झांसी से शनिवार को पुलिस ने आम आदमी पार्टी के नेताओं को दिनभर हाउस अरेस्ट रखा। पार्टी कार्यालय में एकत्र होकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने जाने की तैयारी कर रहे जिलाध्यक्ष अरशद खान समेत करीब एक दर्जन नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हाउस अरेस्ट कर लिया। नेताओं को दिनभर नजरबंद रखा गया। आप नेताओं का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस कार्रवाई कर रही है। कार्यालय में जुटे थे नेता, पुलिस ने पहुंचकर रोका
आम आदमी पार्टी के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली जाने की तैयारी कर रहे थे। शनिवार सुबह पार्टी कार्यालय में नेता और कार्यकर्ता एकत्र हुए थे। इसी बीच पुलिस को इसकी भनक लग गई। महिला एवं पुरुष पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर नेताओं को डिटेन कर लिया। लगातार दूसरे दिन पुलिस और आप नेताओं के बीच खींचतान देखने को मिली। डिटेन किए गए नेताओं में जिलाध्यक्ष अरशद खान, प्रांतीय उपाध्यक्ष अर्चना गुप्ता, प्रांतीय सचिव पुत्तू सिंह कुशवाहा, एससी प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष एडवोकेट नीलम चौधरी और तिरंगा शाखा के राजकुमार राव समेत करीब एक दर्जन कार्यकर्ता शामिल रहे। बोले- वोट चोरी के आरोपों का जवाब देना पड़ेगा
आप नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ उठ रही आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। उनका कहना था कि देशभर में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से भाजपा विरोधी मतदाताओं के नाम सुनियोजित तरीके से हटाए गए और फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़े गए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह चाहे जितनी ताकत लगा लें, वोट चोरी के आरोपों का जवाब देना पड़ेगा। नेताओं के मुताबिक, जनता अब मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को समझ चुकी है। विरोध की आवाज दबाने से जनआक्रोश और बढ़ेगा। बोले- लोकतंत्र की हत्या के खिलाफ जारी रहेगा आंदोलन आप नेताओं ने कहा कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी और सीजेपी समेत विभिन्न दलों के नेताओं को हिरासत में लिए जाने की सूचना मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाने वालों को रोकने का प्रयास किया जा रहा है।
नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली का मुद्दा अब देशव्यापी हो चुका है। कथित वोट चोरी के खिलाफ उनका विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती।

