वक्ता बोले-सपनों को दबाएं नहीं, फैसले लेने का साहस जुटाएं:महिलाओं को सीख-आर्थिक फैसलों में भी रहें सक्रिय; IMA के वूमेन लीडरशिप कॉन्क्लेव में साझा किए अनुभव

वक्ता बोले-सपनों को दबाएं नहीं, फैसले लेने का साहस जुटाएं:महिलाओं को सीख-आर्थिक फैसलों में भी रहें सक्रिय; IMA के वूमेन लीडरशिप कॉन्क्लेव में साझा किए अनुभव

महिलाओं को अपने सपनों से समझौता नहीं करना चाहिए: IMA के वूमेन लीडरशिप कॉन्क्लेव में 400 से ज्यादा महिलाओं ने लिया हिस्सा, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व पर हुई चर्चा महिलाओं को नेतृत्व के अवसर देने, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उनकी क्षमताओं को पहचानने के उद्देश्य से शुक्रवार को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में इंदौर मैनेजमेंट एसोसिएशन (IMA) का पांचवां वूमेन लीडरशिप कॉन्क्लेव आयोजित किया गया। ‘बियॉन्ड : शेपिंग व्हाट्स नेक्स्ट’ थीम पर आयोजित इस कॉन्क्लेव में 400 से अधिक महिला उद्यमियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में 11 वक्ताओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए महिलाओं को करियर में आगे बढ़ने, आर्थिक फैसले खुद लेने, अपनी पसंद को प्राथमिकता देने और परिवार व काम के बीच संतुलन बनाने के लिए प्रेरित किया। वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं को सामाजिक दबाव और दूसरों की अपेक्षाओं के चलते अपने सपनों से समझौता नहीं करना चाहिए। उन्हें अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखते हुए फैसले लेने और उनकी जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार रहना चाहिए। कॉन्क्लेव में नेतृत्व विकास, नए कौशल सीखने, आत्मसम्मान, नेटवर्किंग, फिटनेस और कारोबार शुरू करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई। आर्थिक फैसलों में महिलाओं की भागीदारी जरूरी : सीए इशानी माहेश्वरी सीए इशानी माहेश्वरी ने कहा कि युवाओं को करियर की शुरुआत से ही अपने लक्ष्य और भविष्य को लेकर स्पष्ट दृष्टिकोण रखना चाहिए। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि सीए की पढ़ाई शुरू करते समय उनके सामने भी करियर को लेकर लक्ष्य तय करने की चुनौती थी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को वित्तीय मामलों में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। पहले परिवारों में आर्थिक फैसले लेते समय महिलाओं को अक्सर शामिल नहीं किया जाता था, जिसके कारण उनके भीतर पैसों से जुड़े निर्णय लेने को लेकर झिझक पैदा हुई। अब इस सोच को बदलने की जरूरत है। महिलाओं को आर्थिक रूप से जागरूक और आत्मनिर्भर बनना चाहिए, ताकि वे अपने फैसले आत्मविश्वास के साथ ले सकें। अपनी इच्छाओं को दबाने के बजाय फैसलों की जिम्मेदारी लें : धरा पांडे सीईओ धरा पांडे ने कहा कि लड़कियों को सलाह देने वाले बहुत लोग मिल जाएंगे, लेकिन जरूरी यह है कि वे दूसरों के दबाव में अपनी इच्छाओं को न दबाएं। जब कोई व्यक्ति अपनी पसंद के विपरीत जीवन जीता है, तो वह पढ़ाई, काम और नई चीजें सीखने में अपना पूरा योगदान नहीं दे पाता। उन्होंने कहा कि अपनी पसंद के अनुसार फैसले लेने का अर्थ माता-पिता की बातों को नजरअंदाज करना नहीं है। बेटियों को अपने फैसलों के पीछे की सोच समझानी चाहिए और माता-पिता को यह भरोसा दिलाना चाहिए कि वे अपनी जिम्मेदारियां निभाने में सक्षम हैं। माता-पिता की चिंता अक्सर बेटियों की सुरक्षा को लेकर होती है। बेटियां जब अपनी समझ और जिम्मेदारी का विश्वास दिलाती हैं, तो उनकी चिंताएं भी कम होती हैं। धरा पांडे ने लड़कियों से अपने सपने पूरे करने, नई चीजें सीखने, घूमने और जीवन को खुलकर जीने की अपील की। फिटनेस और करियर के साथ परिवार को भी दें समय : पल्लवी बर्मन पल्लवी बर्मन ने कहा कि महिलाओं के लिए घर, परिवार, बच्चों और करियर की जिम्मेदारियों के साथ अपनी फिटनेस का ध्यान रखना भी जरूरी है। उन्होंने महिलाओं की फिटनेस, कारोबार खड़ा करने की चुनौतियों और अपने काम पर गर्व करने के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेट जगत में महिलाओं को नेतृत्व के अधिक अवसर मिल रहे हैं। साथ ही उनके स्वास्थ्य और व्यक्तिगत विकास पर भी ध्यान बढ़ा है। हालांकि, समाज में वास्तविक बदलाव लाने के लिए केवल लड़कियों को सशक्त बनाना पर्याप्त नहीं है। लड़कों को भी महिलाओं का सम्मान करना और उनकी स्वतंत्रता को स्वीकार करना सिखाना होगा। एक मां के रूप में उन्होंने कहा कि बच्चों को बचपन से ही समानता और सम्मान की सीख मिलनी चाहिए। इसकी शुरुआत घर से होती है। परिवार में समानता का माहौल बनाकर ही बेहतर समाज की नींव रखी जा सकती है। नेतृत्व और व्यक्तिगत विकास पर हुई चर्चा कॉन्क्लेव में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिला वक्ताओं ने अपने अनुभव साझा किए। चर्चा के दौरान महिलाओं के लिए नेतृत्व के अवसर बढ़ाने, आत्मसम्मान बनाए रखने, नेटवर्किंग के जरिए आगे बढ़ने और लगातार नए कौशल सीखने के महत्व पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने महिलाओं को अपनी क्षमताओं को पहचानने, चुनौतियों का सामना करने और व्यक्तिगत व पेशेवर जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को अपने अनुभव साझा करने के लिए मंच उपलब्ध कराने के साथ उनके आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को मजबूत करना भी रहा। बूटकैंप से 1,000 से ज्यादा महिलाएं जुड़ीं, पर्यावरण संरक्षण पर भी पहल IMA की ‘बियॉन्ड मूवमेंट’ पहल के तहत अब तक 1,000 से अधिक महिलाएं बूटकैंप और प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जुड़ चुकी हैं। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को कौशल विकास और अपनी व्यक्तिगत क्षमताओं को निखारने के अवसर उपलब्ध कराना है। वहीं, ‘बियॉन्ड ड्रॉप’ पहल के माध्यम से पानी बचाने, कचरा कम करने और पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाने के प्रति जागरूकता फैलाई जा रही है। इन पहलों के जरिए महिला सशक्तीकरण के साथ सामाजिक जिम्मेदारी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। कॉन्क्लेव में वक्ताओं ने एकमत से इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं की प्रगति के लिए आत्मविश्वास, आर्थिक स्वतंत्रता, परिवार का सहयोग और समान अवसर जरूरी हैं। महिलाओं को अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखते हुए आगे बढ़ने और अपने फैसलों की जिम्मेदारी लेने के लिए प्रेरित करना ही ऐसे आयोजनों का प्रमुख उद्देश्य है।

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