कानपुर विकास प्राधिकरण के शताब्दी नगर स्थित हिमालय भवन के बी-ब्लॉक में एक फ्लैट का फर्श अचानक धंस गया। घटना रात करीब दो बजे की है। उस समय परिवार के सदस्य कमरे में सो रहे थे। अचानक फर्श का एक हिस्सा करीब दो फीट नीचे धंसने से बेड एक तरफ झुक गया। तेज हलचल के बीच परिजन घबरा गए और आनन-फानन में फ्लैट से बाहर निकल आए। कुछ देर बाद स्थिति देखने के लिए दोबारा अंदर पहुंचे तो एक कमरे का फर्श धंसा मिला, जबकि दूसरे कमरे में भी दरारें दिखाई दीं। फर्श पर लगी टाइलें उखड़ने से निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। फ्लैट के आवंटी वंशवीर गुप्ता का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया। फर्श का बेस अंदर से खोखला हो गया, जिसके चलते उसका एक हिस्सा अचानक धंस गया। अब प्रभावित हिस्से को तोड़कर दोबारा बनवाने की जरूरत पड़ रही है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि सरकारी विकास प्राधिकरण की आवासीय योजना में फ्लैट खरीदते समय उन्होंने उम्मीद की थी कि भवन का निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ होगा, लेकिन कुछ ही वर्षों में इस तरह की समस्या सामने आने से उन्हें परेशानी झेलनी पड़ रही है। आवंटी ने मामले की जानकारी केडीए को दी। आरोप है कि शुरुआती स्तर पर समस्या का समाधान नहीं होने पर उन्होंने जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद केडीए के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का निरीक्षण कराया। आवंटी के मुताबिक, कर्मचारियों ने एक कमरे की मरम्मत कराने की बात कही है। हालांकि, फर्श धंसने के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए विस्तृत तकनीकी जांच जरूरी है। रात में अचानक धंसा फर्श, बेड झुका तो मची अफरातफरी वंशवीर गुप्ता पेशे से अधिवक्ता है। वह अपने माता पिता के साथ हिमालय आपर्टमेंट के बी 13 ब्लाक में रहते है। वंशवीर गुप्ता ने बताया कि रात करीब दो बजे वह और परिवार के सदस्य कमरे में सो रहे थे, तभी अचानक फर्श का एक हिस्सा नीचे धंस गया। इसके चलते बेड एक तरफ झुक गया। नींद में अचानक हुई इस घटना से परिजन घबरा गए। किसी अनहोनी की आशंका के चलते सभी लोग फ्लैट से बाहर निकल आए। कुछ देर बाद जब वे दोबारा अंदर पहुंचे तो कमरे के फर्श की स्थिति देखकर हैरान रह गए। आवंटी का कहना है कि फर्श का एक हिस्सा करीब दो फीट तक धंस गया है। दूसरे कमरे में भी दरारें दिखाई दीं और फर्श पर लगी टाइलें उखड़ने लगीं। उनका आरोप है कि यदि समय रहते इस समस्या का पता नहीं चलता या परिवार के किसी सदस्य के साथ कोई हादसा हो जाता तो गंभीर परिणाम हो सकते थे। घटना के बाद से परिवार को फ्लैट में रहने और मरम्मत कराने को लेकर चिंता सता रही है। आवंटी का कहना है कि केवल ऊपर से टाइलें लगवा देने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए फर्श के नीचे के बेस की जांच कराकर धंसाव की वजह का पता लगाना जरूरी है। 2018 में बना था भवन, 2024 में खरीदा फ्लैट आवंटी के मुताबिक, हिमालय भवन का निर्माण वर्ष 2018 में कराया गया था। उन्होंने वर्ष 2024 में इस भवन में फ्लैट खरीदा था। यानी भवन के निर्माण के करीब छह साल बाद उन्होंने फ्लैट लिया। खरीदारी के समय उन्हें उम्मीद थी कि भवन की संरचना और निर्माण कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक होगी और उन्हें जल्द ही बड़ी मरम्मत कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि, फर्श धंसने और टाइलें उखड़ने की समस्या ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। आवंटी का कहना है कि फ्लैट खरीदने में उनकी जीवनभर की कमाई का बड़ा हिस्सा लगा है। अब निर्माण संबंधी खामी के चलते मरम्मत पर अतिरिक्त रकम खर्च करनी पड़ रही है। उनका सवाल है कि यदि भवन में निर्माण के दौरान गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का उचित ध्यान रखा गया था तो इतनी जल्दी फर्श धंसने जैसी समस्या कैसे सामने आ गई। आवंटी ने भवन के निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री, फर्श के बेस और जल निकासी की व्यवस्था की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। छत और टंकी के पानी की निकासी का इंतजाम नहीं होने का आरोप वंशवीर गुप्ता का आरोप है कि भवन में बारिश के पानी और टंकी से फैलने वाले पानी की निकासी के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई है। छत से पानी नाली तक पहुंचाने का उचित इंतजाम नहीं होने के कारण पानी के रिसाव की समस्या बनी रहती है। फ्लैट के बाहर भी नाली की व्यवस्था को लेकर उन्होंने सवाल उठाए हैं। आवंटी का कहना है कि पानी के लगातार रिसाव से फर्श के नीचे की मिट्टी या बेस प्रभावित हुआ होगा। इससे धीरे-धीरे फर्श कमजोर होकर खोखला हो गया और आखिरकार उसका एक हिस्सा धंस गया। हालांकि, पानी के रिसाव और फर्श के धंसाव के बीच संबंध की अभी तकनीकी पुष्टि नहीं हुई है। इसकी वास्तविक वजह विशेषज्ञों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। आवंटी ने मांग की है कि फर्श की मरम्मत के साथ ही जल निकासी की व्यवस्था का भी निरीक्षण कराया जाए। यदि पानी के रिसाव या किसी अन्य निर्माण संबंधी खामी के कारण समस्या पैदा हुई है तो उसे जड़ से दूर किया जाए, ताकि भविष्य में दोबारा ऐसी स्थिति न बने। आठ साल में मरम्मत नहीं होने का दावा आवंटी के मुताबिक, वर्ष 2018 में भवन का निर्माण होने के बाद से अपार्टमेंट में व्यापक मरम्मत का कोई काम नहीं कराया गया है। उनका कहना है कि भवन के रखरखाव, जल निकासी और निर्माण संबंधी कमियों की समय-समय पर जांच की जानी चाहिए थी, ताकि छोटी समस्याएं गंभीर रूप न लेतीं। उनका आरोप है कि यदि फर्श के बेस या पानी के रिसाव की समस्या पहले सामने आई होती तो समय रहते मरम्मत कराकर नुकसान को रोका जा सकता था। अब फर्श धंसने के बाद उन्हें मरम्मत की चिंता के साथ अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ रहा है। आवंटी चाहते हैं कि केडीए केवल प्रभावित कमरे की मरम्मत तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे भवन की स्थिति का आकलन कराए। उनका कहना है कि एक फ्लैट में इस तरह की समस्या सामने आने के बाद अन्य फ्लैटों और भवन के साझा हिस्सों की भी जांच होनी चाहिए। केवल टाइलें बदलने से नहीं होगा समाधान फर्श धंसने की घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि समस्या की जड़ क्या है। क्या फर्श के नीचे बेस तैयार करने में कोई कमी रह गई थी, पानी के रिसाव से जमीन कमजोर हुई या इसके पीछे कोई अन्य तकनीकी कारण है? इन सवालों का जवाब विस्तृत निरीक्षण और तकनीकी जांच से ही मिल सकता है। आवंटी का कहना है कि यदि केवल ऊपर की टाइलें बदलकर मरम्मत करा दी गई तो समस्या दोबारा सामने आने की आशंका बनी रहेगी। इसलिए प्रभावित हिस्से को खोलकर फर्श के नीचे की स्थिति की जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही, भवन की जल निकासी व्यवस्था और अन्य संभावित कमजोरियों का भी आकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से विशेषज्ञों की टीम भेजकर तकनीकी रिपोर्ट तैयार कराने की मांग की है। उनका कहना है कि रिपोर्ट में समस्या के कारणों के साथ मरम्मत के स्थायी उपाय भी बताए जाने चाहिए, ताकि परिवार को दोबारा इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। तस्वीरें और वीडियो साक्ष्य के तौर पर रखे आवंटी पक्ष का कहना है कि फर्श धंसने, टाइलें उखड़ने और मरम्मत की स्थिति से संबंधित तस्वीरें व वीडियो उनके पास मौजूद हैं। इनका इस्तेमाल समस्या की गंभीरता को अधिकारियों के सामने रखने के लिए किया जा सकता है। वंशवीर गुप्ता का कहना है कि यदि निर्माण संबंधी खामी की समय रहते पहचान कर उसका स्थायी समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में कोई अप्रिय घटना हो सकती है। ऐसे में उनकी मांग है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए भवन की सुरक्षा और निर्माण गुणवत्ता की जांच कराई जाए। हालांकि, फर्श धंसने के वास्तविक कारण और निर्माण में किसी मानक की अनदेखी होने की पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसके लिए तकनीकी जांच और संबंधित अभिलेखों का परीक्षण जरूरी होगा। जांच के साथ मुआवजे की भी मांग वंशवीर गुप्ता ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और निर्माण कार्य के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि केडीए को यह स्पष्ट करना चाहिए कि फर्श धंसने की वजह क्या है और इस तरह की समस्या दोबारा न हो, इसके लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। आवंटी ने मरम्मत में होने वाले खर्च और निर्माण संबंधी खामी से हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए उचित मुआवजा देने की मांग भी की है। उनका कहना है कि सरकारी आवासीय योजना में फ्लैट खरीदने वाले लोगों को निर्माण की गुणवत्ता में कमी के कारण अपनी जेब से अतिरिक्त रकम खर्च करने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। उनकी मांग है कि तकनीकी जांच में यदि निर्माण संबंधी खामी सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार की भूमिका की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही, मरम्मत का काम इस तरह कराया जाए कि भविष्य में फर्श धंसने या अन्य संरचनात्मक समस्या का खतरा न रहे। केडीए की कार्रवाई पर टिकी नजर शिकायत के बाद केडीए के कर्मचारियों के मौके पर पहुंचने और एक कमरे की मरम्मत कराने की बात कहे जाने की जानकारी आवंटी ने दी है। हालांकि, मामले में विस्तृत तकनीकी जांच, मरम्मत की समयसीमा और मुआवजे को लेकर प्राधिकरण का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। अब देखना होगा कि केडीए इस मामले में केवल प्रभावित हिस्से की मरम्मत कराता है या भवन की निर्माण गुणवत्ता, फर्श के बेस और जल निकासी व्यवस्था की व्यापक जांच भी कराता है। आवंटी को उम्मीद है कि शिकायत पर ठोस कार्रवाई होगी और उन्हें मरम्मत के आर्थिक बोझ से राहत मिलेगी। फिलहाल, इस घटना ने केडीए की आवासीय योजनाओं में निर्माण गुणवत्ता, भवनों के रखरखाव और शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। फर्श धंसने की असल वजह तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

