निजीकरण और ठेका व्यवस्था के विरोध में अस्थायी और आउटसोर्स कर्मचारियों ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया है। 28 सितंबर को भाजपा कार्यालय के सामने प्रदर्शन के बाद अब कर्मचारी 10 अक्टूबर को मंत्रालय का घेराव करेंगे। प्रदेशभर के कर्मचारी रानी कमलापति स्टेशन के बाहर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा के पास एकत्र होंगे और वहां से रैली निकालकर वल्लभ भवन की ओर बढ़ेंगे। पुलिस ने जहां रोका, कर्मचारी वहीं धरने पर बैठ जाएंगे। आंदोलन में विभिन्न शासकीय विभागों में काम करने वाले आउटसोर्स, ठेका और कंपनी कर्मचारियों के शामिल होने का दावा किया गया है। 12 से 14 घंटे काम कर रहे कर्मचारी आउटसोर्स, अस्थायी कर्मचारी मोर्चा के अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार की ठेका व्यवस्था के कारण कर्मचारियों को 3 से 10 हजार रुपए महीने के वेतन पर 12 से 14 घंटे तक काम करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि मंत्रालय, संचालनालय, कलेक्ट्रेट और कमिश्नरी सहित विभिन्न सरकारी कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारियों की स्थिति बंधुआ मजदूरी जैसी हो गई है। ठेकेदारों पर वेतन में कटौती का आरोप वासुदेव शर्मा के मुताबिक, निजीकरण की नीति के चलते सरकारी विभागों में कर्मचारियों की नियुक्ति ठेकेदारों और निजी कंपनियों के माध्यम से की जा रही है। उनका आरोप है कि इस व्यवस्था में बिचौलियों की भूमिका बढ़ गई है और कर्मचारियों के वेतन में भी कटौती की जा रही है। मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. अमित सिंह सहित जगदीश परमार, मनोज भार्गव, रजत शर्मा, शिवेंद्र पांडे, दामोदर रायकवार और अनिल वाजपेयी के नेतृत्व में आंदोलन किया जाएगा। कर्मचारियों का प्रमुख नारा ‘बिचौलिए भगाओ, नौकरी नियमित करो’ रहेगा। सुबह 11 बजे जुटेंगे कर्मचारी आंदोलन की रणनीति के मुताबिक, 10 अक्टूबर को सुबह 11 बजे तक कर्मचारी रानी कमलापति स्टेशन के बाहर एकत्र होंगे। यहां से रैली के रूप में वल्लभ भवन की ओर बढ़ेंगे और शासन को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपने का प्रयास करेंगे। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि पुलिस जहां रोकेगी, वहीं धरना शुरू कर दिया जाएगा। तृतीय-चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों में ठेका व्यवस्था का विरोध कर्मचारी नेताओं का कहना है कि तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर स्थायी नियुक्तियों के बजाय आउटसोर्स और ठेका व्यवस्था लागू होने से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के युवाओं को नुकसान हो रहा है। उनके मुताबिक, सरकारी विभागों में काम करने के बावजूद कर्मचारियों को कम वेतन और अस्थिर रोजगार का सामना करना पड़ रहा है। मोर्चा नेताओं ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत ऐसे कर्मचारी और उनके संगठन भी आंदोलन में शामिल होंगे, जो कंपनीकरण और ठेकाकरण के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांग बिचौलियों की भूमिका खत्म कर कर्मचारियों की नौकरी नियमित करना है। कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन को युवाओं के रोजगार और भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बताया है। अब 10 अक्टूबर को प्रस्तावित मंत्रालय घेराव में कर्मचारियों की भागीदारी और सरकार की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।

