शासकीय कार्यों में लापरवाही के चलते कलेक्टर अजय कटेसरिया ने पिपलोदा तहसील में पदस्थ परिवीक्षाधीन पटवारी रजनीश राज रैगा की परिवीक्षा समाप्त कर उन्हें सेवा से पृथक कर दिया है। रैगा की नियुक्ति अनुकंपा के आधार पर हुई थी। इससे पहले स्वामित्व योजना के कार्यों में लापरवाही के आधार पर चार पटवारियों की सेवाएं भी समाप्त की जा चुकी हैं। स्वामित्व योजना में निष्पादक (एग्जीक्यूटर) की भूमिका से हटाने की मांग को लेकर मध्य प्रदेश में पटवारियों ने काम बंद कर दिया है। प्रदेश पटवारी संघ के आह्वान पर रतलाम जिले में भी पटवारी हड़ताल पर हैं। काम नहीं करने पर कलेक्टर चार परिवीक्षाधीन पटवारियों की सेवा समाप्त कर चुके हैं। इसके विरोध में पटवारियों ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट में पांच घंटे धरना देकर प्रदर्शन किया था। इस दौरान कलेक्टर और जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की गई थी। उसी रात कलेक्टर ने 12 पटवारियों को आरोप पत्र जारी किए थे। 53 पटवारियों को अंतिम चेतावनी कलेक्टर ने सैलाना के 16, आलोट के 22 और जावरा के 15 परिवीक्षाधीन पटवारियों सहित कुल 53 पटवारियों को अंतिम चेतावनी पत्र जारी किए हैं। उन्हें अपनी कार्यप्रणाली में तत्काल सुधार करने का अवसर दिया गया है। कलेक्टर के अनुसार, यह संबंधित कर्मचारियों के लिए अपने दायित्वों के प्रति गंभीरता दिखाने, कमियों को दूर करने और सेवाभाव से काम करने का अंतिम मौका है। शासकीय सेवा कर्मचारी और उसके परिवार की आजीविका व भविष्य से जुड़ी होती है। वहीं, अनेक नागरिक अपनी समस्याओं के समाधान और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए शासकीय सेवकों पर निर्भर रहते हैं। इसलिए संबंधित पटवारियों से अपेक्षा है कि वे चेतावनी को गंभीरता से लें और अपने काम में तत्काल सुधार करें। ऐसा नहीं होने पर उनकी सेवाएं समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी। जनसेवा के दायित्वों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं कलेक्टर कटेसरिया ने कहा कि वे समझते हैं कि नौकरी हासिल करना कठिन होता है और इससे कर्मचारी व उसके परिवार की कई उम्मीदें जुड़ी होती हैं। लेकिन शासकीय सेवा के साथ जनता के प्रति जिम्मेदारी निभाने और राज्य शासन के निर्देशों का पालन करने का दायित्व भी जुड़ा है। इसलिए शासन के आदेशों की अवहेलना और सौंपे गए कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि परिवीक्षा अवधि कर्मचारी को अपनी कार्यक्षमता, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा साबित करने का अवसर देती है। यदि कोई शासकीय सेवक इसी अवधि में मनमाने ढंग से काम करता है और अपने दायित्वों के प्रति गंभीरता नहीं दिखाता, तो उससे आगामी 30-35 वर्षों तक जिम्मेदारी से सेवा करने की अपेक्षा करना उचित नहीं होगा। ऐसे मामलों में शुरुआती स्तर पर ही सेवा समाप्त करने का निर्णय लेना आवश्यक है। रिक्त पदों पर अनुकंपा नियुक्ति के निर्देश कलेक्टर कटेसरिया ने जिले में लंबित अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों पर भी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सेवा से पृथक किए गए पटवारियों के रिक्त पदों पर अनुकंपा नियुक्ति के पात्र आवेदकों को नियमानुसार नियुक्ति देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए, ताकि आश्रित परिवारों को सहारा मिल सके और रिक्त पदों पर आवश्यक सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें।

