नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को किशोरियों के स्वास्थ्य, पोषण और समग्र विकास पर अधिक ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और सशक्तीकरण पर जोर देते हुए बच्चों के लिए उनकी उम्र के अनुरूप विशेष ‘मॉड्यूल’ विकसित करने का सुझाव भी दिया। दिल्ली में महिला एवं बाल विकास विभाग के एक शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर विभिन्न विभागों के बीच समन्वय के जरिए निवारक कदम उठाने के महत्व पर भी जोर दिया।
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, मोदी की परिकल्पना के अनुरूप आयोजित किए जा रहे विभिन्न विभागीय शिखर सम्मेलनों की श्रृंखला के तहत इस सम्मेलन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। सम्मेलन में पोषण एवं प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल, बाल संरक्षण, महिलाओं की सुरक्षा एवं सशक्तीकरण तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए सेवाओं की आपूर्ति व्यवस्था मजबूत करने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बयान में कहा गया कि मोदी ने सम्मेलन में हुई गहन चर्चाओं की सराहना की और केंद्र तथा राज्यों के बीच सहयोगात्मक निर्णय प्रक्रिया के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य इस मॉडल को आगे बढ़ाते हुए जिला स्तर के साथ-साथ नगर निकायों और महानगरों के स्तर पर भी इसी तरह के चिंतन शिविर आयोजित कर सकते हैं। मोदी ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए विशेष चिंतन शिविर आयोजित करने का सुझाव भी दिया, ताकि वे अपने अनुभवों, नवाचारों और जमीनी स्तर पर अपनाए जा रहे व्यावहारिक समाधानों को एक-दूसरे के साथ साझा कर सकें। जनभागीदारी के सिद्धांत पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र को एक अलग-थलग संस्थान के रूप में काम नहीं करना चाहिए, बल्कि इसे सामुदायिक भागीदारी का केंद्र बनना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों के आसपास रहने वाले परिवारों को भी विशेष अवसरों पर पौष्टिक भोजन, खिलौने और बच्चों के लिए स्थानीय जरूरतों के अनुरूप उपयोगी वस्तुएं उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों की आंगनवाड़ी केंद्रों के साथ अधिक सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

