अरावली की पहाड़ियों में करणी माता का मेला शुरू:श्रद्धालुओं से समूह में चलने की अपील;चौपहिया वहानों की एंट्री पर रोक,क्षेत्र में बाघिन का शावकों के साथ मूवमेंट

अरावली की पहाड़ियों में करणी माता का मेला शुरू:श्रद्धालुओं से समूह में चलने की अपील;चौपहिया वहानों की एंट्री पर रोक,क्षेत्र में बाघिन का शावकों के साथ मूवमेंट

अलवर की अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित करणी माता मंदिर में रविवार को पहले नवरात्र के साथ मेले की शुरुआत हो गई। सुबह से ही माता के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री संजय शर्मा भी सुबह मंदिर पहुंचे। उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना कर माता की आरती की और दर्शन किए। वन मंत्री संजय शर्मा ने कहा कि पहाड़ियों के बीच स्थित करणी माता मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से मंदिर परिसर और आसपास के प्राकृतिक क्षेत्र को स्वच्छ रखने तथा पॉलिथीन का उपयोग नहीं करने की अपील की। बाघिन और दो शावकों की मौजूदगी, समूह में चलने की सलाह वन मंत्री ने बताया कि बाला किला क्षेत्र में ST-2302 बाघिन अपने दो शावकों के साथ विचरण कर रही है। ऐसे में श्रद्धालु वन विभाग और जिला प्रशासन की ओर से निर्धारित रास्तों का ही उपयोग करें। जंगल के प्रतिबंधित क्षेत्रों में जाने से बचें। पैदल आने वाले श्रद्धालुओं को समूह में चलने की सलाह दी गई है, ताकि किसी अप्रिय घटना की आशंका को टाला जा सके। चौपहिया वाहनों की एंट्री पर रोक बाघिन की गतिविधियों को देखते हुए करणी माता मंदिर मार्ग पर वाहनों की आवाजाही के लिए भी व्यवस्था की गई है। दुपहिया वाहन सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक प्रवेश कर सकेंगे। वहीं, चौपहिया वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा। प्रतापबंध के पास वन विभाग के नाके से आगे जाने की अनुमति नहीं होगी। वन विभाग ने बाला किला की सुरक्षा दीवार पर खड़े होकर सेल्फी लेने से भी मना किया है। विभाग के अनुसार, दीवार कमजोर है। ऐसे में यहां खड़े होकर फोटो खिंचवाना जोखिम भरा हो सकता है। 19 अक्टूबर तक भरेगा मेला एडीएम सिटी अंबालाल मीणा के अनुसार, करणी माता मंदिर में 19 अक्टूबर तक मेला भरेगा। मंदिर के महंत घनश्याम शर्मा ने बताया कि सुबह 7 बजे घट स्थापना होगी। प्रतिदिन सुबह और शाम 6 बजे आरती की जाएगी। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में विश्राम के लिए पांडाल बनाया गया है। रोशनी की व्यवस्था भी की गई है। वहीं, मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है।

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