बिहार राज्य विद्यालय अध्यापक संघ द्वारा सातवें वेतनमान की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को आयोजित होने वाले पैदल मार्च को स्थगित कर दिया गया है। संघ ने आचार संहिता का हवाला देते हुए फिलहाल आंदोलन को टालने का निर्णय लिया है। इसकी जानकारी देते हुए संघ के जिला अध्यक्ष अवनीश कुमार ने बताया कि पटना में संघ के प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री से मुलाकात की थी। इस दौरान शिक्षा मंत्री ने कहा कि एमएलसी चुनाव के कारण आचार संहिता लागू है, इसलिए 23 अक्टूबर के बाद ही इस मांग पर चर्चा होगी। अगले निर्णय तक स्थगित कर दिया जिसके बाद संघ ने 10 अक्टूबर को होने वाले पैदल मार्च को स्थगित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि 23 अक्टूबर के बाद भी अगर सरकार उनकी मांगों पर संज्ञान नहीं लेती है तो फिर से रणनीति बनाकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। जब तक सरकार उनकी मांगों को नहीं मान लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं संघ की प्रवक्ता गुड़िया रानी ने कहा कि शिक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही खुशखबरी दी जाएगी, लेकिन आचार संहिता लागू होने की वजह से मामला टल गया है। अभी आचार संहिता लागू ऐसी स्थिति में हम लोगों ने जो 10 अक्टूबर को बांग्ला स्कूल से डीईओ कार्यालय तक पैदल मार्च निकालने का निर्णय लिया था, उसे अगले निर्णय तक स्थगित कर दिया है। अगर सरकार मांगों को नहीं मानती है तो आगे चरणबद्ध आंदोलन कर सरकार को हक देने के लिए मजबूर किया जाएगा। वहीं जिला महासचिव अभिजीत कुमार ने कहा कि हमें भरोसा है कि जिस तरह से शिक्षा मंत्री ने कहा है कि अभी आचार संहिता लागू है, उसके बाद कुछ निर्णय लिया जाएगा। सरकार के रुख को देखते हुए आगे की रणनीति ऐसी स्थिति में हमें पूरा भरोसा है कि इस बार सरकार सातवें वेतन का लाभ जरूर देगी। बिहार राज्य विधिक अध्यापक संघ लंबे समय से सातवें वेतनमान की मांग कर रहा है। इससे पहले भी कई बार संघ द्वारा सरकार से मांग की जा चुकी है। 10 अक्टूबर को मोतिहारी में गांधी मैदान से बांग्ला स्कूल होते हुए डीईओ कार्यालय तक पैदल मार्च निकालने की योजना थी, जिसे अब आचार संहिता के कारण स्थगित कर दिया गया है। संघ ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन खत्म नहीं हुआ है, बल्कि 23 अक्टूबर के बाद सरकार के रुख को देखते हुए आगे की रणनीति तय की जाएगी। बिहार राज्य विद्यालय अध्यापक संघ द्वारा सातवें वेतनमान की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को आयोजित होने वाले पैदल मार्च को स्थगित कर दिया गया है। संघ ने आचार संहिता का हवाला देते हुए फिलहाल आंदोलन को टालने का निर्णय लिया है। इसकी जानकारी देते हुए संघ के जिला अध्यक्ष अवनीश कुमार ने बताया कि पटना में संघ के प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री से मुलाकात की थी। इस दौरान शिक्षा मंत्री ने कहा कि एमएलसी चुनाव के कारण आचार संहिता लागू है, इसलिए 23 अक्टूबर के बाद ही इस मांग पर चर्चा होगी। अगले निर्णय तक स्थगित कर दिया जिसके बाद संघ ने 10 अक्टूबर को होने वाले पैदल मार्च को स्थगित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि 23 अक्टूबर के बाद भी अगर सरकार उनकी मांगों पर संज्ञान नहीं लेती है तो फिर से रणनीति बनाकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। जब तक सरकार उनकी मांगों को नहीं मान लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं संघ की प्रवक्ता गुड़िया रानी ने कहा कि शिक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही खुशखबरी दी जाएगी, लेकिन आचार संहिता लागू होने की वजह से मामला टल गया है। अभी आचार संहिता लागू ऐसी स्थिति में हम लोगों ने जो 10 अक्टूबर को बांग्ला स्कूल से डीईओ कार्यालय तक पैदल मार्च निकालने का निर्णय लिया था, उसे अगले निर्णय तक स्थगित कर दिया है। अगर सरकार मांगों को नहीं मानती है तो आगे चरणबद्ध आंदोलन कर सरकार को हक देने के लिए मजबूर किया जाएगा। वहीं जिला महासचिव अभिजीत कुमार ने कहा कि हमें भरोसा है कि जिस तरह से शिक्षा मंत्री ने कहा है कि अभी आचार संहिता लागू है, उसके बाद कुछ निर्णय लिया जाएगा। सरकार के रुख को देखते हुए आगे की रणनीति ऐसी स्थिति में हमें पूरा भरोसा है कि इस बार सरकार सातवें वेतन का लाभ जरूर देगी। बिहार राज्य विधिक अध्यापक संघ लंबे समय से सातवें वेतनमान की मांग कर रहा है। इससे पहले भी कई बार संघ द्वारा सरकार से मांग की जा चुकी है। 10 अक्टूबर को मोतिहारी में गांधी मैदान से बांग्ला स्कूल होते हुए डीईओ कार्यालय तक पैदल मार्च निकालने की योजना थी, जिसे अब आचार संहिता के कारण स्थगित कर दिया गया है। संघ ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन खत्म नहीं हुआ है, बल्कि 23 अक्टूबर के बाद सरकार के रुख को देखते हुए आगे की रणनीति तय की जाएगी।

