मंदसौर शहर के पास स्थित नालछा माता मंदिर जिले के प्रमुख आस्था केंद्रों में से एक है। नवरात्रि के मौके पर मंदिर को खास तरीके से सजाया गया है और भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। इस प्राचीन मंदिर की कई अनोखी मान्यताएं हैं। मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां भेरू और भवानी एक ही गादी पर विराजमान हैं। पुजारी गोविंद नागदा के अनुसार, मंदिर की स्थापना राजा दशरथ के समय की मानी जाती है। आमतौर पर भेरू गर्भगृह के बाहर होते हैं, लेकिन यहां दोनों एक साथ हैं। एक और मान्यता के मुताबिक, गर्भगृह में विराजित माता की प्रतिमा दिनभर में तीन रूपों में दर्शन देती है। सुबह माता बाल्यावस्था, दोपहर में युवावस्था और शाम को वृद्धावस्था के रूप में दिखाई देती हैं। संतान की चाह रखने वाली महिलाएं यहां गोद भराई की रस्म कराती हैं। श्रद्धालु इसे माता का आशीर्वाद पाने का जरिया मानते हैं। मंदिर में अखंड ज्योत जलने की मान्यता
गर्भगृह में माता की प्रतिमा के पास एक ज्योत जल रही है। मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, यह ज्योत कई वर्षों से लगातार प्रज्वलित है। इसके अलावा मंदिर में चूल का आयोजन भी होता है। पुजारी गोविंद नागदा के अनुसार, इस परंपरा में श्रद्धालु धधकते अंगारों पर चलते हैं। भक्त इसे माता के प्रति अपनी आस्था और विश्वास से जोड़कर देखते हैं।
नवरात्रि के पहले दिन दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालु
नवरात्रि के पहले दिन मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना जारी रहा। बच्चे, युवा और बुजुर्ग माता के दर्शन के लिए पहुंचे। दर्शन करने आईं सृष्टि शर्मा ने दैनिक भास्कर को बताया कि नालछा माता का मंदिर बहुत प्राचीन है। यहां माता के तीन स्वरूपों के दर्शन होने की मान्यता है। नवरात्रि के पहले दिन मंदिर में अच्छा माहौल है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आ रहे हैं।
नवरात्रि के दौरान नालछा माता मंदिर में भक्तों की आस्था और उत्साह देखने को मिल रहा है। श्रद्धालु माता के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना कर रहे हैं।

