ग्वालियर के बालक, इंदौर की बालिकाएं अव्वल:पांच दिन तक 10 संभागों के खिलाड़ियों ने दिखाया दम, अर्णव-स्तुति को व्यक्तिगत सम्मान

ग्वालियर के बालक, इंदौर की बालिकाएं अव्वल:पांच दिन तक 10 संभागों के खिलाड़ियों ने दिखाया दम, अर्णव-स्तुति को व्यक्तिगत सम्मान

शिवपुरी में 7 अक्टूबर से शुरू हुई 70वीं राज्य स्तरीय 17 वर्षीय बालक-बालिका एथलेटिक्स प्रतियोगिता का रविवार को पुरस्कार वितरण और सम्मान समारोह के साथ समापन हो गया। पांच दिनों तक चली प्रतियोगिता में प्रदेश के 10 संभागों के खिलाड़ियों ने दौड़, भाला फेंक, गोला फेंक, लंबी कूद, ऊंची कूद, त्रिकूद और पोल वॉल्ट सहित विभिन्न स्पर्धाओं में हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में कुल अंकों के आधार पर बालक वर्ग में ग्वालियर संभाग ने पहला स्थान हासिल किया। भोपाल संभाग दूसरे और उज्जैन संभाग तीसरे स्थान पर रहा। वहीं, बालिका वर्ग में इंदौर संभाग की टीम अव्वल रही, जबकि भोपाल दूसरे और उज्जैन तीसरे स्थान पर रहा। व्यक्तिगत प्रदर्शन के लिए भोपाल के अर्णव श्रीवास्तव और इंदौर की स्तुति जायसवाल को सम्मानित किया गया। समापन समारोह में जिला पंचायत अध्यक्ष नेहा यादव मुख्य अतिथि रहीं, जबकि शिवपुरी विधायक देवेंद्र जैन ने अध्यक्षता की। जिला शिक्षा अधिकारी आकाश सिंह यादव ने स्वागत भाषण देते हुए खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना की। नेहा यादव ने कहा कि खिलाड़ियों ने पांच दिनों तक अनुशासन और खेल भावना के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ दिया। विधायक देवेंद्र जैन ने कहा कि सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रयास कर रही है। शिवपुरी में आधुनिक खेल परिसर होना खिलाड़ियों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराता है। दल प्रबंधकों और समितियों का सम्मान
प्रतियोगिता के आयोजन में सहयोग करने वाले 10 संभागों के दल प्रबंधकों, स्टेट ऑफिशियल्स और स्थानीय समितियों के सदस्यों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। प्रचार-प्रसार के लिए भगवती प्रसाद शर्मा और नीरज सरैया को सम्मान मिला। रग्बी में ग्वालियर संभाग की टीम को स्वर्ण पदक दिलाने वाले कोच शिवनाथ सिंह वैस्य का भी सम्मान किया गया। दुर्गा स्तुति ने बांधा समां
समारोह में बाल शिक्षा निकेतन स्कूल के विद्यार्थियों ने बंगाली भजन पर दुर्गा स्तुति और महिषासुर मर्दन का मंचन किया। जिला क्रीड़ा अधिकारी चंद्रशेखर बेमटे ने आभार व्यक्त किया। जिला पंचायत अध्यक्ष नेहा यादव ने प्रतियोगिता के समापन की घोषणा की। अंत में प्रतियोगिता का ध्वज उतारकर परंपरागत तरीके से सौंपा गया।

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