जबलपुर मेडिकल कॉलेज में 1.63 करोड़ की गड़बड़ी:फीस-OPD की राशि खातों में नहीं की जमा, 4 गिरफ्तार, महिला कैशियर फरार; ₹3 हजार का इनाम घोषित

जबलपुर मेडिकल कॉलेज में 1.63 करोड़ की गड़बड़ी:फीस-OPD की राशि खातों में नहीं की जमा, 4 गिरफ्तार, महिला कैशियर फरार; ₹3 हजार का इनाम घोषित

नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में 1 करोड़ 63 लाख 78 हजार 456 रुपए के कथित वित्तीय अंतर के मामले में पुलिस की कार्रवाई जारी है। इस मामले में कैश शाखा में पदस्थ पांच कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। पुलिस अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि सहायक ग्रेड-2 और कैशियर के पद पर रही साधना चंद्रौल फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए जबलपुर पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय ने 3 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है। डीन ने दर्ज कराई एफआईआर मामला अप्रैल 2020 से नवंबर 2025 के बीच का बताया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना की शिकायत पर गढ़ा थाना पुलिस ने प्रकरण दर्ज किया है। मामले में छात्रों की फीस और अस्पताल के आईपीडी (IPD) व ओपीडी (OPD) से प्राप्त राजस्व की राशि में कथित गड़बड़ी की जांच की जा रही है। चार आरोपी गिरफ्तार, साधना चंद्रौल की तलाश जारी पुलिस ने मामले में मनोहर केवट (स्टोर कीपर/पूर्व कैशियर), भानू सिंह शाक्यवार (सहायक ग्रेड-3), अरविंद धुर्वे (स्टेनो टाइपिस्ट/कैशियर प्रभारी) और विशाल सराठे (सहायक ग्रेड-3) को गिरफ्तार किया है। वहीं, साधना चंद्रौल की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। गढ़ा थाना प्रभारी प्रसन्न शर्मा के मुताबिक, साधना चंद्रौल, पति स्वर्गीय आर.एन. चंद्रौल, उम्र 45 वर्ष, शिवनगर अधारताल की निवासी हैं। वह मेडिकल कॉलेज में सहायक ग्रेड-2 के पद पर पदस्थ रही हैं। पुलिस लगातार उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। गिरफ्तारी में मदद के लिए एसपी ने 3 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है। इस मामले में अपराध क्रमांक 535/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5), 315(4) और 61(2) के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) में प्रकरण दर्ज किया गया है। कैश, बैंक जमा और रिकॉर्ड के मिलान में सामने आया अंतर मामला मेडिकल कॉलेज की कैश शाखा के वित्तीय रिकॉर्ड से जुड़ा है। शिकायत के बाद MRB, कैश बुक और बैंक खातों में जमा राशि का मिलान किया गया। पुलिस जांच में प्राप्त नकद राशि और बैंक में जमा रकम के बीच कथित अंतर सामने आने की बात कही गई है। इसी आधार पर कैश शाखा में काम करने वाले कर्मचारियों की भूमिका जांच के दायरे में आई। आरोप है कि मरीजों और छात्रों से फीस तथा अस्पताल की अन्य सेवाओं के लिए राशि ली जाती थी। उन्हें आधिकारिक रसीद भी दी जाती थी, लेकिन कथित तौर पर पूरी रकम बैंक खाते में जमा नहीं की जाती थी। इस तरह पांच साल की अवधि में सरकारी राजस्व में गड़बड़ी होने का संदेह जताया गया है। हालांकि, मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा। पांच साल तक कैसे नहीं पकड़ में आई कथित गड़बड़ी? मामले में एक बड़ा सवाल यह भी है कि यदि कैश शाखा में प्राप्त राशि और बैंक में जमा रकम के बीच लगातार अंतर रहा, तो इसका पता समय रहते क्यों नहीं चल सका। कैश बुक, MRB और बैंक खातों का नियमित मिलान किस स्तर पर किया जाता था? क्या समय-समय पर ऑडिट और वित्तीय सत्यापन हुआ था? यदि हुआ, तो कथित अंतर पहले सामने क्यों नहीं आया? इन सवालों के जवाब जांच के लिहाज से अहम हैं। वित्तीय रिकॉर्ड के सत्यापन से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित गड़बड़ी किस अवधि में हुई और इसमें किन कर्मचारियों की क्या भूमिका रही। फरार महिला आरोपी की गिरफ्तारी पर सवाल चार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद साधना चंद्रौल का अब तक पुलिस की गिरफ्त में नहीं आना भी चर्चा का विषय है। पुलिस उनकी तलाश में दबिश देने और गिरफ्तारी के प्रयास करने की बात कह रही है। हालांकि, उनकी फरारी के कारणों, संभावित ठिकाने या किसी व्यक्ति से मदद मिलने के संबंध में फिलहाल कोई पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। मामले में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि साधना चंद्रौल की गिरफ्तारी के बाद कथित वित्तीय अंतर, कैश शाखा की कार्यप्रणाली और अन्य कर्मचारियों की भूमिका को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं। फिलहाल पुलिस वित्तीय दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है। साधना चंद्रौल की गिरफ्तारी और जांच के निष्कर्षों के बाद ही मामले से जुड़े बाकी सवालों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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