कान्हा की नगरी मथुरा इन दिनों राममय नजर आ रही है। शहर में जय श्रीराम के जयकारे गूंज रहे हैं और रामलीला के मंचन के माध्यम से मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की लीलाओं का वर्णन किया जा रहा है। इसी क्रम में श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर आयोजित भव्य रामलीला में शनिवार देर रात करीब 11 बजे धनुष यज्ञ और सीता स्वयंवर की लीला का मनमोहक मंचन किया गया। भगवान श्रीराम के शिव धनुष तोड़ने और माता सीता के वरमाला पहनाने का दृश्य देखकर सैकड़ों श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। ऐसा प्रतीत हुआ, मानो त्रेतायुग की लीला एक बार फिर जीवंत हो गई हो। रामलीला के मंचन के दौरान भगवान श्रीराम अपने गुरु महर्षि विश्वामित्र के साथ सीता स्वयंवर में पहुंचे। स्वयंवर में आए राजा-महाराजाओं ने भगवान शिव के विशाल धनुष को उठाने का प्रयास किया, लेकिन कोई भी उसे हिला तक नहीं सका। इसके बाद गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम आगे बढ़े और सहजता से शिव धनुष को उठा लिया। जैसे ही भगवान श्रीराम ने धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया, वह टूट गया। धनुष टूटने की आवाज के साथ ही रामलीला परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। मौजूद श्रद्धालुओं ने करतल ध्वनि के साथ इस दृश्य का स्वागत किया। इसके बाद माता सीता ने भगवान श्रीराम के गले में वरमाला पहनाई। इस प्रसंग का मंचन देखकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। धनुष यज्ञ और सीता स्वयंवर के इस प्रसंग को कलाकारों ने आकर्षक वेशभूषा और प्रभावशाली अभिनय के माध्यम से जीवंत रूप दिया। मंच की सजावट और प्रसंग के अनुरूप प्रस्तुतियों ने दर्शकों को बांधे रखा। रामलीला परिसर में देर रात तक भक्तिमय माहौल बना रहा। कान्हा की नगरी में भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति के साथ भगवान श्रीराम की लीलाओं का यह आयोजन धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का सुंदर संगम प्रस्तुत कर रहा है। रामलीला के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश भी दिया जा रहा है।

