लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष राजीव पासी ने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा- अखिलेश यादव न तो प्रभु श्रीराम के हुए और न ही रामविलास पासवान के। राजीव पासी ने आरोप लगाया- PDA और दलितों के अधिकारों की बात करने वाले अखिलेश यादव ने रामविलास पासवान की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि तक नहीं दी। दलित उनको केवल चुनाव में याद आते हैं। दरअसल, 8 अक्टूबर को लखनऊ में पूर्व केंद्रीय मंत्री और पद्म भूषण से सम्मानित रामविलास पासवान की 6वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई थी। इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार के कई मंत्रियों के साथ दूसरे राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी हिस्सा लिया। कार्यक्रम में नेताओं ने रामविलास पासवान के सामाजिक और राजनीतिक योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। राजीव पासी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धांजलि सभा में रामविलास पासवान के साथ काम करने के अपने अनुभव साझा किए और उनके योगदान की सराहना की। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बिहार में जिस तरह रामविलास पासवान को सम्मान मिला है, उसी तरह उत्तर प्रदेश में भी उन्हें सम्मान दिया जाएगा। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया। क्या रामविलास पासवान दलित समाज से नहीं
राजीव पासी ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि दलितों और पिछड़ों के अधिकारों की बात करने वाले सपा मुखिया रामविलास पासवान को श्रद्धांजलि देने क्यों नहीं पहुंचे? क्या रामविलास पासवान दलित समाज से नहीं थे? उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव की राजनीति परिवारवाद तक सीमित है और उन्हें अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों की याद केवल चुनाव के समय आती है। प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया- अखिलेश यादव का श्रद्धांजलि सभा में शामिल नहीं होना पासी और पासवान समाज के प्रति उनके रवैये को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि रामविलास पासवान ने अपना पूरा जीवन गरीबों, दलितों, शोषितों और वंचितों के अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए बिताया। ऐसे जननेता को श्रद्धांजलि देने के मौके पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सम्मान प्रकट करना चाहिए था।

