वैभव सूर्यवंशी को नहीं मिल रहा मौका, लेकिन गौतम गंभीर के ‘चहेते’ को क्यों ढो रही टीम इंडिया?

वैभव सूर्यवंशी को नहीं मिल रहा मौका, लेकिन गौतम गंभीर के ‘चहेते’ को क्यों ढो रही टीम इंडिया?

India vs West Indies 3rd T20: भारत और वेस्टइंडीज के बीच जारी टी20 सीरीज के दूसरे मैच में भारत को 249 रन बनाने के बावजूद रांची में हार का मुंह देखना पड़ा। इस हार के बाद टीम इंडिया की कई कमजोरियां सामने आई हैं। सबसे ज्‍यादा सवाल शिवम दुबे को लेकर उठ रहे हैं, जो कि ना तो बल्‍ले से और ना ही गेंद से कुछ खास कर पा रहे हैं। इतना ही नहीं रांची में तो उन्‍हें श्रेयस अय्यर से भी पहले बल्‍लेबाजी के लिए भेज दिया गया, जिसको लेकर हेड कोच गौतम गंभीर को आलोचना का सामना करना पड़ा। अब सवाल ये है कि उन्‍हें क्‍यों ढोया जा रहा है?

गेंदबाजी और बल्‍लेबाजी दोनों में बेअसर

शिवम दुबे के पिछले पांच मैचों में बल्‍लेबाजी प्रदर्शन पर नजर डालें तो वह चार पारियों में 37 रन ही बना सके हैं। जबकि गेंदबाजी की पिछली पांच पारियों में वह तीन विकेट ले सके हैं। वेस्‍टइंडीज के खिलाफ पहले टी20 मुकाबला में तो उनसे एक भी ओवर भी नहीं दिया गया और बल्‍लेबाजी का भी मौका नहीं मिल सका। वहीं, जब दूसरे वनडे में वह अय्यर से ऊपर चौथे नंबर पर बल्‍लेबाजी के लिए उतरे तो 10 गेंदों पर सिर्फ 7 रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद जब गेंदबाजी की बारी आई तो उन्‍होंने दो ओवर में बगैर कोई विकेट लिए 30 रन लुटा दिए।

अब सवाल ये है कि जब आपका तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर किसी काम का ही नहीं है, तो उसे क्‍यों लगातार मौके मिल रहे हैं? उनकी जगह किसी दूसरे खिलाड़ी का इस्‍तेमाल क्‍यों नहीं किया जा रहा है? जबकि आपके पास बेंच पर नी‍तीश कुमार रेड्डी बेंच पर हैं।

शिवम दुबे का टी20 करियर

शिवम दुबे के टी20 इंटरनेशनल करियर पर नजर डालें तो वह अब तक 81 मैचों की 61 पारियों में 28.5 के औसत से 1178 रन बना सके हैं। वहीं, इन मैचों में उन्‍हें सिर्फ 53 पारियों में ही गेंदबाजी का मौका मिला है, जिनमें उन्‍होंने 27.15 के औसत से 40 विकेट लिए हैं। सबसे गौर करने वाली बात ये है कि इस दौरान उनका इकॉनमी रेट 9.96 रहा है, जो कि बहुत ही ज्‍यादा है।

अय्यर से पहले भेजने के फैसले का गौतम गंभीर ने किया बचाव

शिवम दुबे को अय्यर से पहले भेजने के अपने फैसले का बचाव करते हुए गौतम गंभीर ने कहा था कि हमने लंबे समय तक उसे ऐसे ही इस्तेमाल किया है। यह कोई पहली बार नहीं हुआ। हमने मोमेंटम खो दिया था। इंटरनेशनल क्रिकेट में कभी-कभी यह आपके हिसाब से होता है, तो कभी-कभी नहीं होता। हम हमेशा अपनी बैटिंग लाइन-अप के साथ फ्लेक्सिबल रहे हैं और इसे जारी रखेंगे। टी20 क्रिकेट में सिर्फ सलामी बल्‍लेबाज फिक्स होते हैं।

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