Illegal Construction: महाराष्ट्र में घर या फ्लैट खरीदने की योजना बना रहे हैं तो सावधान हो जाइए। राज्य सरकार ने नियमों के खिलाफ बनी इमारतों और फ्लैटों से जुड़े दस्तावेजों की रजिस्ट्री पर रोक लगाने का फैसला किया है। इस कदम का मकसद अवैध निर्माण और प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री में होने वाली धोखाधड़ी को रोकना है। नए नियम के तहत मंजूर नक्शे के खिलाफ बने फ्लैटों के कुछ जरूरी दस्तावेजों का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाएगा।
मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के कार्यालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, यह रोक तत्काल प्रभाव से लागू की गई है। इसका मतलब है कि नियमों के खिलाफ बने फ्लैट खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों को अब ज्यादा सावधानी बरतनी होगी। हालांकि, रोक का सही दायरा समझने के लिए सरकारी आदेश की शर्तों को देखना जरूरी है।
किन फ्लैटों की रजिस्ट्री पर लगेगी रोक?
महाराष्ट्र सरकार के मुताबिक, नियमों का उल्लंघन करके बनाए गए फ्लैटों की पहली बिक्री के समझौते, खरीद-बिक्री के दस्तावेज, अपार्टमेंट डीड और फ्लैट को दूसरे व्यक्ति के नाम करने से जुड़े कागजात का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाएगा।
यह रोक सिर्फ उन इमारतों पर लागू नहीं होगी, जो पूरी तरह अवैध तरीके से बनाई गई हैं। जिन इमारतों में मंजूर नक्शे से ज्यादा निर्माण किया गया है, उनके फ्लैट भी इसके दायरे में आ सकते हैं।
उदाहरण के लिए, अगर बिल्डर को किसी इमारत में तय मंजिलें बनाने की अनुमति मिली है, लेकिन उसने नियमों के खिलाफ अतिरिक्त मंजिल बना दी, तो वहां बने फ्लैटों की रजिस्ट्री में परेशानी आ सकती है। ऐसे में खरीदार को बाद में कानूनी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
फ्लैट खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
अक्सर लोग घर खरीदते समय उसकी कीमत, जगह, आसपास की सुविधाओं और लोन की शर्तों पर ध्यान देते हैं। लेकिन अब यह जांचना भी जरूरी है कि इमारत का निर्माण सरकारी मंजूरी के मुताबिक हुआ है या नहीं।
फ्लैट की बुकिंग करने या बड़ी रकम देने से पहले बिल्डर से मंजूर नक्शा और निर्माण से जुड़े जरूरी दस्तावेज मांगें। यह भी पता करें कि इमारत में जितना निर्माण हुआ है, उतनी ही मंजूरी मिली हुई है या नहीं। किसी तरह का संदेह होने पर संबंधित सरकारी कार्यालय या कानूनी जानकार से सलाह लें।
बिल्डरों के लिए भी बढ़ सकती है मुश्किल
सरकार के इस कदम से उन बिल्डरों पर दबाव बढ़ सकता है, जो मंजूर नक्शे से हटकर निर्माण करते हैं और बाद में फ्लैट बेच देते हैं। ऐसे मामलों में खरीदार पैसा लगाने के बाद फंस सकते हैं, क्योंकि रजिस्ट्री नहीं होने पर संपत्ति का सौदा पूरा करना मुश्किल हो सकता है।
इस फैसले का मकसद खरीदारों को ऐसी परेशानियों से बचाना है। फिर भी, हर फ्लैट पर रोक लागू है या नहीं, यह उसकी निर्माण स्थिति और सरकारी आदेश की शर्तों पर निर्भर करेगा। इसलिए घर खरीदने से पहले केवल बिल्डर के वादों पर भरोसा करने के बजाय दस्तावेजों की जांच जरूर करें।

