बिजली का गलत बिल बनाने और बिल संशोधन में गड़बड़ी करने वाले कर्मचारियों की अब जवाबदेही तय होगी। वितरण निगमों के प्रबंध निदेशकों (एमडी) को हर सप्ताह 7 से 10 उपभोक्ताओं के बिजली बिलों की रैंडम जांच करनी होगी। बिल रिवीजन में अनियमितता मिलने पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह निर्देश प्रमुख सचिव ऊर्जा एवं यूपी पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष रणवीर प्रसाद ने मंगलवार को शक्ति भवन में आयोजित साप्ताहिक समीक्षा बैठक में दिए। बैठक में बिजली राजस्व की स्थिति, लाइन हानि, बिलिंग व्यवस्था, स्मार्ट मीटर स्थापना, ट्रांसफॉर्मरों की क्षतिग्रस्तता और विभिन्न योजनाओं के कामकाज की समीक्षा की गई। अध्यक्ष ने वितरण निगमों को राजस्व बढ़ाने, बिजली चोरी और लाइन हानि कम करने तथा उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं देने के लिए तय लक्ष्यों के अनुरूप काम करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी। पांच रुपए से कम थ्रू रेट वाले फीडरों पर फोकस वित्तीय वर्ष 2026-27 में राजस्व प्राप्ति और केवाईपी (KYP) अभियान की समीक्षा के दौरान अध्यक्ष ने संग्रह में सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने पांच रुपए से कम थ्रू रेट वाले फीडरों की विशेष समीक्षा करने और सबसे ज्यादा लाइन हानि वाले 10 फीडरों को प्राथमिकता के आधार पर सुधारने को कहा। थ्रू रेट बिजली वितरण से प्राप्त राजस्व की स्थिति का एक प्रमुख संकेतक है। अध्यक्ष ने निर्देश दिए कि वितरण निगम राजस्व में कमी वाले क्षेत्रों की पहचान करें और वहां सुधार के लिए ठोस कार्ययोजना बनाएं। अधीक्षण अभियंताओं के साथ नियमित बैठक कर थ्रू रेट बढ़ाने के उपायों और क्षेत्रवार प्रगति की समीक्षा भी की जाए। गलत बिल ठीक करने के लिए चलेगा विशेष अभियान रणवीर प्रसाद ने कहा कि उपभोक्ताओं को सही और समय पर बिजली बिल मिलना चाहिए। गलत बिलों को तत्काल ठीक करने और बिलिंग संबंधी शिकायतों का तय समय में निस्तारण करने के निर्देश दिए गए। बिल संशोधन के लंबित मामलों को निपटाने के लिए विशेष अभियान चलाने को भी कहा गया। उन्होंने निर्देश दिया कि बिलिंग व्यवस्था ऐसी बनाई जाए, जिससे उपभोक्ताओं को पहली बार में ही सही बिल मिले और बार-बार संशोधन की जरूरत न पड़े। बिल रिवीजन की प्रक्रिया में अनियमितता मिलने पर संबंधित कर्मचारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी। ट्रांसफॉर्मर की सुरक्षा पर जोर, फ्यूज लगाने का काम तेज होगा बैठक में वितरण और पावर ट्रांसफॉर्मरों के खराब होने की स्थिति की भी समीक्षा की गई। अध्यक्ष ने ट्रांसफॉर्मरों की क्षतिग्रस्तता कम करने के लिए तकनीकी और प्रबंधकीय उपाय करने को कहा। 100 केवीए से कम क्षमता वाले ट्रांसफॉर्मरों पर फ्यूज सेट लगाने का काम तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए, ताकि बिजली वितरण व्यवस्था की सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ाई जा सके। बिजनेस प्लान 2024-25, 2025-26 और 2026-27 के तहत स्वीकृत कार्यों की भी समीक्षा हुई। अध्यक्ष ने अधूरे कार्यों को पूरा करने के साथ मेजरमेंट बुक (एमबी), ईआरपी क्लोजर और अंतिम भुगतान से जुड़े मामलों का नियमानुसार शीघ्र निस्तारण करने को कहा। सहारनपुर का थ्रू रेट 1.71 रुपए, मुरादाबाद में कम राजस्व पर नाराजगी क्षेत्रवार समीक्षा के दौरान सहारनपुर में थ्रू रेट 1.71 रुपए होने पर अध्यक्ष ने असंतोष जताया और सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए। मुरादाबाद में राजस्व प्राप्ति कम होने पर भी नाराजगी जताई गई। संबंधित अधिकारियों को राजस्व संग्रह बढ़ाने के लिए प्रभावी प्रयास करने को कहा गया। बड़े बकायेदारों के बिल जांचें, नोटिस के बाद कटेगा कनेक्शन बकाया राजस्व की समीक्षा के दौरान अध्यक्ष ने ग्रामीण क्षेत्रों के बकायेदार उपभोक्ताओं के संबंध में ग्राम प्रधानों को पत्र भेजकर जानकारी देने के निर्देश दिए। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर बकाया वसूली के लिए समन्वय बढ़ाना है। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के गोला और नवाबगंज, गोंडा क्षेत्रों में बिजली बिलों की जांच करने और बड़े बकायेदारों के मामलों की विशेष समीक्षा करने को कहा गया। अधिकारियों को 10 बड़े बकायेदारों को चिह्नित कर उनके बिलों की जांच करने, नियमानुसार नोटिस जारी करने, संपर्क करने और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बिजली कनेक्शन काटने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। बैठक में यूपी पावर कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक नितीश कुमार समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी वितरण निगमों के एमडी और संबंधित अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े।

