Chirag Paswan ने साझा किया संघर्ष, पिता की पार्टी से बेदखल होने पर तरस खाने के बजाय चुनी लड़ाई

Chirag Paswan ने साझा किया संघर्ष, पिता की पार्टी से बेदखल होने पर तरस खाने के बजाय चुनी लड़ाई

नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने अपने पिता रामविलास पासवान द्वारा स्थापित पार्टी से छह साल पहले निकाले जाने का उल्लेख करते हुए शुक्रवार को कहा कि उस समय उन्होंने ‘‘खुद पर तरस खाने और रोते रहने’’ के बजाय संघर्ष करने का फैसला किया। पासवान ने अपने चाचा पशुपति पारस के पार्टी की कमान संभालने और उन्हें सरकारी बंगले से हटाए जाने का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘जब छह साल पहले मैंने अपने पिता को खोया, तो मुझे लगा कि सब कुछ मुझसे दूर होता जा रहा है… मुझे अपने घर, अपनी पार्टी और अपने परिवार से निकाल दिया गया था।’’
लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक रामविलास पासवान का जन्म पांच जुलाई, 1946 को हुआ था और आठ अक्टूबर, 2020 को उनका निधन हो गया था। हरियाणा के सोनीपत में राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (निफ्टेम), कुंडली के सातवें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री ने विद्यार्थियों से कहा, ‘‘मेरे पास दो विकल्प थे : या तो मैं रोता रहता और खुद पर तरस खाता या संघर्ष करने वाला बनता।’’
उन्होंने निफ्टेम के विद्यार्थियों को सलाह देते हुए कहा, ‘‘आपको इन समस्याओं को अपनी ताकत में बदलना होगा।

उन जख्मों को हमेशा ताजा रहना चाहिए, ताकि वे आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहें। यही ताकत आपको खुद पर तरस खाने की स्थिति से बाहर निकालती है और संघर्ष करने वाला बनाती है।’’
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री पासवान लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष हैं। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के तहत निफ्टेम, कुंडली की स्थापना खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में शिक्षा, अनुसंधान, उद्योगों को बढ़ावा देने, सहयोग और उद्यमिता के लिए अनुकूल माहौल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी।

पासवान ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से इन अवसरों का लाभ उठाने और पहली पीढ़ी के उद्यमी बनने का आह्वान किया। मंत्री ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने इस क्षेत्र के विकास के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

उन्होंने इस उभरते क्षेत्र के विकास के लिए गांवों में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने की जरूरत पर जोर दिया। पासवान ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र किसानों की आय बढ़ाने, खाद्य पदार्थों की बर्बादी कम करने और रोजगार के अवसर पैदा करने जैसी कई चुनौतियों से निपट सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से समझौता नहीं करने को कहा।

उन्होंने कहा कि इससे कंपनी के ब्रांड और वैश्विक बाजार में भारत की छवि को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने विद्यार्थियों से परंपरागत तरीकों से अलग हटकर सोचने और बड़े पैमाने पर प्रौद्योगिकी अपनाने की भी अपील की। खाद्य प्रसंस्करण सचिव अविनाश जोशी ने इस क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए और अधिक निफ्टेम संस्थान तथा कौशल केंद्र स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्षों में खाद्य प्रसंस्करण का स्तर 10 प्रतिशत से बढ़कर 17 प्रतिशत हो गया है और अगले पांच वर्षों में इसे 25 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य है। जोशी ने कहा कि कुल कृषि निर्यात में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी भी बढ़कर 20 प्रतिशत हो गई है। सचिव ने इस बात पर जोर दिया कि प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ जंक फूड नहीं होते हैं।

उन्होंने कहा कि खासकर सोशल मीडिया पर इसको लेकर फैली नकारात्मक धारणा का मुकाबला करने की जरूरत है।

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