नूंह के शहीद अग्निवीर समय सिंह को सम्मान:केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत ने प्रतिमा का अनावरण किया; स्कूल और प्रवेश द्वार की भी घोषणा

नूंह के शहीद अग्निवीर समय सिंह को सम्मान:केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत ने प्रतिमा का अनावरण किया; स्कूल और प्रवेश द्वार की भी घोषणा

नूंह जिले के गांव कुरथला के अग्निवीर समय सिंह को शहीद होने के डेढ़ साल बाद सम्मान मिला। रविवार को केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने गांव में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया। समय सिंह 5 अगस्त को उत्तराखंड के हर्षिल-धराली क्षेत्र में बाढ़ में शहीद हुए थे। उनका पार्थिव शरीर 65 दिन बाद गांव पहुंचा। उन्होंने समय सिंह के नाम पर स्कूल का नामकरण करने और शहीद छत्रपाल सिंह के नाम पर गांव में प्रवेश द्वार बनवाने की घोषणा की। हालांकि, सम्मान मिलने की खुशी के बीच शहीद की बहन पूजा ने स्मारक पार्क की बदहाली पर सवाल उठाकर प्रशासन को सुविधाएं दुरुस्त करने की मांग की। मंत्री ने उजीना गांव में विकास कार्यों का शिलान्यास भी किया, जिसमें दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर कट का शिलान्यास शामिल है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला सबको मानना होगा। पिता बोले-देशसेवा करना चाहता था इकलौता बेटा शहीद समय सिंह के पिता दलवीर सिंह ने बताया कि बेटे को सम्मान दिलाने के लिए परिवार ने मुख्यमंत्री, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अन्य जनप्रतिनिधियों तक गुहार लगाई। जिला प्रशासन के भी कई बार चक्कर काटे। उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनका इकलौता बेटा सेना में भर्ती होकर देशसेवा करना चाहता था, लेकिन उसके साथ उनके सारे सपने भी चले गए। उन्होंने शहीद को सम्मान दिलाने के लिए मंत्री, प्रशासन और ग्रामीणों का आभार जताया। बता दे कि समय सिंह 5 अगस्त 2025 को उत्तराखंड के हर्षिल-धराली क्षेत्र में बाढ़ और भूस्खलन के दौरान लोगों को बचाते हुए शहीद हुए थे। करीब 65 दिन बाद उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा था। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर कट का शिलान्यास किया वहीं उजीना में विकास कार्यों का शिलान्यास करते हुए राव इंद्रजीत ने दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर दिल्ली की तरफ चढ़ने-उतरने की परेशानी दूर करने के लिए कट का शिलान्यास किया। इस दौरान उजीना गांव में सीवरेज व्यवस्था पर जल्द सकारात्मक फैसले की उम्मीद जताई। उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि विरोध करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट में हे ओर सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला होगा वो कांग्रेस को भी मानना पड़ेगा। संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करना उचित नहीं है।

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