर बुरा हाल है। ऐसा सीजन में जिसमें येन-केन-प्रकारेण टिकट ही चाहिए, उसमें सिर्फ पुलिस ही है जिसे टिकट नहीं चाहिए। पुलिस को ट्रेन का टिकट नहीं चाहिए। कभी बस का टिकट नहीं चाहिए। कभी पार्किंग का टिकट नहीं चाहिए। कभी सिनेमा का टिकट नहीं चाहिए। हालांकि रिटायरमेंट के बाद कई पुलिसकर्मी ऐसे भी होते हैं जो चाहते हैं कि कोई पार्टी उनके लिए टिकट लेकर आए और गले में माला डालकर किसी चुनाव में खड़ा कर दे। खैर, श्रीगंगानगर से एक मुजरिम को लेकर पुलिस रेलवे स्टेशन की तरफ बढ़ी। संभवत: मुजरिम की सहूलियत के लिए AC में रिजर्वेशन कराया। मुजरिम साथ नहीं होता तो शायद जनरल में आते। जैसा कि पुलिस की आदत है मौके पर लेट पहुंचना। तो रेलवे स्टेशन पर भी पुलिस आदत अनुसार पहुंची। पता चला कि ट्रेन तो निकल गई। ट्रेन निकलने की घटना से पुलिसवालों को कोई खास फर्क नहीं पड़ा। क्योंकि एसी का टिकट हाथ में था ही, इस ट्रेन में न सही तो उस ट्रेन में चढ़ जाएंगे। यही सोचकर 7 पुलिसवाले 1 मुजरिम को लेकर दूसरी ट्रेन में चढ़े और AC कोच में बैठ गए। जयपुर में उनकी चेकिंग हुई। मामले का पता चला तो टिकट कलेक्टर ने GRP पुलिस को बुला लिया। GRP पुलिस का अधिकारी भी लाजवाब। पुलिसवालों का ‘ट्रेन मिस हो गई तो दूसरी में चढ़ गए’ तर्क सुनकर बोले- तुम्हारी बीवी मिस हो जाएगी तो दूसरे की लेकर चले जाओगे क्या? इस अकाट्य तर्क का जवाब पुलिसकर्मियों के पास नहीं था। मुजरिम के पास हो सकता था, लेकिन वह चुप रहा। मामले की शिकायत ऊपर तक हो गई थी। दौसा में पुलिसवाले उतरे तो जीआरपी के अधिकारी ने रोक लिया। बहसबाजी के बाद उसने पुलिसवालों को जाने दिया लेकिन फिर वहीं टीटीई उछल पड़ा। बोला- अगर मुजरिम भाग जाता तो किसकी जिम्मेदारी होती? 4. चलते-चलते.. राजस्थानी संगीत की मिठास के क्या कहने। राजस्थान के श्रीगंगानगर के सिंगर मनदीप सिंह ने एक गीत गाया। गीत राजस्थानी भाषा में है। बोल हैं- कांच केरी चिमनी। राजस्थान में ही नहीं बल्कि ये गीत देश-विदेश में तेजी से लोकप्रिय हुआ। मनदीप सिंह रातोंरात स्टार बन गए। लोग उन्हें पहचानने लगे। बीकानेर में उनका प्रोग्राम हुआ। सिर पर पगड़ी देख लोगों ने मनदीप को पंजाबी सिंगर समझ लिया। मनदीप की आवाज में राजस्थानी गाना सुनकर लोग खुश हुए। मनदीप ने कहा कि मैं राजस्थान का ही हूं। पड़ोसी जिला श्रीगंगानगर मेरा घर है। राजस्थानी बोली के समर्थन में वीडियो बनाने वाले राजवीर सिंह चलकोई ने भी गाने और मनदीप की काफी तारीफ की। उन्होंने कहा कि आज का यूथ राजस्थानी के पुराने गानों से रिलेट नहीं कर पाता। जबकि पुराने लोगों को आज की थीम के राजस्थानी गाने पसंद नहीं आते। ये ऐसा गीत है जिसमें चिमनी का भी जिक्र है और आईफोन का भी। यही वजह है कि यह हर वर्ग को पसंद आ रहा है। गाने के कई वर्जन सामने आ चुके हैं। सोशल मीडिया पर एआई डांस मूव्स भी बनाकर डाले जा रहे हैं। इनपुट सहयोग- प्रकाश तंवर (नागौर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।

